डीआरडीओ ने उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षणों के तहत ओडिशा तट के पास डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल 'प्रलय' का सफल उड़ान परीक्षण किया
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 5 नवंबर 2026 को ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल 'प्रलय' का सफल उड़ान परीक्षण किया। चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज द्वारा तैनात विभिन्न रेंज उपकरणों से प्राप्त परीक्षण आंकड़ों ने पुष्टि की कि परीक्षण के सभी उद्देश्य पूरी तरह हासिल हुए। इस मिसाइल का स्वदेशी विकास हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत ने डीआरडीओ की अन्य प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर किया है, और इस प्रणाली का उत्पादन विकास-सह-उत्पादन साझेदारों (डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर्स) में से एक, भारत डायनामिक्स लिमिटेड ने किया है। यह उड़ान परीक्षण उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षणों के तहत डीआरडीओ के वरिष्ठ अधिकारियों तथा उद्योग और रक्षा बलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया गया; मंत्रालय के अनुसार इस सफल परीक्षण के साथ प्रणाली को शामिल किए जाने (इंडक्शन) का समय निकट आ गया है। रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, रक्षा बलों और उद्योग साझेदारों की सराहना की और कहा कि उन्नत प्रौद्योगिकियों से लैस यह मिसाइल उभरते खतरों के विरुद्ध सेना की तकनीकी क्षमताओं और परिचालन तैयारी को और मजबूत करेगी।
ऊपर दी गई PIB की आधिकारिक विज्ञप्ति से AI की सहायता से तैयार, और AI की दूसरी जाँच में उसी विज्ञप्ति से मिलाया गया। किसी व्यक्ति ने इसका पंक्ति-दर-पंक्ति संपादन नहीं किया है।
पढ़ाई के लिए संदर्भ
22 दिसंबर 2021 को डीआरडीओ ने ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम द्वीप से स्वदेश में विकसित सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल 'प्रलय' का पहला उड़ान परीक्षण किया था। उस रिलीज़ के अनुसार मिशन ने अपने सभी उद्देश्य पूरे किए: नई मिसाइल ने वांछित अर्ध-बैलिस्टिक प्रक्षेप पथ का अनुसरण किया और उच्च सटीकता के साथ निर्धारित लक्ष्य तक पहुंची, जिससे नियंत्रण, मार्गदर्शन और मिशन एल्गोरिदम की पुष्टि हुई; पूर्वी तट पर प्रभाव बिंदु के पास तैनात सेंसरों, जिनमें डाउन-रेंज जहाज भी शामिल थे, ने इसके प्रक्षेप पथ पर नज़र रखी। रिलीज़ में बताया गया कि यह मिसाइल ठोस प्रणोदक रॉकेट मोटर और कई नई प्रौद्योगिकियों से संचालित है, इसकी मारक क्षमता 150-500 किलोमीटर है और इसे मोबाइल लॉन्चर से छोड़ा जा सकता है; इसकी मार्गदर्शन प्रणाली में अत्याधुनिक नेविगेशन प्रणाली और एकीकृत एवियोनिक्स शामिल हैं। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के तत्कालीन सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. जी. सतीश रेड्डी ने इसे आधुनिक प्रौद्योगिकियों से लैस नई पीढ़ी की सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल बताया था और कहा था कि इस हथियार प्रणाली को शामिल करने से सशस्त्र बलों को आवश्यक गति मिलेगी।
खुद जाँचें: 22 दिसंबर 2021 को 'प्रलय' के पहले उड़ान परीक्षण की रिलीज़ के अनुसार इस मिसाइल की मारक क्षमता कितनी है, और यह किससे संचालित है?
150-500 किलोमीटर की मारक क्षमता; ठोस प्रणोदक रॉकेट मोटर (और कई नई प्रौद्योगिकियां)।
अभ्यास: इस रिलीज़ से उड़ान परीक्षण की तारीख़ और स्थान, उद्देश्यों के पूरा होने की पुष्टि किसने की, मिसाइल विकसित करने वाली प्रयोगशाला, प्रणाली का उत्पादन करने वाली कंपनी, परीक्षणों का प्रकार और इंडक्शन के बारे में मंत्रालय का कथन लिखें; नोट से पहले परीक्षण की तारीख़, प्रक्षेप पथ, प्रणोदन, मारक क्षमता और लॉन्चर। याद रखें कि 2026 की रिलीज़ में मारक क्षमता नहीं दी गई है: यह 2021 की रिलीज़ से है।
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डीआरडीओ ने 5 नवंबर 2026 को अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल 'प्रलय' का सफल उड़ान परीक्षण कहाँ से किया?
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उत्तर: ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप
डीआरडीओ ने 5 नवंबर 2026 को उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षणों के तहत ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से 'प्रलय' का उड़ान परीक्षण किया; चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज द्वारा तैनात रेंज उपकरणों से प्राप्त आंकड़ों ने पुष्टि की कि परीक्षण के सभी उद्देश्य पूरी तरह हासिल हुए। इस मिसाइल का स्वदेशी विकास हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत ने डीआरडीओ की अन्य प्रयोगशालाओं के साथ किया है और इसका उत्पादन भारत डायनामिक्स लिमिटेड ने किया है।