6 में से पाठ 6 · समावेशी शिक्षा और विशेष आवश्यकता वाले बच्चे
समावेशी कक्षा-प्रथाएँ: UDL, विभेदित अनुदेशन, सहपाठी अधिगम, IEP और आकलन
AI की सहायता से तैयार किया गया और 28 अक्टूबर 2026 को तथ्यों की जाँच की गई; किसी मानव संपादक ने इसे अभी पंक्ति-दर-पंक्ति नहीं पढ़ा है। कोई गलती दिखे तो हमें बताइए। संपादकीय मानक और सुधार
अधिगम के लिए सार्वभौमिक अभिकल्प
सार्वभौमिक अभिकल्प (universal design) की शुरुआत वास्तुकला से हुई, जहाँ अमेरिकी वास्तुकार रोनाल्ड मेस ने तर्क दिया कि भवन आरंभ से ही सबके उपयोग योग्य होने चाहिए; व्हीलचेयर के लिए बनाया गया फुटपाथ का ढलान (kerb cut) बच्चागाड़ी और सूटकेस वालों की भी सहायता करता है। अधिगम के लिए सार्वभौमिक अभिकल्प (UDL), जिसे CAST (सेंटर फॉर एप्लाइड स्पेशल टेक्नोलॉजी, USA) ने डेविड रोज़ और ऐनी मेयर के नेतृत्व में विकसित किया, इसी को शिक्षण पर लागू करता है: किसी 'औसत' बच्चे के लिए योजना बनाकर बाद में शेष बच्चों के लिए बदलाव करने के स्थान पर शिक्षक हर पाठ में आरंभ से ही लचीलापन रखता है। UDL के तीन सिद्धांत हैं: सहभागिता के अनेक साधन (अधिगम का 'क्यों': विकल्प, प्रासंगिकता, सहयोग), प्रस्तुतीकरण के अनेक साधन (अधिगम का 'क्या': पाठ, चित्र, ऑडियो, मॉडल, प्रदर्शन) और क्रिया एवं अभिव्यक्ति के अनेक साधन (अधिगम का 'कैसे': लिखना, बोलना, चित्र बनाना, निर्माण करना, अभिनय)। जल-चक्र पर ऐसा पाठ जिसमें आरेख, उबलती केतली से प्रदर्शन, एक गीत और सीखे हुए को दिखाने के कई विकल्प हों, एक UDL पाठ है।
विभेदित अनुदेशन
कैरोल ऐन टॉमलिंसन विभेदन को शिक्षार्थी की आवश्यकताओं के प्रति शिक्षक की प्रतिक्रिया बताती हैं। शिक्षक हर बच्चे की तत्परता, रुचियों और अधिगम प्रोफ़ाइल के अनुसार विषय-वस्तु (क्या सीखा जाए), प्रक्रिया (कैसे सीखा जाए), उत्पाद (सीखा हुआ कैसे दिखाया जाए) और अधिगम परिवेश में भिन्नता लाता है। व्यावहारिक साधनों में एक ही अवधारणा पर चुनौती के तीन स्तरों वाले स्तरीकृत कार्य, अधिगम केंद्र (stations), विकल्प-पट (choice boards), कार्य के साथ बदलने वाले लचीले समूह और श्रेणीबद्ध कार्यपत्रक शामिल हैं। विभेदन का अर्थ हर बच्चे के लिए अलग पाठ या कुछ बच्चों के लिए निम्न लक्ष्य नहीं है; सभी बच्चे अलग-अलग रास्तों से एक ही मूल समझ की ओर बढ़ते हैं। यह वाइगोत्स्की के समीपस्थ विकास क्षेत्र (ZPD) से मेल खाता है: हर बच्चे को वह कार्य मिलता है जो उसकी अकेले की क्षमता से थोड़ा आगे हो, और पाड़ (scaffolding) दी जाती है जिसे दक्षता बढ़ने के साथ हटा लिया जाता है।
सहकारी और सहपाठी अधिगम
सहकारी अधिगम में मिश्रित योग्यता वाले छोटे समूह एक साझा लक्ष्य की ओर काम करते हैं। डेविड और रोजर जॉनसन ने इसके पाँच तत्व बताए: सकारात्मक परस्पर निर्भरता, व्यक्तिगत उत्तरदायित्व, आमने-सामने की प्रोत्साहक अंतःक्रिया, सामाजिक कौशल और समूह प्रक्रमण (group processing)। जिगसॉ तकनीक (इलियट एरॉन्सन, 1971) में हर सदस्य विषय का एक भाग सीखकर समूह को पढ़ाता है, इसलिए हर बच्चे के पास, दिव्यांग बच्चे के पास भी, वह टुकड़ा होता है जिसकी दूसरों को आवश्यकता है। सोचो-जोड़ी बनाओ-साझा करो (think-pair-share) संकोची बच्चों को बोलने से पहले सोचने का समय देता है। सहपाठी शिक्षण (peer tutoring) में अधिक सक्षम सहपाठी को सहायता चाहने वाले शिक्षार्थी के साथ जोड़ा जाता है; वाइगोत्स्की की शब्दावली में सिखाने वाला सहपाठी 'अधिक जानकार अन्य' (MKO) है, और दोनों बच्चों को लाभ होता है। साथी प्रणाली (buddy system) दृष्टि या शारीरिक दिव्यांगता वाले बच्चे को आने-जाने और नोट्स साझा करने में सहायता करती है। जब एक ही बच्चा सारा काम करता है तो समूह-कार्य विफल हो जाता है, इसलिए शिक्षक भूमिकाएँ बाँटता है और हर बच्चे के योगदान की जाँच करता है।
वैयक्तिक शिक्षा योजना
वैयक्तिक शिक्षा योजना या कार्यक्रम (IEP), जिसे सबसे पहले USA में 1975 के एजुकेशन फॉर ऑल हैंडीकैप्ड चिल्ड्रन एक्ट ने अनिवार्य किया, विशेष आवश्यकता वाले एक बच्चे के लिए लिखित योजना है। इसमें बच्चे के प्रदर्शन का वर्तमान स्तर, सामर्थ्य और आवश्यकताएँ; अल्पकालिक, मापने योग्य उद्देश्यों में बँटे वार्षिक लक्ष्य; उपयोग की जाने वाली शिक्षण विधियाँ, सामग्री और सहायक उपकरण; कक्षा और परीक्षाओं में समायोजन; कौन क्या करेगा (कक्षा-शिक्षक, विशेष शिक्षक, थेरेपिस्ट, अभिभावक); और प्रगति की समीक्षा कैसे और कब होगी, ये सब दर्ज होते हैं। इसे ऐसी टीम बनाती है जिसमें अभिभावक और जहाँ संभव हो, स्वयं बच्चा भी शामिल होता है, और इसे नियमित रूप से संशोधित किया जाता है। RPwD अधिनियम 2016 विद्यालयों से दिव्यांग बच्चों को व्यक्तिगत सहायता देने को कहता है, और भारतीय विद्यालयों में IEP प्रायः विशेष शिक्षक या संसाधन शिक्षक, कक्षा-शिक्षक और अभिभावकों के साथ मिलकर तैयार करता है।
शिक्षक की अभिवृत्ति
नीति-दस्तावेज़ बार-बार अभिवृत्तियों को समावेशन की सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बताते हैं। समावेशी शिक्षक मानता है कि हर बच्चा सीख सकता है, दिव्यांगता को बच्चे का केवल एक पहलू मानता है, पूरा बच्चा नहीं, व्यक्ति-प्रथम भाषा का प्रयोग करता है ('ऑटिज्म वाला बच्चा'), दया के स्थान पर समानुभूति दिखाता है, और अपेक्षाएँ ऊँची पर यथार्थवादी रखता है। वह भिन्नताओं पर खुलकर बात करके सहपाठियों को तैयार करता है, सम्मानजनक व्यवहार का आदर्श प्रस्तुत करता है, तुलना से बचता है और अति-संरक्षण नहीं करता। वह विशेष शिक्षक, अभिभावकों और समुदाय के साथ काम करता है, आवश्यकता होने पर प्रशिक्षण लेता है, और क्या सफल रहा इस पर चिंतन करता है। CTET के प्रश्न में सही विकल्प लगभग हमेशा वह होता है जिसमें शिक्षक बच्चे, अभिभावकों या बच्चे की पृष्ठभूमि को दोष देने के स्थान पर अपनी शिक्षण-पद्धति बदलता है।
आकलन में अनुकूलन
आकलन ऐसा हो कि हर बच्चा दिव्यांगता से रुके बिना दिखा सके कि उसने क्या सीखा है। समायोजन (accommodations) मानक वही रखते हुए यह बदलते हैं कि बच्चे का आकलन कैसे हो: अतिरिक्त समय, प्रलिपिक (scribe) या वाचक, ब्रेल या बड़े अक्षरों वाले प्रश्न-पत्र, मौखिक उत्तर, अलग शांत कक्ष, विश्राम के अंतराल, और सरल शब्दावली जो परखी जा रही अवधारणा को न बदले। RPwD अधिनियम 2016 विशेष रूप से अतिरिक्त समय, प्रलिपिक (scribe या amanuensis) और द्वितीय तथा तृतीय भाषा पाठ्यक्रमों से छूट का उल्लेख करता है। संशोधन (modifications), जो यह बदलते हैं कि क्या आँका जाए, केवल तभी अपनाए जाते हैं जब IEP में उनकी आवश्यकता हो। समावेशी कक्षाएँ सतत और व्यापक मूल्यांकन (RTE अधिनियम, धारा 29), रचनात्मक आकलन, पोर्टफोलियो, अवलोकन, परियोजनाओं और स्व-आकलन तथा सहपाठी-आकलन को प्राथमिकता देती हैं, और बच्चे की प्रगति की तुलना केवल सहपाठियों से नहीं बल्कि उसके अपने पिछले प्रदर्शन से करती हैं। NEP 2020 एक समग्र, 360-डिग्री प्रगति कार्ड की अनुशंसा करती है जो सभी क्षेत्रों में बच्चे के विकास को दर्शाए।
मुख्य तथ्य
- UDL (CAST; डेविड रोज़ और ऐनी मेयर): सहभागिता = अधिगम का 'क्यों', प्रस्तुतीकरण = 'क्या', क्रिया एवं अभिव्यक्ति = 'कैसे'।
- सार्वभौमिक अभिकल्प की शुरुआत वास्तुकला से हुई (रोनाल्ड मेस): व्हीलचेयर के लिए बना फुटपाथ का ढलान बाकी सबकी भी सहायता करता है।
- टॉमलिंसन का विभेदन: तत्परता, रुचि और अधिगम प्रोफ़ाइल के अनुसार विषय-वस्तु, प्रक्रिया, उत्पाद और अधिगम परिवेश में भिन्नता।
- विभेदन का अर्थ है एक ही मूल लक्ष्य तक अलग-अलग रास्ते - न निम्न लक्ष्य, न हर बच्चे के लिए अलग पाठ।
- जॉनसन और जॉनसन के सहकारी अधिगम के पाँच तत्व: सकारात्मक परस्पर निर्भरता, व्यक्तिगत उत्तरदायित्व, आमने-सामने की अंतःक्रिया, सामाजिक कौशल, समूह प्रक्रमण।
- जिगसॉ (इलियट एरॉन्सन, 1971): हर बच्चा विषय का एक भाग सीखकर समूह को पढ़ाता है।
- सहपाठी शिक्षण 'अधिक जानकार अन्य' (वाइगोत्स्की) का उपयोग करता है और सिखाने वाले तथा सीखने वाले दोनों को लाभ देता है।
- IEP: वर्तमान स्तर, मापने योग्य लक्ष्य, विधियाँ और साधन, समायोजन, ज़िम्मेदारियाँ और समीक्षा - अभिभावकों के साथ बनती है; सबसे पहले USA में 1975 में अनिवार्य हुई।
- समायोजन = बच्चे का आकलन कैसे हो, उसमें बदलाव (अतिरिक्त समय, प्रलिपिक, ब्रेल); संशोधन = क्या आँका जाए, उसमें बदलाव।
- समावेशी आकलन: CCE, पोर्टफोलियो, अवलोकन, स्व-आकलन, बच्चे के अपने पिछले कार्य से तुलना; NEP 2020: 360-डिग्री प्रगति कार्ड।
एक नज़र में दोहराव
UDL (CAST, रोज़ और मेयर): सहभागिता, प्रस्तुतीकरण, क्रिया एवं अभिव्यक्ति; सार्वभौमिक अभिकल्प वास्तुकला से (रोनाल्ड मेस); विभेदन (टॉमलिंसन): विषय-वस्तु, प्रक्रिया, उत्पाद, परिवेश - तत्परता, रुचि, प्रोफ़ाइल के अनुसार; ZPD और पाड़; सहकारी अधिगम (जॉनसन और जॉनसन, 5 तत्व); जिगसॉ (एरॉन्सन 1971); सहपाठी शिक्षण, सोचो-जोड़ी-साझा, साथी प्रणाली; IEP (USA 1975), टीम द्वारा, मापने योग्य लक्ष्य; व्यक्ति-प्रथम भाषा, ऊँची अपेक्षाएँ; समायोजन बनाम संशोधन; CCE, पोर्टफोलियो; NEP 2020 360-डिग्री प्रगति कार्ड।