10 में से पाठ 2 · बाल विकास और शिक्षाशास्त्र
वंशानुक्रम, वातावरण और समाजीकरण: प्रकृति-पोषण विवाद और शिक्षक की भूमिका
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वंशानुक्रम
वंशानुक्रम (heredity) माता-पिता से संतान में जीनों के माध्यम से गुणों का संचरण है; जीन शरीर की कोशिकाओं के केंद्रक में स्थित गुणसूत्रों पर होते हैं। मनुष्य की कोशिका में सामान्यतः 46 गुणसूत्र 23 जोड़ों में होते हैं, प्रत्येक जोड़े का एक सदस्य माता से और एक पिता से आता है, और बच्चे की आनुवंशिक संरचना गर्भाधान के समय ही तय हो जाती है। वंशानुक्रम आँखों और त्वचा के रंग, रक्त समूह, शारीरिक बनावट, संभावित लंबाई की सीमा, परिपक्वता की गति और कुछ हद तक स्वभाव तथा सामान्य मानसिक योग्यता को प्रभावित करता है। ग्रेगर मेंडल ने उन्नीसवीं शताब्दी में मटर के पौधों पर प्रयोगों से वंशागति के मूल नियम दिए। फिर भी वंशानुक्रम सब कुछ तय नहीं करता: यह एक सीमा, एक संभावना निर्धारित करता है, जिसके भीतर वातावरण काम करता है।
वातावरण
वातावरण का अर्थ है वे सभी बाहरी प्रभाव जो गर्भाधान से ही व्यक्ति पर पड़ते हैं। गर्भकालीन वातावरण में माँ का पोषण, स्वास्थ्य और नशीले पदार्थों, शराब या संक्रमणों का प्रभाव शामिल है। जन्म के बाद भौतिक वातावरण (भोजन, जलवायु, आवास, स्वच्छता), सामाजिक वातावरण (परिवार, पड़ोस, विद्यालय, साथी, समुदाय) और सांस्कृतिक वातावरण (भाषा, रीति-रिवाज, मूल्य और विश्वास) आते हैं। गरीबी, कुपोषण और उद्दीपन की कमी बच्चे को उसकी क्षमता तक पहुँचने से रोक सकती है, जबकि पुस्तकें, बातचीत, खेल और स्नेही वयस्क उसे वहाँ तक पहुँचने में मदद करते हैं।
प्रकृति-पोषण विवाद
फ्रांसिस गाल्टन ने, जिन्होंने हेरेडिटरी जीनियस (1869) लिखी और 'प्रकृति और पोषण' (nature and nurture) पद को लोकप्रिय बनाया, तर्क दिया कि योग्यता मुख्यतः वंशानुगत होती है। उनसे बहुत पहले जॉन लॉक ने नवजात के मन को टेबुला रासा, अर्थात एक कोरी स्लेट कहा था जिस पर अनुभव लिखता है, और व्यवहारवादी जॉन बी. वाटसन ने दावा किया था कि यदि उन्हें दर्जन भर स्वस्थ शिशु दिए जाएँ तो वे उनमें से किसी को भी किसी भी प्रकार का विशेषज्ञ बना सकते हैं। जुड़वाँ अध्ययन इन दोनों प्रभावों को अलग करने में मदद करते हैं: समरूप (एकयुग्मनज) जुड़वाँ के सभी जीन समान होते हैं, इसलिए अलग-अलग पाले गए समरूप जुड़वाँ के बीच के अंतर वातावरण की ओर और उनकी समानताएँ वंशानुक्रम की ओर संकेत करती हैं। आज का स्वीकृत मत अंतःक्रियावादी है: विकास वंशानुक्रम और वातावरण का योग नहीं, गुणनफल है, और कोई भी अकेले काम नहीं करता। संगीत की संभावना लेकर जन्मा बच्चा संगीत से परिचय के बिना संगीतकार नहीं बनेगा, और कितना भी प्रशिक्षण वह संभावना पैदा नहीं कर सकता जो है ही नहीं। शिक्षक के लिए व्यावहारिक सीख यह है कि योग्यता जन्म से स्थिर नहीं होती, इसलिए किसी भी बच्चे को निरर्थक मानकर छोड़ नहीं देना चाहिए।
समाजीकरण और उसके अभिकरण
समाजीकरण वह आजीवन प्रक्रिया है जिसके द्वारा बच्चा अपने समाज की भाषा, मानदंड, मूल्य, भूमिकाएँ और व्यवहार सीखता है और उसका सक्रिय सदस्य बनता है। प्राथमिक समाजीकरण आरंभिक वर्षों में परिवार में होता है: वहीं बच्चा अपनी मातृभाषा सीखता है, लगाव बनाता है और सही-गलत, जेंडर भूमिकाओं तथा 'हम' कौन हैं, इसके पहले विचार ग्रहण करता है, इसीलिए परिवार को बच्चे की पहली पाठशाला कहा जाता है। इसके बाद द्वितीयक समाजीकरण विद्यालय, साथी समूह, पड़ोस, धार्मिक और सामुदायिक संस्थाओं तथा जनसंचार माध्यमों के द्वारा होता है। विद्यालय औपचारिक नियम, कम व्यक्तिगत संबंध, अन्य पृष्ठभूमियों के बच्चे और नियोजित पाठ्यचर्या लाता है, साथ ही एक गुप्त पाठ्यचर्या (hidden curriculum) भी - दिनचर्या के माध्यम से आज्ञापालन, प्रतिस्पर्धा या समानता के बारे में दिए जाने वाले अनकहे पाठ। साथी समूह बराबरी के संबंध देता है जिनमें बच्चे सहयोग, साझेदारी, झगड़े सुलझाना और अनुरूपता सीखते हैं; किशोरावस्था में साथियों का प्रभाव अक्सर माता-पिता के प्रभाव की बराबरी करता है। टेलीविज़न और इंटरनेट आदर्श और सूचना तो देते हैं, पर जेंडर, रूप-रंग और उपभोग के बारे में रूढ़ियाँ भी फैलाते हैं।
ब्रॉनफेनब्रेनर और पालन-पोषण की शैलियाँ
यूरी ब्रॉनफेनब्रेनर का पारिस्थितिक तंत्र सिद्धांत बच्चे को एक-दूसरे में समाए तंत्रों के केंद्र में रखता है: सूक्ष्म तंत्र (परिवार, कक्षा, मित्र) जिससे वह सीधे अंतःक्रिया करती है; मध्य तंत्र, अर्थात सूक्ष्म तंत्रों के बीच की कड़ियाँ, जैसे माता-पिता और शिक्षकों का संपर्क; बाह्य तंत्र, अर्थात वे परिवेश जो उसे अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं, जैसे माता या पिता का कार्यस्थल; संस्कृति, मूल्यों और कानूनों का वृहद् तंत्र; और कालानुक्रमिक तंत्र, अर्थात समय के साथ परिवर्तन। डायना बॉमरिंड ने आधिकारिक (authoritative) पालन-पोषण शैली (स्नेही पर दृढ़, कारण समझाने वाली), सत्तावादी (authoritarian) शैली (कठोर, आज्ञापालन की माँग करने वाली, स्नेह कम) और अनुमतिपूर्ण (permissive) शैली (स्नेही पर बहुत कम सीमाएँ) का वर्णन किया; चौथी, उपेक्षापूर्ण शैली बाद में एलेनोर मैकोबी और जॉन मार्टिन ने जोड़ी। आधिकारिक पालन-पोषण को सामान्यतः सबसे अच्छे परिणामों से जोड़ा जाता है, और स्नेह तथा स्पष्ट अपेक्षाओं का यही संतुलन एक अच्छी कक्षा भी बनाता है।
संस्कृति, अधिगम और शिक्षक
बच्चे अपने घरों और समुदायों में बना ज्ञान लेकर विद्यालय आते हैं - पैसों से गिनती, अपने परिचित पेड़-पौधे और जीव-जंतु, गीत, कहानियाँ और अक्सर दो या तीन भाषाएँ। NCF 2005 शिक्षकों से अपेक्षा करता है कि वे ज्ञान को विद्यालय के बाहर के जीवन से जोड़ें और इस घरेलू ज्ञान तथा बहुभाषिकता को कमी नहीं, संसाधन मानें। शिक्षक स्वयं समाजीकरण का अभिकरण और आदर्श है, और बच्चे उसकी निष्पक्षता, भाषा और दृष्टिकोण की नकल करते हैं। जब किसी जनजातीय समुदाय की बच्ची अपनी घरेलू भाषा के शब्दों का प्रयोग करे, या किसान परिवार का बच्चा फसलों के बारे में बहुत कुछ जानता हो, तो शिक्षक को वह ज्ञान पाठ में लाना चाहिए। उसे किसी जाति, धर्म, क्षेत्र, वर्ग या जेंडर के बारे में रूढ़िबद्ध धारणा से बचना चाहिए, ऐसी कक्षा बनानी चाहिए जिसमें हर बच्चा अपनापन महसूस करे, और माता-पिता से संपर्क बनाए रखना चाहिए ताकि घर और विद्यालय मिलकर काम करें। CTET के प्रश्न में सही उत्तर प्रायः बच्चे की पृष्ठभूमि को एक शक्ति और विद्यालय को विविधता का सम्मान करने वाला स्थान मानता है।
मुख्य तथ्य
- वंशानुक्रम: गुणसूत्रों पर स्थित जीनों द्वारा गुणों का संचरण; मनुष्य की कोशिका में 46 गुणसूत्र 23 जोड़ों में होते हैं; आनुवंशिक संरचना गर्भाधान पर तय होकर संभावना निर्धारित करती है।
- वातावरण: गर्भाधान से आगे का हर बाहरी प्रभाव - गर्भकालीन (माँ का स्वास्थ्य और पोषण), भौतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक; यह तय करता है कि संभावना कितनी साकार हो।
- गाल्टन (हेरेडिटरी जीनियस, 1869) ने वंशानुक्रम पर बल दिया; लॉक की टेबुला रासा और वाटसन के 'दर्जन भर स्वस्थ शिशु' वाले दावे ने वातावरण पर; आज का मत अंतःक्रिया का है।
- अलग-अलग पाले गए समरूप (एकयुग्मनज) जुड़वाँ का अध्ययन वंशानुक्रम और वातावरण को अलग करने के लिए किया जाता है: उनके बीच के अंतर वातावरण की ओर संकेत करते हैं।
- समाजीकरण का प्राथमिक अभिकरण: परिवार (बच्चे की पहली पाठशाला)। द्वितीयक अभिकरण: विद्यालय, साथी समूह, समुदाय, धार्मिक संस्थाएँ और जनसंचार माध्यम।
- गुप्त पाठ्यचर्या (hidden curriculum): वे अनकहे पाठ जो विद्यालय अपनी दिनचर्या और संबंधों से सिखाता है - आज्ञापालन, प्रतिस्पर्धा, जेंडर भूमिकाओं या समानता के बारे में।
- ब्रॉनफेनब्रेनर: सूक्ष्म तंत्र (परिवार, विद्यालय), मध्य तंत्र (उनके बीच की कड़ियाँ), बाह्य तंत्र (माता-पिता का कार्यस्थल), वृहद् तंत्र (संस्कृति), कालानुक्रमिक तंत्र (समय)।
- बॉमरिंड: आधिकारिक (स्नेही और दृढ़ - सर्वोत्तम परिणाम), सत्तावादी (कठोर, स्नेह कम), अनुमतिपूर्ण (स्नेही, सीमाएँ कम); उपेक्षापूर्ण शैली मैकोबी और मार्टिन ने जोड़ी।
- NCF 2005: ज्ञान को विद्यालय के बाहर के जीवन से जोड़ें; बच्चे की घरेलू भाषा और सामुदायिक ज्ञान संसाधन हैं, कमी नहीं।
एक नज़र में दोहराव
वंशानुक्रम = 46 गुणसूत्रों (23 जोड़े) पर जीन, गर्भाधान पर तय, संभावना निर्धारित करता है; वातावरण = गर्भकालीन, भौतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक; गाल्टन (1869) वंशानुक्रम, लॉक टेबुला रासा और वाटसन वातावरण; विकास = वंशानुक्रम x वातावरण; परिवार प्राथमिक अभिकरण, विद्यालय, साथी, मीडिया द्वितीयक; गुप्त पाठ्यचर्या; ब्रॉनफेनब्रेनर: सूक्ष्म, मध्य, बाह्य, वृहद्, कालानुक्रमिक तंत्र; बॉमरिंड: आधिकारिक शैली सर्वोत्तम; घरेलू ज्ञान और भाषाएँ संसाधन (NCF 2005)।