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DAILY · 2026-11-03

अंताल्या में होने वाले यूएनएफसीसीसी सीओपी31 में भारत समाधान-उन्मुख और न्यायसंगत जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाएगा: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव

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केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में मीडिया को जानकारी देते हुए तुर्किये के अंताल्या में 9 से 20 नवंबर 2026 तक होने वाले यूएनएफसीसीसी के सीओपी31 के लिए भारत की प्राथमिकताएं बताईं, और सीबीडी सीओपी17 तथा यूएनसीसीडी सीओपी17 में भारत की भागीदारी के प्रमुख परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत सीओपी31 में समाधान-उन्मुख दृष्टिकोण के साथ जाएगा और क्षमता निर्माण, ज्ञान साझा करने तथा भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप समाधानों को केंद्र में रखते हुए ग्लोबल साउथ के लिए व्यावहारिक समाधान लाएगा, तथा जी-77 और चीन, एलएमडीसी और बेसिक (BASIC) के साथ मिलकर काम करेगा। मंत्री के अनुसार जलवायु वित्त एक प्रमुख प्राथमिकता होगी और भारत सीओपी31 में जलवायु वित्त कार्य कार्यक्रम (क्लाइमेट फाइनेंस वर्क प्रोग्राम) शुरू करने का निर्णय चाहेगा; उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 9.1 के तहत वित्त उपलब्ध कराना विकसित देशों का दायित्व है, और यह वित्त पूर्वानुमेय, मुख्यतः सार्वजनिक और रियायती होना चाहिए तथा इससे कर्ज का बोझ नहीं बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत इस पर भी जोर देगा कि शमन (मिटिगेशन) और वैश्विक स्टॉकटेक पक्षकार-संचालित, सहायक (फैसिलिटेटिव) और गैर-दंडात्मक रहें, एनडीसी की राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित प्रकृति का सम्मान हो और ऊपर से तय किए गए नए लक्ष्य न थोपे जाएं। मंत्री ने कहा कि अनुकूलन भारत की प्राथमिकता बना रहेगा, अनुकूलन पर वैश्विक लक्ष्य (ग्लोबल गोल ऑन एडेप्टेशन) के संकेतक स्वैच्छिक हों और वित्त तक पहुंच की शर्त न बनें, तथा अनुकूलन वित्त बढ़ाया जाए; भारत पक्षकार-संचालित व्यवस्था के माध्यम से न्यायसंगत परिवर्तन कार्य कार्यक्रम (जस्ट ट्रांजिशन वर्क प्रोग्राम) को जारी रखने का समर्थन करेगा; प्रौद्योगिकी हस्तांतरण विकसित देशों का दायित्व है और लागत, बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) तथा व्यापार से जुड़ी बाधाएं दूर की जानी चाहिए; और कार्बन बाज़ारों में भागीदारी स्वैच्छिक रहनी चाहिए। सीओपी31 में भारत की गतिविधियों में स्वीडन के साथ लीडआईटी 3.0 (LeadIT 3.0), तटीय लचीलेपन (कोस्टल रेजिलिएंस) पर उच्च-स्तरीय साइड इवेंट और आईबीसीए तथा वनों पर पैनल चर्चाएं शामिल होंगी, और मंत्री ने कहा कि भारत अंताल्या में रचनात्मक और सेतु-निर्माण (ब्रिज-बिल्डिंग) की भूमिका निभाएगा तथा ऐसा परिणाम चाहेगा जो प्रतिबद्धताओं से आगे बढ़कर कार्यान्वयन और सहायता की ओर ले जाए। उलानबटार (मंगोलिया) में हुए यूएनसीसीडी सीओपी17 के बारे में उन्होंने बताया कि एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय समूह का अध्यक्ष चुने जाने के बाद भारत ने 2030 तक 26 मिलियन हेक्टेयर से अधिक भूमि की बहाली की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और भारत के घास के मैदानों और अन्य खुले प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों पर अपनी पहली मार्गदर्शिका (Guide to Grasslands and Other Open Natural Ecosystems of India) जारी की; उनके अनुसार येरेवान (आर्मेनिया) में हुए सीबीडी सीओपी17 में भारत ने कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क (केएमजीबीएफ) के प्रभावी और न्यायसंगत कार्यान्वयन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

ऊपर दी गई PIB की आधिकारिक विज्ञप्ति से AI की सहायता से तैयार, और AI की दूसरी जाँच में उसी विज्ञप्ति से मिलाया गया। किसी व्यक्ति ने इसका पंक्ति-दर-पंक्ति संपादन नहीं किया है।

पढ़ाई के लिए संदर्भ

1 दिसंबर 2023 को सीओपी-28 में उद्योग परिवर्तन के लिए नेतृत्व समूह (लीडरशिप ग्रुप फॉर इंडस्ट्री ट्रांज़िशन - लीडआईटी) के एक कार्यक्रम में, जिसके सह-मेजबान स्वीडन के प्रधानमंत्री ऊल्फ़ क्रिस्टरसन (Ulf Kristersson) थे, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि 2019 में शुरू किया गया लीडआईटी उद्योग परिवर्तन को बल देने का साझा प्रयास है और सरकारों तथा उद्योग के बीच साझेदारी का एक सफल उदाहरण है। उन्होंने बताया कि अपने पहले चरण में लीडआईटी ने लौह एवं इस्पात, सीमेंट, एल्युमीनियम और परिवहन जैसे क्षेत्रों में ट्रांज़िशन रोडमैप और ज्ञान साझा करने पर ध्यान दिया, और 18 देश तथा 20 कंपनियां इस समूह की सदस्य थीं। उन्होंने लीडआईटी 2.0 के शुभारंभ की घोषणा की, जिसके तीन मुख्य फोकस हैं: समावेशी और न्यायसंगत उद्योग परिवर्तन; कम कार्बन प्रौद्योगिकी का सह-विकास और हस्तांतरण; और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में उद्योग परिवर्तन के लिए वित्तीय सहायता। इसके साथ भारत-स्वीडन इंडस्ट्री ट्रांज़िशन प्लेटफॉर्म भी शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य दोनों देशों की सरकारों, उद्योगों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, शोधकर्ताओं और थिंक-टैंकों को जोड़ना है। उन्होंने यह भी कहा कि कम कार्बन प्रौद्योगिकी और नवाचार को गति मिलनी चाहिए और ये ग्लोबल साउथ तक जल्द से जल्द और आसानी से पहुंचने चाहिए।

संदर्भ: प्रधानमंत्री कार्यालय (pmindia.gov.in), 'COP-28 में लीडरशिप ग्रुप फॉर इंडस्ट्री ट्रांज़िशन कार्यक्रम में प्रधान मंत्री का संबोधन', 1 दिसंबर 2023

खुद जाँचें: लीडआईटी कब शुरू हुआ था, सीओपी-28 में लीडआईटी कार्यक्रम की सह-मेजबानी भारत ने किस देश के प्रधानमंत्री के साथ की, और लीडआईटी 2.0 के तीन मुख्य फोकस क्या हैं?

2019 में; स्वीडन (प्रधानमंत्री ऊल्फ़ क्रिस्टरसन); समावेशी और न्यायसंगत उद्योग परिवर्तन, कम कार्बन प्रौद्योगिकी का सह-विकास और हस्तांतरण, तथा उभरती अर्थव्यवस्थाओं में उद्योग परिवर्तन के लिए वित्तीय सहायता।

अभ्यास: इस रिलीज़ से सीओपी31 का स्थान और तारीख़ें, भारत किन समूहों के साथ काम करेगा, जलवायु वित्त (और उल्लिखित अनुच्छेद), शमन और वैश्विक स्टॉकटेक, अनुकूलन, न्यायसंगत परिवर्तन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और कार्बन बाज़ारों पर भारत का रुख, सीओपी31 में उसकी नियोजित गतिविधियां, और यूएनसीसीडी सीओपी17 तथा सीबीडी सीओपी17 से जुड़ी बातें लिखें; नोट से लीडआईटी कब शुरू हुआ, पहले चरण के क्षेत्र और सदस्य संख्या, लीडआईटी 2.0 के तीन फोकस और साथ में शुरू हुआ प्लेटफॉर्म।

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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव के अनुसार यूएनएफसीसीसी का सीओपी31 9 से 20 नवंबर 2026 तक किस शहर में आयोजित होगा?

  1. अंताल्या
  2. येरेवान
  3. उलानबटार
  4. बेलेम
उत्तर देखें

उत्तर: अंताल्या

मंत्री ने बताया कि यूएनएफसीसीसी का सीओपी31 9 से 20 नवंबर 2026 तक तुर्किये के अंताल्या में आयोजित होगा। येरेवान (आर्मेनिया) और उलानबटार (मंगोलिया) क्रमशः सीबीडी सीओपी17 और यूएनसीसीडी सीओपी17 के आयोजन स्थल थे, जिनमें भारत की भागीदारी के परिणामों पर उन्होंने इसी ब्रीफिंग में प्रकाश डाला।

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