10 में से पाठ 9 · भारतीय राजव्यवस्था और संविधान

केंद्र-राज्य संबंध, राज्यपाल और आपातकालीन उपबंध

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विधायी संबंध

भाग XI (अनुच्छेद 245 से 263) और भाग XII केंद्र-राज्य संबंधों को नियंत्रित करते हैं। अनुच्छेद 246 सातवीं अनुसूची के माध्यम से विषयों का बँटवारा करता है: संघ सूची (मूल रूप से 97 विषय, जैसे रक्षा, विदेश मामले और रेलवे), राज्य सूची (मूल रूप से 66, जैसे पुलिस, लोक व्यवस्था और कृषि) और समवर्ती सूची (मूल रूप से 47, जैसे आपराधिक विधि, विवाह और आर्थिक योजना)। 42वें संशोधन (1976) ने पाँच विषय समवर्ती सूची में डाले: शिक्षा, वन, नाप-तौल, वन्य जीवों और पक्षियों का संरक्षण, और न्याय प्रशासन। अवशिष्ट शक्तियाँ संसद के पास हैं (अनुच्छेद 248), जैसा कनाडा में है। समवर्ती विषय पर टकराव होने पर संघ का कानून प्रभावी होता है, जब तक कि राज्य का कानून राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित होकर उनकी अनुमति प्राप्त न कर चुका हो (अनुच्छेद 254)।

राज्य विषयों पर संसद

संसद राज्य सूची के किसी विषय पर कानून बना सकती है, जब राज्य सभा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से संकल्प पारित करे कि यह राष्ट्रीय हित में आवश्यक है (अनुच्छेद 249, एक बार में एक वर्ष के लिए मान्य); राष्ट्रीय आपात के दौरान (अनुच्छेद 250); जब दो या अधिक राज्य अनुरोध करें (अनुच्छेद 252), जैसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के लिए; अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लागू करने के लिए (अनुच्छेद 253); और राष्ट्रपति शासन के दौरान।

प्रशासनिक और वित्तीय संबंध

राज्यों को संघ के कानूनों का पालन करना होता है और केंद्र उन्हें निर्देश दे सकता है (अनुच्छेद 256 और 257)। अनुच्छेद 312 के तहत अखिल भारतीय सेवाओं में IAS, IPS और भारतीय वन सेवा (1966) शामिल हैं। अनुच्छेद 262 के तहत संसद ने अंतर-राज्य नदी जल विवाद अधिनियम 1956 पारित किया। वित्त में, अनुच्छेद 268 संघ द्वारा लगाए पर राज्यों द्वारा संग्रहित शुल्कों से, अनुच्छेद 269 राज्यों को सौंपे गए करों से, अनुच्छेद 269A अंतर-राज्य व्यापार पर GST से और अनुच्छेद 270 संघ और राज्यों के बीच बाँटे जाने वाले करों से संबंधित है; अनुच्छेद 275 सहायता अनुदान और अनुच्छेद 282 विवेकाधीन अनुदान का उपबंध करता है। 101वें संशोधन (2016) ने GST परिषद (अनुच्छेद 279A) बनाई, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं और जिसके निर्णयों के लिए तीन-चौथाई भारित बहुमत चाहिए, जिसमें केंद्र के मत का भार एक-तिहाई और राज्यों का दो-तिहाई है।

वित्त आयोग और सहयोगी निकाय

अनुच्छेद 280 के तहत राष्ट्रपति हर पाँचवें वर्ष या उससे पहले एक अध्यक्ष और 4 सदस्यों वाला वित्त आयोग गठित करते हैं। यह सिफारिश करता है कि साझा करों को केंद्र और राज्यों के बीच तथा राज्यों के आपस में कैसे बाँटा जाए, सहायता अनुदान के सिद्धांत क्या हों, और पंचायतों तथा नगरपालिकाओं के लिए राज्यों की निधि बढ़ाने के उपाय क्या हों; इसकी सलाह बाध्यकारी नहीं है। पहले वित्त आयोग (1951) के अध्यक्ष के.सी. नियोगी थे। अनुच्छेद 263 के तहत अंतर-राज्य परिषद 1990 में सरकारिया आयोग की सलाह पर बनी, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। पाँच क्षेत्रीय परिषदें, जिनकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री करते हैं, राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 के तहत बने सांविधिक निकाय हैं।

राज्यपाल और राज्य विधानमंडल

राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं (अनुच्छेद 155) और वे राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं (अनुच्छेद 156), सामान्यतः 5 वर्ष के लिए; नियुक्त होने वाला व्यक्ति भारत का नागरिक और कम से कम 35 वर्ष का होना चाहिए (अनुच्छेद 157)। शपथ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष ली जाती है, और बी.पी. सिंघल (2010) में न्यायालय ने कहा कि राज्यपाल को मनमाने ढंग से नहीं हटाया जा सकता। राज्यपाल मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करते हैं (अनुच्छेद 163), सिवाय विवेकाधीन मामलों के, जैसे विधेयक आरक्षित करना या शासन विफल होने की रिपोर्ट भेजना; राज्यपाल अध्यादेश जारी कर सकते हैं (अनुच्छेद 213) और अनुच्छेद 161 के तहत उन विषयों से संबंधित कानूनों के विरुद्ध अपराधों में, जिन पर राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार है, क्षमा, प्रविलंबन, विराम या परिहार दे सकते हैं अथवा दंडादेश का निलंबन, परिहार या लघुकरण कर सकते हैं। अनुच्छेद 169 के तहत विधान सभा द्वारा विशेष बहुमत से पारित संकल्प पर संसद विधान परिषद का सृजन या उत्सादन करती है; विधान परिषद में अधिकतम विधान सभा की सदस्य संख्या का एक-तिहाई और कम से कम 40 सदस्य होते हैं (अनुच्छेद 171)।

राष्ट्रीय आपात (अनुच्छेद 352)

यदि युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह से भारत की सुरक्षा को खतरा हो, तो राष्ट्रपति इसकी उद्घोषणा कर सकते हैं; 44वें संशोधन (1978) ने 'आंतरिक अशांति' के स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' रखा और मंत्रिमंडल की लिखित सलाह अनिवार्य की। प्रत्येक सदन को इसे एक महीने के भीतर विशेष बहुमत से अनुमोदित करना होता है; उसके बाद यह 6 महीने चलता है और हर 6 महीने पर असीमित बार बढ़ाया जा सकता है। लोक सभा साधारण बहुमत के संकल्प से इसे समाप्त करा सकती है। इसके दौरान संसद राज्य सूची पर कानून बना सकती है, अनुच्छेद 358 अनुच्छेद 19 को निलंबित करता है (केवल युद्ध या बाह्य आक्रमण की स्थिति में), और अनुच्छेद 359 के तहत अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर अन्य अधिकार निलंबित किए जा सकते हैं। इसकी उद्घोषणा 1962 (चीनी आक्रमण), 1971 (पाकिस्तान से युद्ध) और 1975 (आंतरिक अशांति) में हुई।

राष्ट्रपति शासन और वित्तीय आपात

अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति, यह संतुष्टि होने पर कि किसी राज्य की सरकार संविधान के अनुसार नहीं चल सकती, उस राज्य का शासन अपने हाथ में ले सकते हैं। संसद को 2 महीने के भीतर साधारण बहुमत से इसे अनुमोदित करना होता है; यह 6 महीने चलता है और अधिकतम 3 वर्ष तक बढ़ सकता है, पर एक वर्ष से आगे तभी, जब राष्ट्रीय आपात लागू हो और निर्वाचन आयोग प्रमाणित करे कि चुनाव नहीं कराए जा सकते। एस.आर. बोम्मई (1994) में न्यायालय ने कहा कि उद्घोषणा न्यायिक समीक्षा के अधीन है और बहुमत का परीक्षण सदन के पटल पर होना चाहिए। अनुच्छेद 360 के तहत भारत की वित्तीय स्थिरता या साख को खतरा होने पर वित्तीय आपात घोषित हो सकता है; 2 महीने में अनुमोदन के बाद यह रद्द होने तक चलता है और सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों सहित सभी के वेतन में कटौती की अनुमति देता है। इसकी उद्घोषणा कभी नहीं हुई।

मुख्य तथ्य

  • मूल सातवीं अनुसूची: संघ सूची 97, राज्य सूची 66, समवर्ती सूची 47 विषय; अवशिष्ट शक्तियाँ संसद के पास (अनुच्छेद 248, कनाडा से प्रेरित)।
  • 42वें संशोधन ने पाँच विषय समवर्ती सूची में डाले: शिक्षा, वन, नाप-तौल, वन्य जीवों और पक्षियों का संरक्षण, न्याय प्रशासन।
  • अनुच्छेद 249: राज्य सभा का संकल्प (उपस्थित और मत देने वालों का दो-तिहाई) संसद को एक बार में एक वर्ष के लिए राज्य सूची के विषय पर कानून बनाने देता है।
  • अनुच्छेद 263: अंतर-राज्य परिषद, 1990 में सरकारिया आयोग की सलाह पर बनी, अध्यक्ष प्रधानमंत्री; क्षेत्रीय परिषदें: राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956, अध्यक्ष केंद्रीय गृह मंत्री।
  • केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा: राजमन्नार समिति (1969, तमिलनाडु द्वारा गठित), सरकारिया आयोग (1983), पुंछी आयोग (2007)।
  • वित्त आयोग (अनुच्छेद 280): हर 5 वर्ष, अध्यक्ष + 4 सदस्य; पहले (1951) के अध्यक्ष के.सी. नियोगी। GST परिषद (अनुच्छेद 279A, 101वाँ संशोधन 2016): अध्यक्ष केंद्रीय वित्त मंत्री।
  • राज्यपाल: राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त (अनुच्छेद 155), न्यूनतम आयु 35, शपथ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष; बी.पी. सिंघल (2010): मनमाने ढंग से हटाने पर रोक।
  • विधान परिषद (अनुच्छेद 171): अधिकतम विधान सभा का एक-तिहाई, न्यूनतम 40 सदस्य; एक-तिहाई विधायकों द्वारा, एक-तिहाई स्थानीय निकायों द्वारा, बारहवाँ-बारहवाँ भाग स्नातकों और शिक्षकों द्वारा निर्वाचित, शेष राज्यपाल द्वारा मनोनीत।
  • आपात का अनुमोदन: राष्ट्रीय (352) एक महीने में विशेष बहुमत से; राष्ट्रपति शासन (356) और वित्तीय आपात (360) 2 महीने में साधारण बहुमत से।
  • राष्ट्रीय आपात 1962, 1971 और 1975 में; राष्ट्रपति शासन पहली बार 1951 में पंजाब में; वित्तीय आपात कभी नहीं; एस.आर. बोम्मई (1994): सदन में बहुमत परीक्षण आवश्यक।

एक नज़र में दोहराव

अनु. 245-263 केंद्र-राज्य संबंध; सातवीं अनुसूची की सूचियाँ मूल रूप से 97/66/47; अवशिष्ट शक्ति अनु. 248; अनु. 249, 250, 252, 253 के तहत संसद राज्य सूची पर कानून बना सकती है; अनु. 254 विरोध की स्थिति; अनु. 312 अखिल भारतीय सेवाएँ; अनु. 262 जल विवाद; अनु. 263 अंतर-राज्य परिषद 1990; वित्त आयोग अनु. 280; GST परिषद अनु. 279A; राज्यपाल अनु. 153-161; विधान परिषद अनु. 169, 171; आपात अनु. 352, 356, 360; 44वाँ संशोधन: सशस्त्र विद्रोह; बोम्मई 1994।

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