10 में से पाठ 4 · मध्य प्रदेश सामान्य ज्ञान

मध्यप्रदेश का गठन: 1956 का विलय, विधानमंडल, उच्च न्यायालय और राजकीय प्रतीक

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1956 से पहले की चार इकाइयाँ

स्वतंत्रता के बाद वर्तमान राज्य का क्षेत्र चार इकाइयों में बँटा था। पुराना मध्यप्रदेश, एक भाग 'क' राज्य, पूर्ववर्ती मध्य प्रांत और बरार था, जिसकी राजधानी नागपुर थी और पंडित रविशंकर शुक्ल इसके मुख्यमंत्री थे। भाग 'ख' राज्य मध्य भारत 28 मई 1948 को ग्वालियर, इंदौर और मालवा की छोटी रियासतों से बना; जीवाजीराव सिंधिया इसके राजप्रमुख थे और ग्वालियर तथा इंदौर क्रमशः इसकी शीतकालीन और ग्रीष्मकालीन राजधानियाँ थीं। बुंदेलखंड और बघेलखंड की रियासतों से 1948 में बना विंध्य प्रदेश, जिसकी राजधानी रीवा थी, 1950 में भाग 'ग' राज्य बना। 1 जून 1949 को भारत में विलीन भोपाल राज्य भी भाग 'ग' राज्य था, और शंकरदयाल शर्मा 1952 से 1956 तक इसके मुख्यमंत्री रहे।

1956 का पुनर्गठन

फज़ल अली की अध्यक्षता तथा के. एम. पणिक्कर और एच. एन. कुंजरू की सदस्यता वाले 1953 के राज्य पुनर्गठन आयोग ने 1955 में अपना प्रतिवेदन दिया, जिसके बाद राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 आया। 1 नवंबर 1956 को मध्य भारत, विंध्य प्रदेश, भोपाल राज्य और पुराने मध्यप्रदेश के हिंदीभाषी महाकोशल जिलों को मिलाकर मध्यप्रदेश बना। नागपुर सहित मराठीभाषी विदर्भ के जिले बंबई राज्य में गए; मंदसौर का सुनेल क्षेत्र राजस्थान को गया, और कोटा का सिरोंज उपखंड मध्यप्रदेश में आया। नया राज्य उस समय क्षेत्रफल में भारत का सबसे बड़ा राज्य था, और 1 नवंबर हर वर्ष मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है।

राजधानी और पहले पदाधिकारी

पूर्ववर्ती भोपाल राज्य की राजधानी भोपाल नए राज्य की राजधानी बनी। पहले राज्यपाल डॉ. बी. पट्टाभि सीतारमैया, पहले मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल, जिनका निधन 31 दिसंबर 1956 को हुआ, और विधानसभा के पहले अध्यक्ष पंडित कुंजीलाल दुबे थे। बाद में भारत के मुख्य न्यायाधीश और उपराष्ट्रपति बने न्यायमूर्ति एम. हिदायतुल्ला मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के पहले मुख्य न्यायाधीश थे। राज्य सचिवालय (मंत्रालय) भोपाल का वल्लभ भवन है, और विधान भवन का डिज़ाइन वास्तुकार चार्ल्स कोरिया ने बनाया।

छत्तीसगढ़ का पृथक्करण

मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 द्वारा 1 नवंबर 2000 को, राज्य गठन के ठीक 44 वर्ष बाद, दक्षिण-पूर्वी जिलों को अलग कर रायपुर राजधानी वाला छत्तीसगढ़ बनाया गया। मध्यप्रदेश ने भिलाई इस्पात संयंत्र, कोरबा का बिजली और एल्युमिनियम केंद्र, बैलाडीला की लौह अयस्क खदानें और बस्तर के अधिकांश वन खो दिए, और यह राजस्थान के बाद क्षेत्रफल में दूसरा सबसे बड़ा राज्य बन गया। 90 सीटें छत्तीसगढ़ में जाने से विधानसभा की सीटें 320 से घटकर 230 रह गईं; लोकसभा सीटें 40 से 29 और राज्यसभा सीटें 16 से 11 हो गईं।

विधानमंडल

मध्यप्रदेश में एकसदनीय विधानमंडल है, अर्थात विधानसभा, जिसके 230 सदस्य पाँच वर्ष के लिए चुने जाते हैं; 2008 के परिसीमन के बाद से 35 सीटें अनुसूचित जातियों और 47 अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं। संविधान (सातवाँ संशोधन) अधिनियम, 1956 ने अनुच्छेद 168 में विधान परिषद वाले राज्यों में मध्यप्रदेश को जोड़ा, पर यह प्रावधान राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित तिथि से ही लागू होना था, जो आज तक नहीं हुआ, इसलिए विधान परिषद कभी अस्तित्व में नहीं आई। राज्य लोकसभा में 29 सदस्य भेजता है, जिनमें 4 सीटें अनुसूचित जातियों और 6 अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं, तथा राज्यसभा में 11 सदस्य।

न्यायालय और राज्य संस्थाएँ

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ जबलपुर में है और खंडपीठें इंदौर तथा ग्वालियर में हैं; इसका मूल 1936 के नागपुर उच्च न्यायालय में है। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) इंदौर में और राजस्व मंडल ग्वालियर में है, जबकि 1981 के अधिनियम के अंतर्गत गठित लोकायुक्त, राज्य निर्वाचन आयोग और माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल में हैं। 73वें संविधान संशोधन के बाद राज्य ने 1993 में अपना पंचायत राज अधिनियम पारित किया और 1994 में नई व्यवस्था के अंतर्गत पंचायत चुनाव कराए; इसे प्रायः ऐसा करने वाला पहला राज्य बताया जाता है।

राजकीय प्रतीक

राजकीय पशु बारहसिंगा है, जिसकी कठोर भूमि वाली उप-प्रजाति कान्हा में बची है; राजकीय पक्षी दूधराज (भारतीय पैराडाइज़ फ्लाईकैचर) है, और राजकीय वृक्ष बरगद है। 2011 में महाशीर को राजकीय मछली और 2013 में मलखंब को राजकीय खेल घोषित किया गया, और महेश श्रीवास्तव द्वारा लिखित राज्य गीत 'मेरा मध्यप्रदेश' 2010 में अपनाया गया। ये प्रतीक प्रायः एक-पंक्ति प्रश्नों में, अक्सर सुमेलन (मिलान) के रूप में, पूछे जाते हैं।

मुख्य तथ्य

  • 1956 से पहले: पुराना मध्यप्रदेश (भाग 'क', राजधानी नागपुर), मध्य भारत (भाग 'ख', ग्वालियर और इंदौर), विंध्य प्रदेश (भाग 'ग', रीवा) और भोपाल (भाग 'ग')।
  • मध्य भारत 28 मई 1948 को बना, राजप्रमुख जीवाजीराव सिंधिया; भोपाल 1 जून 1949 को भारत में विलीन हुआ।
  • राज्य पुनर्गठन आयोग: फज़ल अली (अध्यक्ष), के. एम. पणिक्कर और एच. एन. कुंजरू; मध्यप्रदेश का गठन 1 नवंबर 1956 को हुआ।
  • पहले पदाधिकारी: राज्यपाल पट्टाभि सीतारमैया, मुख्यमंत्री रविशंकर शुक्ल, विधानसभा अध्यक्ष कुंजीलाल दुबे, मुख्य न्यायाधीश एम. हिदायतुल्ला।
  • मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के अंतर्गत 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ बना: विधानसभा 320 से 230, लोकसभा 40 से 29, राज्यसभा 16 से 11।
  • विधानसभा: 230 सीटें (35 अनुसूचित जाति, 47 अनुसूचित जनजाति); एकसदनीय; सातवें संशोधन, 1956 में विधान परिषद का प्रावधान हुआ पर गठन कभी नहीं हुआ।
  • लोकसभा: 29 सीटें (4 अनुसूचित जाति, 6 अनुसूचित जनजाति); राज्यसभा: 11 सीटें।
  • स्थान: उच्च न्यायालय जबलपुर (खंडपीठ इंदौर और ग्वालियर), MPPSC इंदौर, राजस्व मंडल ग्वालियर, मंत्रालय वल्लभ भवन, भोपाल।
  • राजकीय प्रतीक: पशु बारहसिंगा, पक्षी दूधराज, वृक्ष बरगद, मछली महाशीर (2011), खेल मलखंब (2013), गीत 'मेरा मध्यप्रदेश' (2010)।

एक नज़र में दोहराव

1956 से पहले: पुराना मध्यप्रदेश (भाग 'क', नागपुर), मध्य भारत (भाग 'ख', 28 मई 1948), विंध्य प्रदेश (रीवा), भोपाल (विलय 1 जून 1949); फज़ल अली का राज्य पुनर्गठन आयोग; मध्यप्रदेश का गठन 1 नवंबर 1956, राजधानी भोपाल; पहले राज्यपाल पट्टाभि सीतारमैया, मुख्यमंत्री रविशंकर शुक्ल, अध्यक्ष कुंजीलाल दुबे, मुख्य न्यायाधीश हिदायतुल्ला; छत्तीसगढ़ 1 नवंबर 2000 को अलग; विधानसभा 230 (35 अजा, 47 अजजा), एकसदनीय; लोकसभा 29, राज्यसभा 11; उच्च न्यायालय जबलपुर, खंडपीठ इंदौर और ग्वालियर; MPPSC इंदौर; बारहसिंगा, दूधराज, बरगद, महाशीर, मलखंब।

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