10 में से पाठ 2 · सामाजिक अध्ययन और उसका शिक्षणशास्त्र (पेपर II)

मध्यकालीन भारत: नए राजवंश, दिल्ली के सुल्तान, मुग़ल, भक्ति-सूफ़ी परंपराएँ और क्षेत्रीय संस्कृतियाँ (कक्षा VII इतिहास)

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स्रोत और नए राजवंश

लगभग 700 से 1750 तक के काल के लिए इतिहासकार अभिलेखों, सिक्कों, इमारतों, फ़ारसी में लिखे इतिवृत्तों (तवारीख़ों) और हाथ से नक़ल की गई पांडुलिपियों का उपयोग करते हैं। 7वीं से 12वीं शताब्दी के बीच नए राजवंश उभरे, जो प्रायः सामंतों, अर्थात् शक्तिशाली भूस्वामियों और योद्धाओं, से निकले थे; राष्ट्रकूट प्रमुख दंतिदुर्ग ने अपने चालुक्य स्वामी को पराजित करके हिरण्यगर्भ अनुष्ठान किया। गुर्जर-प्रतिहार, राष्ट्रकूट और पाल वंश कन्नौज पर नियंत्रण के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष में लड़े। ग़ज़नी के महमूद (997-1030) ने उपमहाद्वीप पर 17 बार आक्रमण किया और सोमनाथ जैसे मंदिरों को लूटा; उसके साथ आए अल-बिरूनी ने किताब-उल-हिंद लिखी। चौहान शासक पृथ्वीराज तृतीय ने 1191 में सुल्तान मुहम्मद ग़ोरी को हराया, परंतु 1192 में उससे हार गया।

चोल

विजयालय ने 9वीं शताब्दी के मध्य में मुत्तरैयारों से कावेरी डेल्टा छीन लिया। 985 से राजा रहे राजराज प्रथम ने तंजावुर में राजराजेश्वर मंदिर बनवाया, और उसके पुत्र राजेंद्र प्रथम ने गंगा घाटी, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया पर आक्रमण किए तथा गंगैकोंडचोलपुरम की स्थापना की। चोल कांस्य प्रतिमाएँ लुप्त-मोम तकनीक से बनाई जाती थीं। किसानों की बस्तियाँ (उर) मिलकर नाडु बनाती थीं, और ब्राह्मणों को दान में दी गई ब्रह्मदेय भूमि की देखरेख सभा करती थी; तमिलनाडु के उत्तरमेरूर के अभिलेख बताते हैं कि सभा के सदस्य एक घड़े से निकाली गई ताड़पत्र की पर्चियों के द्वारा लॉटरी से चुने जाते थे।

दिल्ली के सुल्तान

दिल्ली पहली बार तोमर राजपूतों के अधीन राजधानी बनी। सल्तनत पर पाँच वंशों ने शासन किया: आरंभिक तुर्की शासक (1206-1290), ख़लजी (1290-1320), तुग़लक़ (1320-1414), सैयद (1414-1451) और लोदी (1451-1526)। इल्तुतमिश की पुत्री रज़िया ने 1236 से 1240 तक शासन किया। अलाउद्दीन ख़लजी (1296-1316) ने मंगोलों से रक्षा के लिए सीरी को सैनिक छावनी नगर के रूप में बसाया, सैनिकों को नक़द वेतन दिया और क़ीमतों पर नियंत्रण रखा; मुहम्मद तुग़लक़ (1324-1351) ने लोगों को दौलताबाद भेजा और सांकेतिक मुद्रा चलाई। मुक्ती कहलाने वाले सेनानायकों को इक्ता दी जाती थी और वे उसके राजस्व से सैनिकों को वेतन देते थे; भू-राजस्व, अर्थात् खराज, किसान की उपज का लगभग आधा होता था। शेरशाह सूरी (1540-1545) ने हुमायूँ को हराया, और उसकी प्रशासन व्यवस्था अकबर के लिए आदर्श बनी।

मुग़ल

बाबर ने 1526 में पानीपत में इब्राहिम लोदी को और 1527 में खानवा में राणा सांगा को हराया; हुमायूँ चौसा (1539) और कन्नौज (1540) में शेरशाह से हार गया। अकबर (1556-1605) ने 1556 में पानीपत की दूसरी लड़ाई में हेमू पर विजय पाई और मनसबदारों के माध्यम से शासन किया: ज़ात से मनसबदार का पद और वेतन तय होता था, सवार से यह तय होता था कि उसे कितने घुड़सवार रखने हैं, और उसे जागीर कहलाने वाले राजस्व-क्षेत्रों के माध्यम से वेतन मिलता था। टोडरमल ने 10 वर्षों (1570-1580) तक फ़सलों की उपज और क़ीमतों का सर्वेक्षण किया और ज़ब्त व्यवस्था में राजस्व नक़द में तय किया। फ़तेहपुर सीकरी के इबादतखाने में 1575 से अकबर ने अनेक धर्मों के विद्वानों को सुना और सुलह-ए-कुल, अर्थात् सर्वत्र शांति, का विचार विकसित किया; अबुल फ़ज़ल ने अकबरनामा लिखा, जिसका तीसरा खंड आइन-ए-अकबरी है।

इमारतें और नगर

अनुप्रस्थ टोड़ा निर्माण में खंभों पर आड़ी शहतीरें रखी जाती थीं; 12वीं शताब्दी से चापाकार (मेहराबी) शैली में मेहराबों का उपयोग हुआ, जिनका भार बीच का डाट-पत्थर सँभालता था, और साथ में चूना-पत्थर के सीमेंट का भी। क़ुतुब मीनार क़ुतुबुद्दीन ऐबक और इल्तुतमिश ने बनवाई; हुमायूँ के मक़बरे ने केंद्रीय गुंबद, ऊँचे प्रवेशद्वार (पिश्तक) और चार भागों वाले बाग़, अर्थात् चारबाग, का ढाँचा स्थापित किया, जिसे शाहजहाँ ने ताजमहल में पूर्णता दी। NCERT की पुस्तक के अनुसार खजुराहो का कंदरिया महादेव मंदिर 999 में चंदेल राजा धंगदेव ने बनवाया, यद्यपि अधिकांश इतिहासकार इसे लगभग 1030 का, बाद के चंदेल राजा विद्याधर के समय का, मानते हैं। विजयनगर की राजधानी हम्पी 1565 में दक्कनी सुल्तानों से पराजय के बाद खंडहर बन गई, और पश्चिम एशिया के साथ व्यापार का मुख्य मुग़ल बंदरगाह सूरत 'मक्का का द्वार' कहलाता था, क्योंकि हज यात्रियों के जहाज़ वहीं से चलते थे।

जनजातियाँ और भक्ति के मार्ग

बंजारे व्यापारी-घुमंतू थे, जिनके कारवाँ (टांडा) अनाज ढोते थे, और अलाउद्दीन ख़लजी ने दिल्ली तक अनाज पहुँचाने में उनका उपयोग किया। गढ़ कटंगा के गोंड राज्य की रानी दुर्गावती ने मुग़लों का प्रतिरोध किया (NCERT की पुस्तक में वर्ष 1565 है; अधिकांश इतिहासकार उनके अंतिम युद्ध को 1564 का मानते हैं), और 13वीं शताब्दी में वर्तमान म्यांमार से आए अहोमों को मुग़लों ने 1662 में पराजित किया। 63 नयनार (शिव के भक्त) और 12 अलवार (विष्णु के भक्त) 7वीं से 9वीं शताब्दी के बीच तमिल में भक्ति-गीत गाते थे; शंकर (8वीं शताब्दी) ने अद्वैत और रामानुज (11वीं शताब्दी) ने विशिष्टाद्वैत की शिक्षा दी, और बसवन्ना ने 12वीं शताब्दी में कर्नाटक में वीरशैव आंदोलन चलाया। ज्ञानेश्वर, नामदेव और तुकाराम जैसे महाराष्ट्र के संत पंढरपुर के विट्ठल की उपासना करते थे। अजमेर के मुईनुद्दीन चिश्ती और दिल्ली के निज़ामुद्दीन औलिया जैसे चिश्ती सूफ़ी खानकाहों में अनुयायियों से मिलते थे। कबीर ने कर्मकांड और जाति को नकारा; गुरु नानक (1469-1539) ने करतारपुर में लंगर शुरू किया; गुरु अर्जन ने 1604 में आदि ग्रंथ का संकलन किया, और गुरु गोबिंद सिंह ने 1699 में खालसा की स्थापना की।

क्षेत्रीय संस्कृतियाँ और 18वीं शताब्दी

मलयालम भाषा 9वीं शताब्दी में महोदयपुरम के चेर राज्य में विकसित हुई; पुरी में गंग वंश के अनंतवर्मन ने 12वीं शताब्दी में जगन्नाथ मंदिर बनवाया, और 1230 में अनंगभीम तृतीय ने अपना राज्य देवता को समर्पित कर दिया; कथक मंदिरों के कथावाचकों (कथकों) से विकसित हुआ और अवध के वाजिद अली शाह के संरक्षण में फला-फूला। 1707 में औरंगज़ेब की मृत्यु के बाद नादिरशाह ने 1739 में दिल्ली को लूटा और अहमदशाह अब्दाली ने 1748 से 1761 के बीच उत्तर भारत पर पाँच बार आक्रमण किए, जबकि अवध, बंगाल और हैदराबाद लगभग स्वतंत्र हो गए। सिख मिस्लों ने राखी व्यवस्था के अंतर्गत उपज के 20 प्रतिशत के बदले किसानों को संरक्षण दिया, और रणजीत सिंह ने 1799 में लाहौर को अपनी राजधानी बनाया। मराठों ने चौथ (भू-राजस्व का 25 प्रतिशत) और सरदेशमुखी (9-10 प्रतिशत) वसूली, परंतु 1761 में पानीपत की तीसरी लड़ाई में हार गए।

मुख्य तथ्य

  • कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष: गुर्जर-प्रतिहार, राष्ट्रकूट और पाल; ग़ज़नी के महमूद (997-1030) ने 17 बार आक्रमण किया; अल-बिरूनी ने किताब-उल-हिंद लिखी।
  • चौहान पृथ्वीराज तृतीय ने 1191 में मुहम्मद ग़ोरी को हराया पर 1192 में हार गया; चोल राजा राजराज प्रथम 985 में गद्दी पर बैठा और उसने तंजावुर में राजराजेश्वर मंदिर बनवाया।
  • सल्तनत के वंश: आरंभिक तुर्की 1206-1290, ख़लजी 1290-1320, तुग़लक़ 1320-1414, सैयद 1414-1451, लोदी 1451-1526; रज़िया ने 1236-1240 तक शासन किया।
  • अलाउद्दीन ख़लजी: सीरी, नक़द वेतन, मूल्य नियंत्रण; मुहम्मद तुग़लक़: दौलताबाद, सांकेतिक मुद्रा; इक्ता मुक्ती के पास होती थी; खराज उपज का लगभग आधा था।
  • मुग़ल युद्ध: पानीपत 1526 (बाबर ने इब्राहिम लोदी को हराया), खानवा 1527 (राणा सांगा), चौसा 1539 और कन्नौज 1540 (शेरशाह ने हुमायूँ को हराया), पानीपत 1556 (अकबर की सेना ने हेमू को हराया)।
  • मनसबदारी: ज़ात = पद और वेतन, सवार = रखे जाने वाले घुड़सवार, वेतन जागीर के रूप में; टोडरमल की ज़ब्त व्यवस्था; फ़तेहपुर सीकरी का इबादतखाना (1575); सुलह-ए-कुल।
  • चापाकार शैली: डाट-पत्थर वाली मेहराब; पिश्तक और चारबाग हुमायूँ के मक़बरे और ताजमहल में; खजुराहो का कंदरिया महादेव मंदिर: NCERT में 999 और धंगदेव (अधिकांश इतिहासकार: लगभग 1030, विद्याधर)।
  • भक्ति और सूफ़ी: 63 नयनार (शिव), 12 अलवार (विष्णु); बसवन्ना (वीरशैव); पंढरपुर के विट्ठल; चिश्ती खानकाहें; करतारपुर में गुरु नानक का लंगर; आदि ग्रंथ 1604; खालसा 1699।
  • 18वीं शताब्दी: नादिरशाह ने 1739 में दिल्ली लूटी; अब्दाली ने 1748 से 1761 के बीच पाँच आक्रमण किए; चौथ 25 प्रतिशत, सरदेशमुखी 9-10 प्रतिशत; सिख राखी 20 प्रतिशत; रणजीत सिंह की राजधानी लाहौर 1799।
  • कक्षा में: एक ही राजा के बारे में दरबारी इतिवृत्त और मंदिर-अभिलेख की तुलना करवाएँ और पूछें कि प्रत्येक लेखक ने उसकी प्रशंसा या निंदा क्यों की; केवल वंशों और तिथियों के प्रश्न न पूछें।

एक नज़र में दोहराव

कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष; महमूद ग़ज़नवी के 17 आक्रमण; पृथ्वीराज तृतीय 1191 और 1192; चोल: राजराज प्रथम 985, उत्तरमेरूर की सभा; सल्तनत के पाँच वंश 1206-1526; इक्ता, खराज; मुग़ल: पानीपत 1526, मनसबदारी, ज़ब्त, सुलह-ए-कुल; चापाकार मेहराबें; बंजारे, गोंड, अहोम; नयनार, अलवार, सूफ़ी, कबीर, नानक; कथक; नादिरशाह 1739; पानीपत 1761।

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