6 में से पाठ 5 · समावेशी शिक्षा और विशेष आवश्यकता वाले बच्चे

प्रतिभाशाली, सृजनशील और वंचित शिक्षार्थी: बिना लेबल लगाए पहचान और सहायता

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प्रतिभाशाली कौन है

प्रतिभाशाली बच्चा एक या अधिक क्षेत्रों में अपने हमउम्र बच्चों से कहीं अधिक योग्यता दिखाता है। पुरानी परिभाषाएँ केवल IQ पर आधारित थीं, जैसे 1920 के दशक में आरंभ हुए उच्च IQ वाले बच्चों पर लुईस टरमन के दीर्घकालिक अध्ययन। आधुनिक दृष्टिकोण अधिक व्यापक हैं। रेंज़ुली का त्रि-वलय मॉडल प्रतिभा वहाँ देखता है जहाँ औसत से अधिक योग्यता, कार्य-प्रतिबद्धता और सृजनशीलता एक-दूसरे से मिलती हैं, और गार्डनर के बहु-बुद्धि सिद्धांत के अनुसार बच्चा केवल भाषा और तर्क में ही नहीं, बल्कि संगीत, शारीरिक गति, लोगों को समझने या प्रकृति के क्षेत्र में भी प्रतिभाशाली हो सकता है। शिक्षक को दिखने वाले लक्षणों में कम दोहराव से जल्दी सीखना, बड़ी शब्दावली, असामान्य प्रश्न, किसी एक विषय में गहरी रुचि, चुने हुए कार्यों पर लंबी एकाग्रता, संबंधों की तेज़ समझ और परिपक्व हास्य-बोध शामिल हैं। मेधावी (talented) शब्द प्रायः संगीत, खेल या कला जैसे किसी विशेष क्षेत्र में उच्च योग्यता के लिए प्रयुक्त होता है।

उनकी पहचान

कोई एक परीक्षण पर्याप्त नहीं है। शिक्षक कई स्रोतों का साथ-साथ उपयोग करते हैं: कक्षा और गतिविधियों में अवलोकन, उपलब्धि और अभिक्षमता परीक्षण, टॉरेंस सृजनात्मक चिंतन परीक्षण जैसे सृजनशीलता परीक्षण, कार्य के पोर्टफोलियो, और अभिभावकों, साथियों तथा स्वयं बच्चे द्वारा नामांकन। प्रतिभाशाली बच्चे तब आसानी से छूट जाते हैं जब वे ऊबकर व्यवधान डालते हैं, घुलने-मिलने के लिए अपनी योग्यता छिपाते हैं, ऐसी भाषा में पढ़ते हैं जो उनकी अपनी नहीं है, या उनमें कोई दिव्यांगता भी होती है (द्वि-असाधारण बच्चे)। बालिकाएँ और गरीब परिवारों के बच्चे प्रायः अनदेखे रह जाते हैं, क्योंकि बड़े उनसे कम अपेक्षा रखते हैं।

संवर्धन और त्वरण

संवर्धन (enrichment) उसी कक्षा-स्तर पर अधिगम को व्यापक और गहन बनाता है: मुक्त-अंत परियोजनाएँ, स्वतंत्र शोध, ब्लूम की संशोधित वर्गिकी के विश्लेषण, मूल्यांकन और सृजन स्तरों के प्रश्न, क्लब, ओलंपियाड, मार्गदर्शक (mentor) और अधिगम कोने। रेंज़ुली का संवर्धन त्रय मॉडल तीन प्रकार बताता है: सामान्य अन्वेषणात्मक गतिविधियाँ, चिंतन और शोध कौशलों का समूह-प्रशिक्षण, और वास्तविक समस्याओं की व्यक्तिगत या छोटे समूह में खोजबीन। त्वरण (acceleration) बच्चे को तेज़ी से आगे बढ़ाता है: जल्दी प्रवेश, कक्षा लाँघना, विषय-त्वरण (जैसे केवल गणित में ऊँची कक्षा का अध्ययन) और पाठ्यचर्या संक्षेपण (curriculum compacting), जिसमें पहले से सीखी सामग्री छोड़ दी जाती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 के अंतर्गत मुख्यतः ग्रामीण प्रतिभाशाली बच्चों के लिए स्थापित जवाहर नवोदय विद्यालय एक अन्य प्रावधान हैं। NEP 2020 शिक्षकों से संवर्धन सामग्री, विषय-केंद्रित क्लबों और ओलंपियाड के माध्यम से ऐसी प्रतिभा को पहचानने और पोषित करने को कहती है। जल्दी कार्य पूरा करने के पुरस्कार में प्रतिभाशाली बच्चे को वैसा ही और काम दे देना एक आम भूल है।

सृजनशील बच्चे

सृजनशीलता ऐसे विचार उत्पन्न करने की क्षमता है जो नए भी हों और उपयोगी भी। गिलफोर्ड ने अभिसारी चिंतन (एक सही उत्तर खोजना) और अपसारी चिंतन (अनेक संभावित उत्तर देना) में अंतर किया, और टॉरेंस ने अपसारी चिंतन को प्रवाह (विचारों की संख्या), लचीलापन (विचारों के प्रकारों की विविधता), मौलिकता (असामान्य विचार) और विस्तार (ब्योरा) से मापा। ग्राहम वालास (1926) ने सृजनात्मक प्रक्रिया के चार चरण बताए: तैयारी, उद्भवन (incubation), प्रदीप्ति (illumination) और सत्यापन। सृजनशील बच्चा अनोखे प्रश्न पूछ सकता है, अप्रत्याशित उत्तर दे सकता है, रटने के काम को नापसंद कर सकता है और परंपरा से हटकर चलता लग सकता है। बुद्धि और सृजनशीलता संबंधित हैं पर एक नहीं: उच्च IQ वाला बच्चा अनिवार्यतः सृजनशील नहीं होता। शिक्षक मुक्त-अंत प्रश्न पूछकर ('एक ईंट का हम कितने तरीकों से उपयोग कर सकते हैं?'), बिना आलोचना के विचार-मंथन (brainstorming) कराकर, असामान्य उत्तरों को स्वीकार करके, समय और खेल का अवसर देकर, और कभी किसी विचार का उपहास न करके सृजनशीलता को बढ़ावा देता है।

वंचित और हाशिए पर रहने वाले शिक्षार्थी

बहुत से बच्चे ऐसी बाधाओं का सामना करते हैं जिनका योग्यता से कोई संबंध नहीं: गरीबी और भूख, बाल श्रम, मौसमी प्रवास, जाति और लिंग आधारित भेदभाव, दूरदराज़ क्षेत्रों में रहना, या घर की भाषा का विद्यालय की भाषा से भिन्न होना। प्रथम पीढ़ी के शिक्षार्थी अपने परिवार में विद्यालय जाने वाले पहले सदस्य होते हैं; उनके अभिभावक गृहकार्य में सहायता करने या विद्यालय की सूचनाएँ पढ़ने में असमर्थ हो सकते हैं। भाषाई अल्पसंख्यकों के बच्चे और जनजातीय बच्चे प्रायः ऐसी पाठ्यपुस्तकीय भाषा का सामना करते हैं जो वे नहीं बोलते, इसलिए वे धीमे लग सकते हैं जबकि वे केवल उस भाषा से अपरिचित होते हैं। अनुच्छेद 350क प्रत्येक राज्य से भाषाई अल्पसंख्यक वर्गों के बच्चों को प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की पर्याप्त सुविधाएँ देने की अपेक्षा करता है, NCF 2005 बहुभाषिकता को संसाधन मानता है, और NEP 2020 कहती है कि जहाँ संभव हो, कम से कम कक्षा 5 तक और अच्छा हो कि कक्षा 8 और उससे आगे तक, घर की भाषा शिक्षा का माध्यम हो। मध्याह्न भोजन (1995) और वंचित समूहों की बालिकाओं के लिए कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (2004) जैसी योजनाएँ इनमें से कुछ बाधाओं को दूर करती हैं।

बिना लेबल लगाए शिक्षक क्या करे

पाठों को बच्चे के अपने जीवन, काम और स्थानीय ज्ञान से जोड़ें (सब्ज़ी बेचने वाला बच्चा पहले से बहुत-सा मानसिक गणित करता है); कक्षा में घर की भाषा की अनुमति दें और उससे विद्यालय की भाषा तक सेतु बनाएँ; ऐसा गृहकार्य दें जिसके लिए अभिभावकों की सहायता या खरीदी गई सामग्री न चाहिए; विद्यालय में ही चुपचाप अतिरिक्त सहायता दें; और हर बच्चे से ऊँची अपेक्षाएँ रखें। 'पिछड़ा', 'कमजोर' या 'गरीब' जैसे लेबल, जाति, वर्ग या योग्यता के आधार पर बैठाने, और रूढ़िबद्ध धारणाओं पर आधारित टिप्पणियों से बचें, क्योंकि लेबल शिक्षक की अपेक्षाएँ और बच्चे का आत्मविश्वास घटाता है और स्व-पूर्ण भविष्यवाणी बन सकता है। मार्गदर्शक विचार है 'भिन्नता, कमी नहीं' (difference, not deficit): बच्चे की पृष्ठभूमि आगे बढ़ने का संसाधन है, सुधारी जाने वाली कमी नहीं। RTE अधिनियम की धारा 4 के अंतर्गत विद्यालय से बाहर के बच्चे को आयु-उपयुक्त कक्षा में प्रवेश दिया जाता है और बराबरी पर आने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।

मुख्य तथ्य

  • रेंज़ुली के तीन वलय: औसत से अधिक योग्यता + कार्य-प्रतिबद्धता + सृजनशीलता; गार्डनर: बच्चा किसी भी बहु-बुद्धि में प्रतिभाशाली हो सकता है।
  • प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान कई स्रोतों से करें: अवलोकन, उपलब्धि परीक्षण, सृजनशीलता परीक्षण, पोर्टफोलियो, और अभिभावक, साथी तथा स्व-नामांकन।
  • द्वि-असाधारण (twice-exceptional): प्रतिभाशाली होने के साथ दिव्यांगता भी; ऐसे बच्चे प्रायः अनदेखे रह जाते हैं।
  • संवर्धन = उसी कक्षा में व्यापक और गहन (परियोजनाएँ, क्लब, ओलंपियाड); त्वरण = तेज़ (जल्दी प्रवेश, कक्षा लाँघना, विषय-त्वरण, पाठ्यचर्या संक्षेपण)।
  • रेंज़ुली का संवर्धन त्रय: प्रकार I सामान्य अन्वेषणात्मक गतिविधियाँ, प्रकार II समूह-प्रशिक्षण गतिविधियाँ, प्रकार III वास्तविक समस्याओं की खोजबीन।
  • गिलफोर्ड: अभिसारी चिंतन (एक उत्तर) बनाम अपसारी चिंतन (अनेक उत्तर); टॉरेंस: प्रवाह, लचीलापन, मौलिकता, विस्तार।
  • वालास (1926), सृजनात्मक प्रक्रिया के चरण: तैयारी, उद्भवन, प्रदीप्ति, सत्यापन।
  • प्रथम पीढ़ी के शिक्षार्थी परिवार में विद्यालय जाने वाले पहले सदस्य होते हैं; ऐसा गृहकार्य दें जो अभिभावकों की सहायता पर निर्भर न हो।
  • अनुच्छेद 350क: भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा; NCF 2005: बहुभाषिकता एक संसाधन है।
  • भिन्नता, कमी नहीं: वंचित बच्चे की पृष्ठभूमि एक संसाधन है; लेबल अपेक्षाएँ घटाते हैं और स्व-पूर्ण भविष्यवाणी बन सकते हैं।

एक नज़र में दोहराव

प्रतिभाशाली: रेंज़ुली के तीन वलय (योग्यता, कार्य-प्रतिबद्धता, सृजनशीलता), गार्डनर बहु-बुद्धि, टरमन के IQ अध्ययन; कई स्रोतों से पहचान; द्वि-असाधारण; संवर्धन = व्यापक/गहन, त्वरण = तेज़, पाठ्यचर्या संक्षेपण; संवर्धन त्रय; JNV, NPE 1986; सृजनशीलता: गिलफोर्ड अपसारी चिंतन; टॉरेंस प्रवाह, लचीलापन, मौलिकता, विस्तार; वालास 1926 चार चरण; वंचित: प्रथम पीढ़ी, प्रवासी, भाषाई अल्पसंख्यक; अनुच्छेद 350क; NCF 2005 बहुभाषिकता; KGBV 2004; भिन्नता, कमी नहीं; कोई लेबल नहीं।

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