41 में से पाठ 6 · हिंदी व्याकरण

विशेषण और क्रियाविशेषण: भेद, विशेष्य, तुलना की अवस्थाएँ और पहचान

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विशेषण, विशेष्य और प्रविशेषण

संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता (गुण, दोष, संख्या, मात्रा) बताने वाले शब्द को विशेषण कहते हैं, और जिसकी विशेषता बताई जाए वह विशेष्य कहलाता है: ‘काली गाय’ में ‘काली’ विशेषण और ‘गाय’ विशेष्य है। विशेषण की भी विशेषता बताने वाला शब्द प्रविशेषण कहलाता है: ‘बहुत अच्छा लड़का’ में ‘बहुत’ प्रविशेषण है; अति, बड़ा, ज़रा, खूब भी ऐसे ही आते हैं। प्रयोग के आधार पर विशेषण दो तरह से आता है: विशेष्य से पहले आए तो उद्देश्य विशेषण (‘मेहनती छात्र सफल होता है’), और क्रिया के साथ विधेय में आए तो विधेय विशेषण (‘यह छात्र मेहनती है’)। आकारांत विशेषण विशेष्य के लिंग-वचन के अनुसार बदलते हैं (अच्छा लड़का, अच्छी लड़की, अच्छे लड़के), जबकि सुंदर, लाल, ईमानदार जैसे विशेषण नहीं बदलते।

विशेषण के चार भेद

गुणवाचक विशेषण गुण, दोष, रंग, आकार, दशा, स्वाद, स्थान या काल बताता है: अच्छा, बुरा, लाल, गोल, बीमार, मीठा, भारतीय, नया, पुराना। संख्यावाचक विशेषण गिनती बताता है; निश्चित संख्यावाचक के उपभेद हैं: गणनावाचक (एक, दस), क्रमवाचक (पहला, दूसरा), आवृत्तिवाचक (दुगुना, तिगुना), समुदायवाचक (दोनों, चारों), प्रत्येकबोधक (प्रत्येक, हर एक) और अपूर्णांकबोधक (आधा, पौना, सवा); अनिश्चित संख्यावाचक: कुछ लोग, कई छात्र, अनेक पुस्तकें, सब बच्चे। परिमाणवाचक विशेषण नाप-तौल बताता है: निश्चित (दो लीटर दूध, पाँच किलो चीनी, चार मीटर कपड़ा) और अनिश्चित (थोड़ा पानी, बहुत दूध, ज़रा-सा नमक)। सार्वनामिक विशेषण वह सर्वनाम है जो संज्ञा से पहले आकर विशेषण का काम करे: मौलिक (यह पुस्तक, वह लड़का, कोई आदमी, कौन व्यक्ति) और यौगिक, जो सर्वनाम से बनते हैं (ऐसा आदमी, वैसा घर, इतना पैसा, कितना दूध)।

एक शब्द, कई भेद

‘कुछ’ और ‘बहुत’ का भेद विशेष्य से तय होता है। ‘कुछ लोग आए’ में गिनी जाने वाली संज्ञा है, इसलिए अनिश्चित संख्यावाचक; ‘कुछ दूध दो’ में नापी जाने वाली, इसलिए अनिश्चित परिमाणवाचक; ‘दूध में कुछ गिर गया’ में अकेला ‘कुछ’ अनिश्चयवाचक सर्वनाम है। ‘बहुत लोग’ संख्यावाचक, ‘बहुत पानी’ परिमाणवाचक, ‘बहुत अच्छा’ प्रविशेषण और ‘वह बहुत बोलता है’ में क्रियाविशेषण है।

विशेषण की अवस्थाएँ

तुलना के आधार पर विशेषण की तीन अवस्थाएँ हैं। मूलावस्था में तुलना नहीं होती: ‘राम अच्छा है’। उत्तरावस्था में दो की तुलना होती है और संस्कृत ‘-तर’ लगता है: ‘राम श्याम से अच्छा है’, ‘यह मार्ग उससे सुगमतर है’। उत्तमावस्था में दो से अधिक में किसी एक को सर्वोपरि बताया जाता है और ‘-तम’ लगता है: ‘राम कक्षा में सबसे अच्छा है’। तत्सम रूप: उच्च-उच्चतर-उच्चतम, निम्न-निम्नतर-निम्नतम, लघु-लघुतर-लघुतम, गुरु-गुरुतर-गुरुतम, प्रिय-प्रियतर-प्रियतम, कोमल-कोमलतर-कोमलतम, अधिक-अधिकतर-अधिकतम। कुछ संस्कृत रूप ‘-इष्ठ’ प्रत्यय से बने हैं और स्वयं उत्तमावस्था के हैं: श्रेष्ठ, ज्येष्ठ, कनिष्ठ, गरिष्ठ, बलिष्ठ। तद्भव विशेषणों की तुलना ‘से’ और ‘सबसे’ लगाकर होती है: अच्छा, उससे अच्छा, सबसे अच्छा। इसलिए ‘सबसे सुंदरतम’, ‘सबसे श्रेष्ठतम’, ‘अधिक श्रेष्ठतर’ जैसे दोहरे रूप अशुद्ध हैं; शुद्ध हैं ‘सबसे सुंदर’ या ‘सुंदरतम’, और ‘सर्वश्रेष्ठ’।

विशेषण की रचना

संज्ञा से ‘-इक’ लगने पर पहले स्वर की वृद्धि होती है: समाज-सामाजिक, इतिहास-ऐतिहासिक, नीति-नैतिक, उद्योग-औद्योगिक, भूगोल-भौगोलिक, अर्थ-आर्थिक, मन-मानसिक, शरीर-शारीरिक, विज्ञान-वैज्ञानिक, दिन-दैनिक, वर्ष-वार्षिक। अन्य प्रत्यय: भारत-भारतीय, राष्ट्र-राष्ट्रीय, ग्राम-ग्रामीण, कुल-कुलीन, दया-दयालु, धन-धनवान, बुद्धि-बुद्धिमान, ज़हर-ज़हरीला, पत्थर-पथरीला, रंग-रंगीन, आदर-आदरणीय, पूजा-पूजनीय। क्रिया से: भूलना-भुलक्कड़, घूमना-घुमक्कड़, लड़ना-लड़ाकू, बिकना-बिकाऊ, टिकना-टिकाऊ। अव्यय से: ऊपर-ऊपरी, भीतर-भीतरी, बाहर-बाहरी, आगे-अगला, पीछे-पिछला। सर्वनाम से: यह-ऐसा, वह-वैसा, मैं-मेरा।

क्रियाविशेषण और उसके भेद

क्रिया की विशेषता बताने वाले अविकारी शब्द क्रियाविशेषण हैं; ये विशेषण और दूसरे क्रियाविशेषण की विशेषता भी बताते हैं: ‘वह बहुत धीरे चलता है’। अर्थ के आधार पर चार भेद हैं। कालवाचक (कब?): आज, कल, अभी, तुरंत, प्रतिदिन, सदा, बार-बार, कभी-कभी, लगातार। स्थानवाचक (कहाँ?): यहाँ, वहाँ, ऊपर, नीचे, अंदर, बाहर, दूर, पास, इधर, सामने। परिमाणवाचक (कितना?): बहुत, थोड़ा, अधिक, कम, खूब, बिलकुल, लगभग, काफ़ी: ‘वह बहुत बोलता है’। रीतिवाचक (कैसे?): धीरे-धीरे, जल्दी, ध्यानपूर्वक, अचानक, सचमुच, ठीक; निश्चय (अवश्य, निःसंदेह), अनिश्चय (शायद), स्वीकार (हाँ) और निषेध (नहीं, मत) बताने वाले शब्द भी इसी भेद में रखे जाते हैं, इसलिए यह सबसे बड़ा भेद है।

क्रियाविशेषण के अन्य आधार

प्रयोग के आधार पर साधारण क्रियाविशेषण स्वतंत्र रूप से आते हैं (‘जल्दी आओ’); संयोजक क्रियाविशेषण उपवाक्यों को जोड़ते हैं (‘जहाँ तुम जाओगे, वहाँ मैं भी जाऊँगा’, ‘जब वर्षा हुई, तब मोर नाचे’); और अनुबद्ध क्रियाविशेषण किसी शब्द के साथ जुड़कर बल देते हैं (‘मैंने उसे देखा तक नहीं’)। रूप के आधार पर गुरु तीन भेद बताते हैं: मूल, जो किसी दूसरे शब्द से नहीं बने (ठीक, दूर, अचानक, फिर); यौगिक, जो दूसरे शब्दों में प्रत्यय या शब्द जोड़कर बने (दिनभर, प्रेमपूर्वक, मन से, रात को); और स्थानीय, जिनमें दूसरे शब्द-भेद बिना रूप बदले किसी विशेष स्थान पर क्रियाविशेषण का काम करते हैं: ‘वह अपना सिर पढ़ेगा!’ (संज्ञा ‘सिर’; व्यंग्य में अर्थ है, कुछ नहीं पढ़ेगा) और ‘तुम दौड़कर चलते हो’ (पूर्वकालिक कृदंत ‘दौड़कर’); दोनों उदाहरण गुरु के ही हैं।

परीक्षा के जाल

विशेषण संज्ञा की विशेषता बताता है, क्रियाविशेषण क्रिया की: ‘तेज़ घोड़ा’ (विशेषण), ‘घोड़ा तेज़ दौड़ता है’ (क्रियाविशेषण)। क्रियाविशेषण और संबंधबोधक में भी भ्रम होता है: ‘बाहर जाओ’ में ‘बाहर’ क्रियाविशेषण है, पर ‘घर के बाहर’ में संबंधबोधक, क्योंकि वह संज्ञा के साथ ‘के’ लेकर आया है। ‘पहला’, ‘दूसरा’ क्रमवाचक और ‘दुगुना’ आवृत्तिवाचक हैं; ‘दोनों’ समुदायवाचक है।

मुख्य तथ्य

  • विशेषण के चार भेद: गुणवाचक (लाल, मीठा, भारतीय), संख्यावाचक (पाँच, पहला, दुगुना), परिमाणवाचक (दो लीटर दूध, थोड़ा पानी), सार्वनामिक (यह पुस्तक, ऐसा आदमी)।
  • निश्चित संख्यावाचक के उपभेद: गणनावाचक (दस), क्रमवाचक (पहला), आवृत्तिवाचक (तिगुना), समुदायवाचक (चारों), प्रत्येकबोधक (प्रत्येक), अपूर्णांक (सवा)।
  • ‘कुछ लोग’ अनिश्चित संख्यावाचक; ‘कुछ दूध’ अनिश्चित परिमाणवाचक; ‘कुछ गिर गया’ में ‘कुछ’ सर्वनाम।
  • ‘बहुत अच्छा लड़का’: लड़का विशेष्य, अच्छा विशेषण, बहुत प्रविशेषण; ‘छात्र मेहनती है’ में ‘मेहनती’ विधेय विशेषण।
  • तुलना की अवस्थाएँ: मूलावस्था (उच्च), उत्तरावस्था (उच्चतर), उत्तमावस्था (उच्चतम); लघु-लघुतर-लघुतम, प्रिय-प्रियतर-प्रियतम।
  • ‘सबसे श्रेष्ठतम’ और ‘सबसे सुंदरतम’ अशुद्ध; शुद्ध: ‘सर्वश्रेष्ठ’, ‘सबसे सुंदर’ या ‘सुंदरतम’।
  • ‘-इक’ से वृद्धि: समाज-सामाजिक, इतिहास-ऐतिहासिक, नीति-नैतिक, उद्योग-औद्योगिक, भूगोल-भौगोलिक, वर्ष-वार्षिक।
  • क्रियाविशेषण के चार भेद: कालवाचक (आज, अभी), स्थानवाचक (यहाँ, ऊपर), परिमाणवाचक (बहुत, थोड़ा), रीतिवाचक (धीरे, अचानक, अवश्य, नहीं)।
  • ‘बाहर जाओ’ (क्रियाविशेषण) बनाम ‘घर के बाहर’ (संबंधबोधक); ‘तेज़ घोड़ा’ (विशेषण) बनाम ‘तेज़ दौड़ता है’ (क्रियाविशेषण)।

एक नज़र में दोहराव

विशेषण संज्ञा-सर्वनाम की विशेषता, विशेष्य वह जिसकी विशेषता, प्रविशेषण विशेषण की विशेषता (बहुत); चार भेद: गुणवाचक, संख्यावाचक (निश्चित-अनिश्चित), परिमाणवाचक (निश्चित-अनिश्चित), सार्वनामिक (मौलिक-यौगिक); अवस्थाएँ: मूल, उत्तर (-तर), उत्तम (-तम); ‘सबसे श्रेष्ठतम’ अशुद्ध; ‘-इक’ से वृद्धि (सामाजिक); क्रियाविशेषण चार: काल, स्थान, परिमाण, रीति; ‘के’ के साथ आए तो संबंधबोधक।

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