6 में से पाठ 2 · समावेशी शिक्षा और विशेष आवश्यकता वाले बच्चे

समावेशन के लिए कानून और नीति: RPwD अधिनियम 2016, RTE अधिनियम 2009, समग्र शिक्षा और NEP 2020

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1995 के अधिनियम से 2016 के अधिनियम तक

भारत का पहला व्यापक दिव्यांगता कानून, निःशक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995, 7 स्थितियों को मान्यता देता था: दृष्टिहीनता, अल्प दृष्टि, कुष्ठ रोग से मुक्त, श्रवण क्षति, चलन दिव्यांगता, मानसिक मंदता और मानसिक रुग्णता। इसने सरकारी पदों में 3 प्रतिशत और सरकारी तथा सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों की सीटों में 3 प्रतिशत आरक्षण दिया। भारत द्वारा 2007 में UNCRPD के अनुसमर्थन के बाद इसका स्थान दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act, संक्षेप में RPwD अधिनियम) ने लिया, जो 19 अप्रैल 2017 से लागू है और कल्याण के स्थान पर अधिकारों पर आधारित है।

21 दिव्यांगताएँ

2016 के अधिनियम की अनुसूची में 21 निर्दिष्ट दिव्यांगताएँ हैं: दृष्टिहीनता, अल्प दृष्टि, कुष्ठ रोग से मुक्त व्यक्ति, श्रवण बाधिता (बधिर और कम सुनने वाले), चलन दिव्यांगता, बौनापन, बौद्धिक दिव्यांगता, मानसिक रुग्णता, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार, प्रमस्तिष्क पक्षाघात (सेरेब्रल पाल्सी), मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, दीर्घकालिक तंत्रिका संबंधी स्थितियाँ, विशिष्ट अधिगम अक्षमताएँ, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, वाक् और भाषा दिव्यांगता, थैलेसीमिया, हीमोफीलिया, सिकल सेल रोग, बधिर-दृष्टिहीनता सहित बहु-दिव्यांगता, तेजाब हमला पीड़ित और पार्किंसन रोग। बेंचमार्क दिव्यांगता वाला व्यक्ति वह है जिसमें किसी निर्दिष्ट दिव्यांगता की मात्रा 40 प्रतिशत से कम न हो, जैसा कि प्रमाणन प्राधिकारी ने प्रमाणित किया हो।

विद्यालयों के बारे में अधिनियम क्या कहता है

अधिनियम समावेशी शिक्षा को ऐसी व्यवस्था के रूप में परिभाषित करता है जिसमें दिव्यांग और गैर-दिव्यांग विद्यार्थी साथ-साथ सीखते हैं तथा शिक्षण और अधिगम को विभिन्न प्रकार के दिव्यांग विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप उपयुक्त रूप से ढाला जाता है। धारा 16 सरकार द्वारा वित्तपोषित या मान्यता प्राप्त हर संस्थान से अपेक्षा करती है कि वह दिव्यांग बच्चों को बिना भेदभाव प्रवेश दे, भवनों को सुगम्य बनाए, युक्तियुक्त सुविधा (reasonable accommodation) और व्यक्तिगत सहायता दे, दृष्टिहीन, बधिर और बधिर-दृष्टिहीन बच्चों को सबसे उपयुक्त भाषाओं और संप्रेषण के तरीकों में पढ़ाए, विशिष्ट अधिगम अक्षमताओं की शीघ्र पहचान करे और हर बच्चे की सहभागिता और प्रगति पर निगरानी रखे। धारा 17 सरकारों से अपेक्षा करती है कि वे दिव्यांग बच्चों की पहचान के लिए हर पाँच वर्ष में विद्यालय जाने वाले बच्चों का सर्वेक्षण करें, शिक्षकों को सांकेतिक भाषा और ब्रेल में प्रशिक्षित करें, संसाधन केंद्र स्थापित करें, 18 वर्ष की आयु तक पुस्तकें और सहायक उपकरण निःशुल्क दें, और अतिरिक्त समय, प्रलिपिक (scribe) की सुविधा तथा द्वितीय और तृतीय भाषा से छूट देकर परीक्षाओं में बदलाव करें। धारा 31 बेंचमार्क दिव्यांगता वाले 6 से 18 वर्ष के हर बच्चे को अपनी पसंद के पड़ोस के विद्यालय या विशेष विद्यालय में निःशुल्क शिक्षा का अधिकार देती है।

याद रखने योग्य आरक्षण संख्याएँ

धारा 32 के अंतर्गत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त उच्च शिक्षा संस्थानों को बेंचमार्क दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए कम से कम 5 प्रतिशत सीटें आरक्षित करनी होंगी और प्रवेश की अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट देनी होगी। धारा 34 के अंतर्गत सरकारी प्रतिष्ठानों में पदों के हर समूह की कम से कम 4 प्रतिशत रिक्तियाँ आरक्षित हैं: 1-1 प्रतिशत दृष्टिहीनता और अल्प दृष्टि, बधिर और कम सुनने वाले, तथा चलन दिव्यांगता (प्रमस्तिष्क पक्षाघात, कुष्ठ रोग से मुक्त, बौनापन, तेजाब हमला पीड़ित और मस्कुलर डिस्ट्रॉफी सहित) के लिए, और 1 प्रतिशत ऑटिज्म, बौद्धिक दिव्यांगता, विशिष्ट अधिगम अक्षमता, मानसिक रुग्णता और बहु-दिव्यांगता के लिए।

RTE अधिनियम 2009 और दिव्यांग बच्चे

निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009, जो 1 अप्रैल 2010 से लागू है, 6 से 14 वर्ष के हर बच्चे को पड़ोस के विद्यालय में प्रारंभिक शिक्षा का अधिकार देता है। इसके 2012 के संशोधन ने दिव्यांग बच्चों को स्पष्ट रूप से 'वंचित समूह के बच्चे' की परिभाषा में रखा और बहु-दिव्यांगता या गंभीर दिव्यांगता वाले बच्चे को गृह-आधारित शिक्षा चुनने का विकल्प दिया। अन्य सुरक्षा उपाय: प्रवेश के समय कोई अनुवीक्षण प्रक्रिया (screening) या प्रति व्यक्ति शुल्क (capitation fee) नहीं (धारा 13); निजी गैर-सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्रवेश-स्तर की 25 प्रतिशत सीटें कमजोर वर्गों और वंचित समूहों के लिए (धारा 12(1)(c)); कोई शारीरिक दंड या मानसिक उत्पीड़न नहीं (धारा 17); विद्यालय से बाहर के बच्चों को आयु-उपयुक्त कक्षा में प्रवेश और विशेष प्रशिक्षण (धारा 4); और बाल-केंद्रित, गतिविधि-आधारित पाठ्यचर्या जो भय, आघात और चिंता से मुक्त हो, यथासंभव मातृभाषा में हो और जिसमें सतत और व्यापक मूल्यांकन हो (धारा 29)।

समग्र शिक्षा

2018-19 में आरंभ समग्र शिक्षा पूर्व-प्राथमिक से कक्षा 12 तक विद्यालयी शिक्षा की एकीकृत योजना है, जिसमें सर्व शिक्षा अभियान (2001), राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (2009) और शिक्षक शिक्षा को मिलाया गया। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए इसका समावेशी शिक्षा घटक पहचान और आकलन, सहायक यंत्र और उपकरण, ब्रेल और बड़े अक्षरों वाली पुस्तकें, विशेष शिक्षक, थेरेपी, परिवहन और अनुरक्षक (escort) सहायता, दिव्यांग बालिकाओं के लिए वृत्तिका (stipend), और गंभीर दिव्यांगता वाले बच्चों के लिए गृह-आधारित शिक्षा में सहायता करता है। यह पुरानी IEDC (1974) और IEDSS (2009-10, कक्षा 9 से 12) योजनाओं को आगे बढ़ाता है।

समता और समावेशन पर NEP 2020

NEP 2020 का अध्याय 6, 'समतामूलक और समावेशी शिक्षा - सभी के लिए अधिगम', सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूहों (SEDGs) को इन आधारों पर पहचानता है: लैंगिक पहचान (महिला और ट्रांसजेंडर), सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान (SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक), भौगोलिक पहचान (गाँव, छोटे कस्बे, आकांक्षी जिले), अधिगम अक्षमता सहित दिव्यांगता, और सामाजिक-आर्थिक स्थिति (प्रवासी समुदाय, निम्न आय वाले परिवार, अनाथ, असुरक्षित परिस्थितियों में रहने वाले बच्चे, शहरी गरीब)। यह सभी बालिकाओं और ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की देश की क्षमता बढ़ाने के लिए जेंडर-समावेशन कोष (Gender-Inclusion Fund) और अधिक SEDG आबादी वाले क्षेत्रों के लिए विशेष शिक्षा क्षेत्र (SEZ) प्रस्तावित करती है। दिव्यांग बच्चों के लिए यह RPwD अधिनियम के अनुसार बाधामुक्त पहुँच, क्रॉस-दिव्यांगता प्रशिक्षण वाले विशेष शिक्षक, संसाधन केंद्र, बेंचमार्क दिव्यांगता वाले बच्चों के लिए सामान्य या विशेष विद्यालय का विकल्प, विद्यालय न जा सकने वालों के लिए गृह-आधारित शिक्षा और पूरे देश में भारतीय सांकेतिक भाषा के मानकीकरण का वादा करती है।

मुख्य तथ्य

  • PWD अधिनियम 1995: 7 दिव्यांगताएँ, पदों में 3 प्रतिशत और सीटों में 3 प्रतिशत; RPwD अधिनियम 2016: 21 दिव्यांगताएँ, 19 अप्रैल 2017 से लागू।
  • बेंचमार्क दिव्यांगता: किसी निर्दिष्ट दिव्यांगता का कम से कम 40 प्रतिशत, प्रमाणन प्राधिकारी द्वारा प्रमाणित।
  • RPwD अधिनियम धारा 32: सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त उच्च शिक्षा संस्थानों में कम से कम 5 प्रतिशत सीटें, साथ में अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट।
  • RPwD अधिनियम धारा 34: सरकारी रिक्तियों में कम से कम 4 प्रतिशत - दृष्टि, श्रवण और चलन दिव्यांगता के लिए 1-1 प्रतिशत; ऑटिज्म, बौद्धिक दिव्यांगता, SLD, मानसिक रुग्णता और बहु-दिव्यांगता के लिए 1 प्रतिशत।
  • RPwD अधिनियम धारा 31: 6 से 18 वर्ष के बेंचमार्क दिव्यांगता वाले बच्चों को निःशुल्क शिक्षा; RTE अधिनियम 6 से 14 वर्ष के सभी बच्चों पर लागू होता है।
  • RPwD अधिनियम धारा 16: बिना भेदभाव प्रवेश, सुगम्य भवन, युक्तियुक्त सुविधा, व्यक्तिगत सहायता, विशिष्ट अधिगम अक्षमताओं की शीघ्र पहचान।
  • RPwD अधिनियम धारा 17: हर पाँच वर्ष में सर्वेक्षण, सांकेतिक भाषा और ब्रेल में प्रशिक्षित शिक्षक, 18 वर्ष तक निःशुल्क पुस्तकें और सहायक उपकरण, परीक्षा में अतिरिक्त समय, प्रलिपिक (scribe) और भाषा-छूट।
  • RTE (संशोधन) अधिनियम 2012: दिव्यांग बच्चे 'वंचित समूह' में शामिल; बहु या गंभीर दिव्यांगता वाले बच्चों के लिए गृह-आधारित शिक्षा का विकल्प।
  • समग्र शिक्षा (2018-19) ने SSA, RMSA और शिक्षक शिक्षा को मिलाया; पूर्व-प्राथमिक से कक्षा 12 तक; इसमें CWSN के लिए समावेशी शिक्षा घटक है।
  • NEP 2020 अध्याय 6: SEDGs, जेंडर-समावेशन कोष, विशेष शिक्षा क्षेत्र, सामान्य या विशेष विद्यालय का विकल्प, मानकीकृत भारतीय सांकेतिक भाषा।

एक नज़र में दोहराव

PWD अधिनियम 1995: 7 दिव्यांगताएँ, पदों और सीटों में 3%; RPwD अधिनियम 2016 (19 अप्रैल 2017 से लागू): 21 दिव्यांगताएँ, बेंचमार्क 40%; धारा 16 विद्यालयों के दायित्व; धारा 17 हर 5 वर्ष में सर्वेक्षण, 18 वर्ष तक निःशुल्क उपकरण, प्रलिपिक, अतिरिक्त समय; धारा 31 निःशुल्क शिक्षा 6-18; धारा 32: उच्च शिक्षा में 5% सीटें, आयु में 5 वर्ष छूट; धारा 34: पदों में 4%; RTE 2009 (6-14), 2012 संशोधन: गृह-आधारित शिक्षा; समग्र शिक्षा 2018-19 = SSA + RMSA + TE; NEP 2020 अध्याय 6: SEDGs, जेंडर-समावेशन कोष, SEZ, ISL।

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