10 में से पाठ 3 · मध्य प्रदेश सामान्य ज्ञान

आधुनिक मध्यप्रदेश: ब्रिटिश शासन, 1857 की क्रांति और स्वतंत्रता संग्राम

AI की सहायता से तैयार किया गया और 28 अक्टूबर 2026 को तथ्यों की जाँच की गई; किसी मानव संपादक ने इसे अभी पंक्ति-दर-पंक्ति नहीं पढ़ा है। कोई गलती दिखे तो हमें बताइए। संपादकीय मानक और सुधार

ब्रिटिश नियंत्रण

तीसरे आंग्ल-मराठा युद्ध ने मध्य भारत को अंग्रेज़ों के अधीन कर दिया। 21 दिसंबर 1817 को महिदपुर (उज्जैन जिला) के युद्ध में होलकर सेना पराजित हुई, और 1818 की मंदसौर की संधि से इंदौर ने ब्रिटिश सर्वोच्चता स्वीकार कर कुछ क्षेत्र छोड़ दिए। मराठों से लिए गए क्षेत्रों को सागर एवं नर्मदा क्षेत्र (सॉगर एंड नर्बदा टेरिटरीज़) के रूप में संगठित किया गया, जिन्हें नागपुर के साथ मिलाकर 1861 में नागपुर राजधानी वाला मध्य प्रांत बना; 1903 में बरार को इसके प्रशासन में जोड़ा गया और 1936 में प्रांत का नाम 'मध्य प्रांत और बरार' हुआ। ग्वालियर, इंदौर, भोपाल, रीवा, धार, देवास, दतिया, ओरछा और पन्ना सहित देशी रियासतों की देखरेख 1854 में बनी सेंट्रल इंडिया एजेंसी करती थी, जिसका गवर्नर-जनरल का एजेंट इंदौर में बैठता था।

मध्यप्रदेश में 1857

क्रांति इस क्षेत्र में 3 जून 1857 को पहुँची, जब नीमच की सेना ने विद्रोह किया। 1 जुलाई 1857 को सआदत खाँ के नेतृत्व में सैनिकों ने इंदौर की ब्रिटिश रेजीडेंसी पर हमला किया, और महू की सेना भी विद्रोह में शामिल हुई। जबलपुर में गोंड राजा शंकरशाह और उनके पुत्र रघुनाथशाह को, जिन्होंने विद्रोह का आह्वान करने वाली कविताएँ लिखी थीं, 18 सितंबर 1857 को तोप के मुँह से बाँधकर उड़ा दिया गया। मंडला क्षेत्र में रामगढ़ की रानी अवंतीबाई लोधी ने अंग्रेज़ों के विरुद्ध सेना खड़ी की और घिर जाने पर 20 मार्च 1858 को आत्मबलिदान दिया; बरगी बाँध का नाम उनके सम्मान में रानी अवंतीबाई लोधी सागर रखा गया है। धार के अमझेरा के राजा बख्तावर सिंह को 1858 में इंदौर में फाँसी दी गई।

झाँसी और ग्वालियर का संबंध

रानी लक्ष्मीबाई की झाँसी अब उत्तर प्रदेश में है, पर उनके अंतिम युद्ध मध्यप्रदेश में लड़े गए। झाँसी और कालपी के पतन के बाद वे तात्या टोपे और राव साहब से मिलीं, और ग्वालियर की सेना की सहायता से उन्होंने 1 जून 1858 को ग्वालियर का किला जीत लिया, जबकि जयाजीराव सिंधिया आगरा भाग गए। 18 जून 1858 को ग्वालियर के पास ह्यूरोज़ की सेना से लड़ते हुए रानी वीरगति को प्राप्त हुईं, और उनकी समाधि ग्वालियर में है। इसके बाद तात्या टोपे ने मध्य भारत में लंबा छापामार अभियान चलाया, जब तक नरवर के मानसिंह ने उनसे विश्वासघात नहीं किया; वे पारोन के जंगल में पकड़े गए और 18 अप्रैल 1859 को शिवपुरी में उन्हें फाँसी दी गई।

जनजातीय प्रतिरोध

निमाड़ और सतपुड़ा के वनों के भीलों और अन्य जनजातियों ने दशकों तक ब्रिटिश शासन का विरोध किया। बड़वानी क्षेत्र के भील नेता भीमा नायक 1857 के दौरान और उसके बाद अंग्रेज़ों से लड़े और उन्हें अंडमान द्वीप भेज दिया गया। 'भारतीय रॉबिन हुड' कहे जाने वाले निमाड़ के टंट्या भील सरकारी खज़ानों और धनी साहूकारों को लूटकर गरीबों में बाँटते थे; विश्वासघात से पकड़े जाने के बाद 1889 में जबलपुर में उन्हें फाँसी दी गई, और उनका स्मारक महू के पास पातालपानी में है।

राष्ट्रीय आंदोलन के सत्याग्रह

झंडा सत्याग्रह 1923 में जबलपुर से आरंभ हुआ, जब अधिकारियों ने टाउन हॉल पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने पर आपत्ति की; इसका नेतृत्व पंडित सुंदरलाल ने किया, गिरफ्तार होने वालों में सुभद्राकुमारी चौहान भी थीं, और आंदोलन नागपुर तक फैल गया। 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान सतपुड़ा क्षेत्र के जनजातीय लोगों ने जंगल सत्याग्रह में वन कानून तोड़े: बैतूल के घोड़ाडोंगरी में इसका नेतृत्व गंजन सिंह कोरकू ने किया, और सिवनी जिले के टुरिया में पुलिस की गोलीबारी में कई सत्याग्रही मारे गए। 14 जनवरी 1931 को छतरपुर जिले में उर्मिल नदी के तट पर चरण पादुका में एक शांतिपूर्ण सभा पर ब्रिटिश सेना ने गोलियाँ चलाईं; इस घटना को मध्यप्रदेश का जलियाँवाला बाग कहा जाता है। 1939 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 52वाँ अधिवेशन जबलपुर के पास त्रिपुरी में हुआ, जहाँ गांधीजी समर्थित प्रत्याशी पट्टाभि सीतारमैया को हराकर पुनः अध्यक्ष बने सुभाषचंद्र बोस को उस संकट का सामना करना पड़ा जिसके कारण उन्होंने त्यागपत्र दिया।

क्रांतिकारी और लेखक

चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को वर्तमान अलीराजपुर जिले के भाबरा गाँव में हुआ, जिसका नाम अब चंद्रशेखर आज़ाद नगर है। हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के नेता आज़ाद 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में पुलिस से लड़ते हुए शहीद हुए। 'एक भारतीय आत्मा' के नाम से प्रसिद्ध माखनलाल चतुर्वेदी ने राष्ट्रवादी साप्ताहिक 'कर्मवीर' का संपादन किया और 'पुष्प की अभिलाषा' लिखी। पंडित रविशंकर शुक्ल, सेठ गोविंददास, द्वारका प्रसाद मिश्र और पंडित सुंदरलाल ने महाकोशल में कांग्रेस का नेतृत्व किया, और जबलपुर की सुभद्राकुमारी चौहान ने प्रसिद्ध कविता 'झाँसी की रानी' लिखी।

रियासत भोपाल और उसका विलय

दोस्त मोहम्मद खाँ द्वारा स्थापित भोपाल पर 1819 से 1926 तक चार बेगमों ने शासन किया: कुदसिया बेगम, सिकंदर बेगम, शाहजहाँ बेगम और सुल्तान जहाँ बेगम, जिनमें अंतिम 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की पहली कुलाधिपति बनीं। उनके पुत्र नवाब हमीदुल्ला खाँ ने 1947 के बाद अपनी रियासत को भारतीय संघ में मिलाने का विरोध किया, पर विलीनीकरण आंदोलन के दबाव में 1 जून 1949 को भोपाल भारत का अंग बना और केंद्र ने मुख्य आयुक्त के माध्यम से इसका प्रशासन संभाला; संविधान लागू होने पर 1950 में यह भाग 'ग' राज्य बना।

मुख्य तथ्य

  • महिदपुर का युद्ध (उज्जैन जिला), 21 दिसंबर 1817: होलकर सेना पराजित; इसके बाद 1818 में मंदसौर की संधि हुई।
  • मध्य प्रांत 1861 में नागपुर राजधानी के साथ बना; 1903 में बरार जुड़ा; 1936 में नाम 'मध्य प्रांत और बरार' हुआ; सेंट्रल इंडिया एजेंसी (1854) इंदौर में थी।
  • मध्यप्रदेश में 1857 की क्रांति 3 जून 1857 को नीमच से आरंभ हुई; सआदत खाँ ने 1 जुलाई 1857 को इंदौर रेजीडेंसी पर हमला किया।
  • गोंड राजा शंकरशाह और उनके पुत्र रघुनाथशाह को 18 सितंबर 1857 को जबलपुर में तोप से उड़ा दिया गया।
  • रामगढ़ (मंडला क्षेत्र) की रानी अवंतीबाई लोधी ने 20 मार्च 1858 को आत्मबलिदान दिया; बरगी बाँध उन्हीं के नाम पर है।
  • रानी लक्ष्मीबाई 18 जून 1858 को ग्वालियर के पास वीरगति को प्राप्त हुईं; नरवर के मानसिंह के विश्वासघात के बाद तात्या टोपे को 18 अप्रैल 1859 को शिवपुरी में फाँसी दी गई।
  • निमाड़ के 'भारतीय रॉबिन हुड' टंट्या भील को 1889 में जबलपुर में फाँसी दी गई; उनका स्मारक महू के पास पातालपानी में है।
  • झंडा सत्याग्रह: जबलपुर, 1923, नेतृत्व पंडित सुंदरलाल। जंगल सत्याग्रह, 1930: घोड़ाडोंगरी (बैतूल) में गंजन सिंह कोरकू, टुरिया (सिवनी) में गोलीकांड।
  • चरण पादुका (छतरपुर), 14 जनवरी 1931: मध्यप्रदेश का जलियाँवाला बाग। कांग्रेस का त्रिपुरी अधिवेशन (जबलपुर के पास), 1939: अध्यक्ष सुभाषचंद्र बोस।
  • चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को भाबरा (अलीराजपुर) में हुआ; भोपाल 1 जून 1949 को भारत में विलीन हुआ।

एक नज़र में दोहराव

महिदपुर 21 दिसंबर 1817, मंदसौर की संधि 1818; मध्य प्रांत 1861 (नागपुर), बरार 1903 में जुड़ा, सेंट्रल इंडिया एजेंसी इंदौर में; 1857 की क्रांति नीमच में 3 जून से, इंदौर रेजीडेंसी पर हमला 1 जुलाई; शंकरशाह-रघुनाथशाह को 18 सितंबर 1857 को मृत्युदंड; अवंतीबाई का बलिदान 20 मार्च 1858; लक्ष्मीबाई ग्वालियर में 18 जून 1858; तात्या टोपे को शिवपुरी में 18 अप्रैल 1859 को फाँसी; टंट्या भील को 1889 में फाँसी; झंडा सत्याग्रह जबलपुर 1923; जंगल सत्याग्रह 1930; चरण पादुका 1931; त्रिपुरी 1939; आज़ाद का जन्म भाबरा में; भोपाल विलय 1 जून 1949।

इस विषय का अभ्यास करें

मध्य प्रदेश सामान्य ज्ञान के सभी 10 पाठ