कोयला मंत्रालय के कोयला नियंत्रक संगठन ने बंद और परित्यक्त खदानों के लिए डिजिटल खदान पुनर्प्रयोजन उपकरण 'सुविकल्प' विकसित किया
कोयला मंत्रालय ने 3 नवंबर 2026 को बताया कि मंत्रालय के तहत कोयला नियंत्रक संगठन (सीसीओ) ने 'सुविकल्प- खदान पुनर्प्रयोजन उपकरण' (SUVIKALP – Mine Repurposing Tool) विकसित किया है, जो कोयला और लिग्नाइट खदान के लिए खनन योजना दिशानिर्देश, 2025 के अनुरूप एक डिजिटल निर्णय-समर्थन मंच है और बंद तथा परित्यक्त खदानों को उत्पादक संपत्तियों में बदलने में मदद के लिए बनाया गया है। सुविकल्प का उद्देश्य खनन के बाद भूमि-उपयोग के उपयुक्त अवसरों की पहचान के लिए एक वैज्ञानिक, पारदर्शी और मानकीकृत ढांचा स्थापित करना है। यह एक एकीकृत डिजिटल मंच पर भू-खनन विशेषताओं, पर्यावरणीय स्थितियों, इन्फ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता, संसाधनों की कमी, वित्तीय पहलुओं और सामाजिक-आर्थिक कारकों को एक साथ लाता है; उपयोगकर्ता खदान-विशिष्ट जानकारी दर्ज करके साइट प्रोफाइल बनाते हैं, और संभावित पुनर्प्रयोजन विकल्पों का मूल्यांकन और रैंकिंग टीओपीएसआईएस (TOPSIS - आदर्श समाधान की समानता द्वारा अनुक्रम प्राथमिकता हेतु तकनीक) पर आधारित बहु-मानदंड निर्णय (एमसीडीएम) पद्धति से की जाती है। मूल्यांकन प्रक्रिया कारक चयन, संभावित विकल्पों के निर्माण, सामुदायिक प्राथमिकताओं के एकीकरण, उपयुक्तता मूल्यांकन और अंतिम रैंकिंग के क्रम में चलती है। सुविकल्प परियोजना मूल्यांकन में स्थानीय प्राथमिकताओं को शामिल करने के लिए 'रिक्लेम' (RECLAIM) – सामुदायिक जुड़ाव और विकास ढांचे को एकीकृत करता है, और इसका 'प्रिज्म' (PRISM – पोस्ट-माइनिंग रीपर्पोजिंग इम्प्लीमेंटेशन स्ट्रैटेजिक मॉडल) मंच को कार्यान्वयन के रास्तों तक ले जाता है, जिसे परियोजना अवधारणा नोट, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय केस स्टडी, नमूना निविदा दस्तावेज, कार्यान्वयन एजेंसियों के विवरण और सर्वोत्तम प्रथाओं से जुड़े संसाधनों वाले एक एकीकृत ज्ञान भंडार का समर्थन प्राप्त है। मंत्रालय के अनुसार अगला चरण बंद और परित्यक्त कोयला और लिग्नाइट खदानों में सुविकल्प को व्यापक रूप से अपनाने, सिफारिशों को साइट-विशिष्ट व्यवहार्यता अध्ययनों, अवधारणा नोट और डीपीआर में बदलने, संस्थागत समन्वय, निवेश जुटाने, ज्ञान और क्षमता निर्माण तथा निगरानी और मूल्यांकन पर केंद्रित होगा; दीर्घकालिक लक्ष्य सुविकल्प को एक मापनीय (स्केलेबल) राष्ट्रीय ज्ञान और निर्णय-समर्थन इकोसिस्टम के रूप में विकसित करना है।
ऊपर दी गई PIB की आधिकारिक विज्ञप्ति से AI की सहायता से तैयार, और AI की दूसरी जाँच में उसी विज्ञप्ति से मिलाया गया। किसी व्यक्ति ने इसका पंक्ति-दर-पंक्ति संपादन नहीं किया है।
पढ़ाई के लिए संदर्भ
6 अगस्त 2025 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में केंद्रीय कोयला और खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने बताया कि भारत में कोयला खदानों को बंद करने और उनका पुनः उपयोग अब 'कोयला और लिग्नाइट ब्लॉकों के लिए खनन योजना और खदान बंद करने की योजना तैयार करने हेतु दिशानिर्देश-2025' के अनुसार किया जाता है। ये दिशानिर्देश वैज्ञानिक और सामाजिक रूप से जिम्मेदार खदान बंदी पर बल देते हैं, जिसमें भूमि पुनर्ग्रहण, पर्यावरणीय पुनर्स्थापन और सामुदायिक एवं आर्थिक लाभ के लिए खनन के बाद उपयोग शामिल है; ये कृषि, मत्स्यपालन, इको-पार्क, जलाशयों के जीर्णोद्धार, हरित ऊर्जा परियोजनाओं और सांस्कृतिक या विरासत संवर्धन जैसी गतिविधियों को एकीकृत करने के लिए दिशा-निर्देश देते हैं और सार्वजनिक स्थलों के संचालन और रखरखाव में स्थानीय समुदायों की भागीदारी को प्रोत्साहित करते हैं। दिशानिर्देशों में अनिवार्य किया गया है कि खदान बंद करने के लिए जमा की गई पाँच-वर्षीय एस्क्रो राशि का कम से कम 25 प्रतिशत सामुदायिक विकास और आजीविका गतिविधियों के लिए उपयोग हो, और खदान बंद करने की अंतिम लागत का 10 प्रतिशत न्यायोचित परिवर्तन (जस्ट ट्रांसफॉर्मेशन) के लिए निर्धारित हो, जिसका उपयोग जिला प्रशासन और हितधारकों के परामर्श से किया जाएगा। उत्तर के अनुसार कोयला और लिग्नाइट सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने इको-पार्क, खदान पर्यटन स्थल, मनोरंजक पार्क, खदानों के खाली गड्ढों (माइन वॉयड) में मत्स्य पालन और सौर ऊर्जा परियोजनाओं जैसी पुनः उपयोग पहल की हैं; उदाहरणों में वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड का साओनेर इको पार्क, सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड की केरकेट्टा खदान में कायाकल्प वाटिका और मत्स्य पालन, तथा भारत कोकिंग कोल लिमिटेड का पारसनाथ उद्यान शामिल हैं; विदेश में जर्मनी, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में कुछ बंद कोयला खदानों का पर्यटन स्थलों, सांस्कृतिक केंद्रों, जलाशयों या औद्योगिक उद्देश्यों के लिए पुनः उपयोग किया गया है।
संदर्भ: PIB (कोयला मंत्रालय), 'बंद कोयला खदानों का पर्यटन स्थलों के रूप में विकास', 6 अगस्त 2025
खुद जाँचें: उत्तर में बताए गए 2025 के दिशानिर्देशों के तहत खदान बंद करने के लिए जमा पाँच-वर्षीय एस्क्रो राशि का कितना हिस्सा सामुदायिक विकास और आजीविका गतिविधियों पर खर्च होना चाहिए, और खदान बंद करने की अंतिम लागत का कितना हिस्सा न्यायोचित परिवर्तन के लिए निर्धारित है?
कम से कम 25 प्रतिशत; 10 प्रतिशत।
अभ्यास: इस रिलीज़ से सुविकल्प किसने विकसित किया, यह किन दिशानिर्देशों के अनुरूप है, यह किन कारकों को एक साथ लाता है, विकल्पों की रैंकिंग किस पद्धति से करता है, मूल्यांकन के चरण, रिक्लेम और प्रिज्म क्या करते हैं, और अगले चरण की प्राथमिकताएं लिखें; नोट से 2025 के दिशानिर्देशों का नाम, वे किन बातों पर बल देते हैं, एस्क्रो राशि और बंदी लागत के निर्धारित हिस्से, और भारत तथा विदेश में पुनः उपयोग की गई खदानों के उदाहरण।
खुद को परखें
बंद और परित्यक्त खदानों के पुनर्प्रयोजन के लिए डिजिटल निर्णय-समर्थन मंच 'सुविकल्प' कोयला मंत्रालय के तहत किस संगठन ने विकसित किया है?
उत्तर देखें
उत्तर: कोयला नियंत्रक संगठन
कोयला मंत्रालय ने बताया कि 'सुविकल्प- खदान पुनर्प्रयोजन उपकरण' मंत्रालय के तहत कोयला नियंत्रक संगठन (सीसीओ) ने विकसित किया है, जो कोयला और लिग्नाइट खदान के लिए खनन योजना दिशानिर्देश, 2025 के अनुरूप एक डिजिटल निर्णय-समर्थन मंच है। यह टीओपीएसआईएस पर आधारित बहु-मानदंड निर्णय पद्धति से संभावित पुनर्प्रयोजन विकल्पों की रैंकिंग करता है, और इसमें 'रिक्लेम' सामुदायिक जुड़ाव ढांचा तथा 'प्रिज्म' कार्यान्वयन मॉडल शामिल हैं।