डॉ. जितेंद्र सिंह ने हैदराबाद में सक्रिय अंतरिक्ष मलबा हटाने के लिए कॉसमोसर्व स्पेस की बेस-1 सुविधा का उद्घाटन किया, 2030 तक मलबा-मुक्त अंतरिक्ष का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 5 नवंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन से वर्चुअल माध्यम से हैदराबाद में सक्रिय अंतरिक्ष मलबा हटाने और कक्षा में ही अंतरिक्ष सेवाएं (इन-ऑर्बिट सर्विसिंग) प्रदान करने के लिए कॉसमोसर्व स्पेस की बेस-1 सुविधा का उद्घाटन करते हुए 2030 तक अंतरिक्ष को मलबा-मुक्त बनाने का दृष्टिकोण (विज़न) प्रस्तुत किया। मंत्री के अनुसार भारत अंतरिक्ष से मलबा हटाने के क्षेत्र में विश्व के शुरुआती अग्रणी देशों में उभर रहा है, और एक भारतीय स्टार्टअप बाह्य अंतरिक्ष को अधिक सुरक्षित और संधारणीय बनाने के लिए प्रौद्योगिकियां विकसित कर रहा है। उद्घाटन समारोह गाचीबावली स्थित वीएसडी टेक पार्क में आयोजित हुआ; बेस-1 सुविधा लगभग 14,800 वर्ग फुट में फैली है; यहां अंतरिक्ष रोबोट का डिज़ाइन और निर्माण, अंतरिक्ष जैसी परिस्थितियों में उनका परीक्षण और मिशन नियंत्रण के माध्यम से उनका संचालन किया जाता है, और इसमें कक्षीय रेंडेज़्वस एवं कैप्चर प्रयोगशालाएं, अंतरिक्ष रोबोटिक्स नवाचार प्रयोगशालाएं, सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण अनुकरण प्लेटफॉर्म और उपग्रह एकीकरण के लिए क्लीन रूम हैं। मंत्री ने कहा कि कंपनी के मिशन एम्ब्रेस (EMBRACE) ने कंपनी की स्थापना के एक वर्ष के भीतर जुलाई 2026 में अंतरिक्ष में सॉफ्ट रोबोटिक पंखुड़ियों का परीक्षण किया, और उपग्रह प्रणालियों के लिए पिक्सेल, प्रणोदन प्रणालियों के लिए ध्रुव एयरोस्पेस नीदरलैंड्स और प्रक्षेपण सेवाओं के लिए स्काईरूट एयरोस्पेस के साथ उसकी साझेदारियां पूर्ण (एंड-टू-एंड) सहयोग की उभरती संस्कृति को दर्शाती हैं। प्रधानमंत्री के अंतरिक्ष सुधारों और न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड तथा इन-स्पेस (IN-SPACe) की स्थापना को श्रेय देते हुए उन्होंने कहा कि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था बढ़कर लगभग 9 अरब डॉलर तक पहुंच गई है और आगामी दशक में इसके 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि अंतरिक्ष स्टार्टअप पारितंत्र एकल अंक से बढ़कर लगभग 450 उद्यमों तक पहुंच गया है। तेलंगाना के सूचना प्रौद्योगिकी एवं उद्योग मंत्री श्री डी. श्रीधर बाबू विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
ऊपर दी गई PIB की आधिकारिक विज्ञप्ति से AI की सहायता से तैयार, और AI की दूसरी जाँच में उसी विज्ञप्ति से मिलाया गया। किसी व्यक्ति ने इसका पंक्ति-दर-पंक्ति संपादन नहीं किया है।
पढ़ाई के लिए संदर्भ
16 अप्रैल 2024 को बेंगलूरु में आयोजित अंतर-एजेंसी अंतरिक्ष मलबा समन्वय समिति (आईएडीसी) की 42वीं वार्षिक बैठक के उद्घाटन सत्र में इसरो के तत्कालीन अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव श्री एस. सोमनाथ ने मलबा मुक्त अंतरिक्ष मिशन (डीएफएसएम) की भारत की मंशा की घोषणा की थी। इसरो के अनुसार इस पहल का उद्देश्य 2030 तक सभी भारतीय सरकारी और गैर-सरकारी अंतरिक्ष हितधारकों द्वारा मलबा मुक्त अंतरिक्ष मिशन हासिल करना है, और भारत अन्य अंतरिक्ष हितधारकों को भी इसका पालन करने के लिए प्रोत्साहित करता है। दिशानिर्देशों में उपग्रहों और प्रक्षेपण यानों के प्रचालन काल तथा मिशन के बाद के निपटान चरण में मलबा उत्पन्न होने से बचना; कक्षा में टक्कर और टूटन से बचना; ऐसे जानबूझकर किए गए विखंडन से बचना जिनसे लंबे समय तक बना रहने वाला मलबा पैदा हो; और 99% से अधिक सफलता की संभावना के साथ समाप्त हुए कक्षीय चरणों और उपग्रहों के मिशन-पश्चात निपटान (पीएमडी) का अनुपालन शामिल है, जिसमें प्रचालन काल के अंत में या तो नियंत्रित पुनः प्रवेश हो या 5 वर्ष से कम शेष कक्षीय आयु वाली निचली कक्षा में भेजा जाए। मिशनों को मानव अंतरिक्ष मिशनों के लिए 400 किमी +/- 30 किमी बैंड को कक्षीय बैंड मानना है। इसका कार्यान्वयन वर्ष 2025 के प्रारंभ में शुरू होना था, वार्षिक प्रगति का मूल्यांकन होना था, और सुरक्षित और संस्थिर अंतरिक्ष संचालन प्रबंधन के लिए इसरो प्रणाली (आईएस4ओएम / IS4OM) को नोडल बिंदु बनाया गया।
संदर्भ: इसरो, 'मलबा मुक्त अंतरिक्ष मिशनों पर भारत की मंशा - स्पष्टता', 19 अप्रैल 2024
खुद जाँचें: 16 अप्रैल 2024 को घोषित इसरो की मलबा मुक्त अंतरिक्ष मिशन (डीएफएसएम) पहल के तहत किस वर्ष तक सभी भारतीय अंतरिक्ष हितधारकों के मिशन मलबा मुक्त होने हैं, और इसके कार्यान्वयन में नोडल बिंदु कौन-सी इसरो प्रणाली है?
2030 तक; सुरक्षित और संस्थिर अंतरिक्ष संचालन प्रबंधन के लिए इसरो प्रणाली (आईएस4ओएम / IS4OM)।
अभ्यास: इस रिलीज़ से जो हुआ (बेस-1 का उद्घाटन, उसका आकार और प्रयोगशालाएं, मिशन एम्ब्रेस का अंतरिक्ष में परीक्षण) और जो दृष्टिकोण या अनुमान है (2030 तक मलबा-मुक्त अंतरिक्ष, आगामी दशक में अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था), उन्हें अलग-अलग लिखें; स्टार्टअप की संख्या और बताए गए तीनों साझेदार भी लिखें। नोट से डीएफएसएम की घोषणा की तारीख़, मंच और स्थान, लक्ष्य वर्ष, मिशन-पश्चात निपटान के नियम और नोडल प्रणाली लिखें। ध्यान दें कि रिलीज़ मंत्री के दृष्टिकोण को डीएफएसएम से नहीं जोड़ती।
खुद को परखें
5 नवंबर 2026 को हैदराबाद में सक्रिय अंतरिक्ष मलबा हटाने के लिए कॉसमोसर्व स्पेस की बेस-1 सुविधा का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने किस वर्ष तक अंतरिक्ष को मलबा-मुक्त बनाने का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया?
उत्तर देखें
उत्तर: 2030
डॉ. जितेंद्र सिंह ने 2030 तक अंतरिक्ष को मलबा-मुक्त बनाने का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया - यह एक दृष्टिकोण है, पूरा हो चुका कार्य नहीं। उस दिन जो हुआ, वह था बेस-1 का उद्घाटन - हैदराबाद में लगभग 14,800 वर्ग फुट में फैली सुविधा, जहां अंतरिक्ष रोबोट का डिज़ाइन, निर्माण, परीक्षण और संचालन होता है; कंपनी के मिशन एम्ब्रेस ने जुलाई 2026 में अंतरिक्ष में सॉफ्ट रोबोटिक पंखुड़ियों का परीक्षण किया था।