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वृद्धि और विकास: अवधारणा, विकास के सिद्धांत और बाल्यावस्था की अवस्थाएँ

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वृद्धि, विकास और परिपक्वता

वृद्धि (growth) का अर्थ है शरीर में मात्रात्मक परिवर्तन - लंबाई, भार और अंगों के आकार में बढ़ोतरी - जिसे मापा जा सकता है और जो शारीरिक परिपक्वता आने पर धीमी होकर रुक जाती है। विकास (development) इससे व्यापक है: यह शरीर, मन, भाषा, संवेगों और सामाजिक व्यवहार में होने वाले गुणात्मक और मात्रात्मक परिवर्तनों की क्रमबद्ध, प्रगतिशील शृंखला है जो गर्भाधान से वृद्धावस्था तक जीवनभर चलती रहती है। इसलिए वृद्धि विकास का एक अंग है; कोई बच्ची लंबी तो हो सकती है पर आवश्यक नहीं कि उसकी सोच भी उतनी ही परिपक्व हो। परिपक्वता (maturation) वंशानुक्रम द्वारा निर्धारित परिवर्तनों का स्वतः प्रकट होना है, जैसे बैठना, चलना या यौवनारंभ, जो किसी विशेष प्रशिक्षण के बिना होते हैं, जबकि अधिगम अनुभव और अभ्यास से होने वाला परिवर्तन है। विकास परिपक्वता और अधिगम दोनों का संयुक्त परिणाम है। इसके क्षेत्र - शारीरिक, गामक, संज्ञानात्मक, भाषाई, संवेगात्मक, सामाजिक और नैतिक - परस्पर संबंधित हैं: जिस बच्चे की श्रवण-क्षति का उपचार न हुआ हो, वह बोलने, पढ़ने और मित्रता, तीनों में पिछड़ सकता है।

निरंतरता, क्रम और दिशा

विकास सतत है: यह गर्भाधान से धीरे-धीरे चलता रहता है, और हर नई क्षमता अचानक कहीं से प्रकट होने के बजाय पहले की क्षमताओं पर टिकी होती है। यह एक निश्चित और पूर्वानुमेय क्रम में होता है: शिशु पहले कूजन करता है, फिर बलबलाता है, फिर एक-एक शब्द और उसके बाद वाक्य बोलता है; वह खड़े होने से पहले बैठती है और चलने से पहले खड़ी होती है। विकास सामान्य से विशिष्ट की ओर बढ़ता है: शिशु पहले पूरी बाँह और शरीर से किसी चीज़ की ओर लपकता है, और बहुत बाद में अँगूठे और तर्जनी से एक दाना उठा पाता है। यह संचयी और एकीकृत है, क्योंकि छोटे कौशल मिलकर बड़े कौशल बनाते हैं, जैसे अलग-अलग अक्षरों की आकृतियाँ मिलकर धाराप्रवाह लेखन बनती हैं। आरंभिक अनुभवों का प्रभाव स्थायी होता है, इसलिए जीवन के पहले वर्षों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

मस्तकाधोमुखी, समीपदूरस्थ और वैयक्तिक भिन्नता

दिशा के दो सिद्धांत हर वर्ष पूछे जाते हैं। मस्तकाधोमुखी (cephalocaudal) सिद्धांत कहता है कि विकास सिर से पैर की ओर होता है: शिशु धड़ से पहले सिर और गर्दन पर, और पैरों से पहले धड़ पर नियंत्रण पाता है। समीपदूरस्थ (proximodistal) सिद्धांत कहता है कि विकास शरीर के केंद्र से बाहर की ओर होता है: कंधों और बाँहों का नियंत्रण कलाइयों और उँगलियों के नियंत्रण से पहले आता है। इसीलिए छोटा बच्चा पहले मोटे क्रेयॉन को पूरी मुट्ठी से पकड़ता है, और इसीलिए पेंसिल का बारीक काम बहुत जल्दी नहीं थोपना चाहिए। वैयक्तिक भिन्नता का सिद्धांत कहता है कि सभी बच्चे एक ही क्रम से गुज़रते हैं, पर अलग-अलग गति से, इसलिए एक ही कक्षा के दो सात वर्षीय बच्चों के पठन में बड़ा अंतर हो सकता है। अंततः, विकास वंशानुक्रम और वातावरण की अंतःक्रिया का परिणाम है: वंशानुक्रम संभावनाओं की सीमा तय करता है, और वातावरण तय करता है कि उस सीमा का कितना भाग साकार होगा।

बाल्यावस्था की अवस्थाएँ

पुस्तकें बाल्यावस्था को व्यापक अवस्थाओं में बाँटती हैं, जिनकी आयु अनुमानित है और लेखकों के बीच थोड़ी-बहुत भिन्न होती है। गर्भकालीन अवस्था गर्भाधान से जन्म तक चलती है और यह सबसे तीव्र वृद्धि की अवधि है। शैशवावस्था जन्म से लगभग 2 वर्ष तक चलती है: प्रतिवर्त क्रियाओं का स्थान ऐच्छिक गतियाँ ले लेती हैं, देखभाल करने वालों से लगाव बनता है और पहले शब्द प्रकट होते हैं। प्रारंभिक बाल्यावस्था, लगभग 2 से 6 वर्ष, विद्यालय-पूर्व अवधि है जिसमें भाषा का तीव्र विकास, कल्पनाशील खेल और अनगिनत प्रश्न होते हैं; एलिज़ाबेथ हरलॉक ने इसे टोली-पूर्व आयु (pre-gang age), खिलौनों की आयु और प्रश्न पूछने की आयु कहा। उत्तर बाल्यावस्था, लगभग 6 से 12 वर्ष, प्राथमिक विद्यालय के वर्षों को समेटती है: मूर्त वस्तुओं के बारे में तार्किक चिंतन विकसित होता है और हमउम्र मित्रों की टोली का सदस्य होना बहुत महत्त्वपूर्ण हो जाता है, इसीलिए हरलॉक ने इसे टोली की आयु (gang age) कहा। किशोरावस्था, मोटे तौर पर 12 से 18 वर्ष, यौवनारंभ से शुरू होती है और तीव्र शारीरिक परिवर्तन, अमूर्त चिंतन तथा पहचान की खोज लाती है; जी. स्टेनली हॉल ने इसे तूफ़ान और तनाव (storm and stress) की अवस्था कहा। CTET पेपर I 6 से 11 वर्ष के बच्चों (कक्षा I से V) से और पेपर II 11 से 14 वर्ष के आयु-वर्ग (कक्षा VI से VIII) से संबंधित है।

विकास और अधिगम

विकास और अधिगम का संबंध CTET का प्रिय विषय है। पियाजे का मत था कि विकास अधिगम से पहले आता है: बच्चा कोई अवधारणा तभी सीख सकता है जब आवश्यक मानसिक संरचनाएँ बन चुकी हों, इसलिए शिक्षण को तत्परता की प्रतीक्षा करनी चाहिए। वाइगोत्स्की का मत इसके विपरीत था कि अच्छा अधिगम विकास से आगे चलता है और उसे आगे खींचता है, इसीलिए शिक्षण का लक्ष्य समीपस्थ विकास का क्षेत्र होना चाहिए। अर्नोल्ड गेसेल के सह-जुड़वाँ (co-twin) अध्ययनों ने परिपक्वता की भूमिका दिखाई: जिस जुड़वाँ को सीढ़ी चढ़ने का प्रशिक्षण बाद में, अधिक परिपक्व होने पर, दिया गया, उसने पहले प्रशिक्षित जुड़वाँ की बराबरी जल्दी कर ली। शिक्षक के लिए संतुलित दृष्टि यह है कि परिपक्वता तत्परता तय करती है, जबकि समृद्ध अनुभव, भाषा और अंतःक्रिया विकास को आगे ले जाते हैं, इसलिए अधिगम और विकास एक-दूसरे को सहारा देते हैं।

कक्षा में

इन सिद्धांतों को जानने वाली शिक्षिका कक्षा I के बच्चों को पेंसिल के बारीक काम से पहले मिट्टी, मोती, कागज़ फाड़ने और रंग भरने की गतिविधियाँ देती है, धीमे पढ़ने वाले बच्चे की तुलना सबसे तेज़ बच्चे से नहीं करती, एक ही लक्ष्य तक पहुँचने के कई रास्ते देती है और पूरे बच्चे पर ध्यान देती है - अंकों के साथ-साथ स्वास्थ्य, भावनाओं और मित्रताओं पर भी। CTET के एक विशिष्ट प्रश्न में, जो शिक्षिका देखती है कि कोई बच्ची किसी एक क्षेत्र में पिछड़ रही है, उसे बच्ची का ध्यान से अवलोकन करना चाहिए और उसकी अपनी गति से उसे सहारा देना चाहिए, न कि उस पर ठप्पा लगाना या उसे उसी कक्षा में रोकना चाहिए, क्योंकि विकास सतत, वैयक्तिक और वातावरण से प्रभावित होता है।

मुख्य तथ्य

  • वृद्धि मात्रात्मक (लंबाई, भार) और मापने योग्य है तथा परिपक्वता पर रुक जाती है; विकास गुणात्मक भी है और मात्रात्मक भी, जीवनपर्यंत चलता है और वृद्धि को समेटे हुए है।
  • परिपक्वता = वंशानुक्रम से बिना प्रशिक्षण के प्रकट होने वाले परिवर्तन (बैठना, चलना, यौवनारंभ); अधिगम = अनुभव और अभ्यास से परिवर्तन; विकास के लिए दोनों आवश्यक हैं।
  • मस्तकाधोमुखी (cephalocaudal) = सिर से पैर: शिशु बैठने या खड़े होने से पहले सिर सँभालता है। समीपदूरस्थ (proximodistal) = केंद्र से बाहर: बाँह का नियंत्रण उँगलियों से पहले आता है।
  • सामान्य से विशिष्ट: शिशु पहले पूरी बाँह और शरीर से लपकता है, बाद में अँगूठे और तर्जनी से छोटी वस्तु उठाता है।
  • क्रम एक, गति अलग: हर बच्चा बोलने से पहले बलबलाता है और चलने से पहले खड़ा होता है, पर अलग-अलग आयु में - यही वैयक्तिक भिन्नता का सिद्धांत है।
  • अवस्थाएँ (अनुमानित): गर्भकालीन (सबसे तीव्र वृद्धि), शैशवावस्था 0-2 वर्ष, प्रारंभिक बाल्यावस्था 2-6, उत्तर बाल्यावस्था 6-12, किशोरावस्था लगभग 12-18।
  • हरलॉक: प्रारंभिक बाल्यावस्था = टोली-पूर्व आयु, खिलौनों की आयु, प्रश्नों की आयु; उत्तर बाल्यावस्था = टोली की आयु (gang age)। जी. स्टेनली हॉल: किशोरावस्था = तूफ़ान और तनाव की अवस्था।
  • पियाजे: विकास अधिगम से पहले आता है (तत्परता की प्रतीक्षा करें)। वाइगोत्स्की: अधिगम विकास को आगे ले जाता है (समीपस्थ विकास के क्षेत्र में पढ़ाएँ)।
  • गेसेल का सह-जुड़वाँ अध्ययन: सीढ़ी चढ़ने का प्रशिक्षण बाद में पाने वाले जुड़वाँ ने पहले प्रशिक्षित जुड़वाँ की बराबरी जल्दी कर ली - परिपक्वता का प्रमाण।
  • CTET पेपर I का बाल विकास खंड 6-11 वर्ष के बच्चों (कक्षा I-V) पर और पेपर II 11-14 वर्ष के बच्चों (कक्षा VI-VIII) पर केंद्रित है।

एक नज़र में दोहराव

वृद्धि मात्रात्मक और रुक जाती है, विकास गुणात्मक और जीवनपर्यंत; विकास = परिपक्वता + अधिगम; सतत, क्रमिक, सामान्य से विशिष्ट, संचयी; मस्तकाधोमुखी सिर से पैर, समीपदूरस्थ केंद्र से बाहर; क्रम एक, गति अलग; वंशानुक्रम x वातावरण; शैशव 0-2, प्रारंभिक बाल्यावस्था 2-6, उत्तर बाल्यावस्था 6-12 (टोली की आयु), किशोरावस्था 12-18 (तूफ़ान और तनाव, स्टेनली हॉल); पियाजे: विकास अधिगम से पहले; वाइगोत्स्की: अधिगम विकास को आगे ले जाता है।

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