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DAILY · 2026-11-02

डॉ. जितेंद्र सिंह ने किश्तवाड़ में नई भूकंपीय वेधशाला का उद्घाटन किया; वर्ष 2027 में चार और डॉप्लर मौसम रडार चालू किए जाएंगे

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 2 नवंबर 2026 को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के माध्यम से जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ के उच्च भूकंपीय क्षेत्र में नई भूकंपीय वेधशाला का उद्घाटन किया। अत्याधुनिक डिजिटल भूकंपीय उपकरणों से सुसज्जित यह वेधशाला वास्तविक समय में आंकड़े नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के भूकंप निगरानी केंद्र को भेजेगी; इसके साथ जम्मू-कश्मीर में अब चार भूकंपीय वेधशालाएं हैं - जम्मू, श्रीनगर, उधमपुर और किश्तवाड़ में। मंत्री ने बताया कि पहले इस क्षेत्र में डॉप्लर मौसम रडार की कोई सुविधा नहीं थी, वर्ष 2014 के बाद बनिहाल, जोत, जम्मू और श्रीनगर में चार डॉप्लर मौसम रडार स्थापित किए गए हैं, और वर्ष 2027 में डोडा, किश्तवाड़, अनंतनाग और बारामूला में चार और डॉप्लर मौसम रडार चालू किए जाने हैं। पहले उधमपुर, कठुआ और रामबन में तीन स्वचालित मौसम केंद्र थे; नौ और केंद्र स्थापित किए जाने से इनकी कुल संख्या बढ़कर 12 हो गई है, और इनमें किश्तवाड़ में चार, डोडा और रामबन में दो-दो और कठुआ में एक केंद्र शामिल है। संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के पांच जिलों में वर्षामापी केंद्रों की संख्या नौ से बढ़कर 15 हो गई है, इन पांच जिलों की सभी पंचायतों में पंचायत स्तर पर मौसम पूर्वानुमान उपलब्ध कराए जा रहे हैं, और मौसम पूर्वानुमान तथा कृषि-मौसम परामर्श सेवाओं का लाभ 5,467 लाभार्थियों तक पहुंचा है। उन्होंने पटनीटॉप स्थित हाई-एल्टीट्यूड क्लाउड भौतिकी प्रयोगशाला और जम्मू में स्थापित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का भी उल्लेख किया, और नागरिकों से मौसम संबंधी वैज्ञानिक चेतावनियों के अनुसार कार्रवाई करने का आग्रह करते हुए कहा, 'जानकारी महत्वपूर्ण है, लेकिन उस जानकारी के अनुसार कार्रवाई करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।'

ऊपर दी गई PIB की आधिकारिक विज्ञप्ति से AI की सहायता से तैयार, और AI की दूसरी जाँच में उसी विज्ञप्ति से मिलाया गया। किसी व्यक्ति ने इसका पंक्ति-दर-पंक्ति संपादन नहीं किया है।

पढ़ाई के लिए संदर्भ

6 अगस्त 2025 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया था कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) के अंतर्गत अगस्त 2014 में राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) की स्थापना के बाद से भूकंपीय वेधशालाओं की संख्या वर्ष 2014 की लगभग 84 से बढ़कर 168 हो गई है, जिनमें वीसैट के माध्यम से वास्तविक समय में डेटा रिपोर्टिंग की सुविधा है। एनसीएस अपनी वेबसाइट (seismo.gov.in) पर मासिक भूकंप सारांश रिपोर्ट जारी करता है, और अप्रैल 2020 से महत्वपूर्ण भूकंपों की कुल 39 रिपोर्टें जारी की गई थीं। भूकंपीय माइक्रोज़ोनेशन डेटा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा एनसीएस के माध्यम से तैयार किया जाता है: दिल्ली, बेंगलुरु, कोलकाता, गुवाहाटी, जबलपुर, देहरादून, अहमदाबाद, गांधीधाम और गंगटोक शहर इसमें शामिल किए जा चुके हैं, और वर्ष 2018 से लगभग 30 शहरों को इसमें लिया गया है।

संदर्भ: PIB (पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय), 'संसद प्रश्न: राष्ट्रीय भूकंपीय नेटवर्क', 6 अगस्त 2025

खुद जाँचें: राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की स्थापना कब और किस मंत्रालय के अंतर्गत हुई, और उस उत्तर में मंत्री ने कितनी भूकंपीय वेधशालाएं बताईं?

अगस्त 2014 में, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत; 168 (वर्ष 2014 की लगभग 84 से बढ़कर)।

अभ्यास: इस रिलीज़ से नई वेधशाला कहाँ है और उसके आंकड़े कहाँ जाएंगे, जम्मू-कश्मीर की चारों वेधशालाएं, 2014 के बाद स्थापित और आगे चालू होने वाले डॉप्लर मौसम रडार, तथा स्वचालित मौसम केंद्रों, वर्षामापी केंद्रों और लाभार्थियों के आंकड़े लिखें; नोट से एनसीएस की स्थापना कब हुई, भूकंपीय वेधशालाओं की संख्या में वृद्धि, और भूकंपीय माइक्रोज़ोनेशन में शामिल शहर।

खुद को परखें

2 नवंबर 2026 को जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में उद्घाटित नई भूकंपीय वेधशाला वास्तविक समय में आंकड़े किस संस्था के भूकंप निगरानी केंद्र को भेजेगी?

  1. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र
  2. भारत मौसम विज्ञान विभाग
  3. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण
  4. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण
उत्तर देखें

उत्तर: राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र

किश्तवाड़ की नई वेधशाला अत्याधुनिक डिजिटल भूकंपीय उपकरणों से सुसज्जित है और वास्तविक समय में आंकड़े नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के भूकंप निगरानी केंद्र को भेजेगी। इसके साथ जम्मू-कश्मीर में अब चार भूकंपीय वेधशालाएं हैं - जम्मू, श्रीनगर, उधमपुर और किश्तवाड़ में।

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