10 में से पाठ 2 · भारतीय कला एवं संस्कृति

इंडो-इस्लामी और परवर्ती वास्तुकला: सल्तनत, मुगल, राजपूत और औपनिवेशिक इमारतें

AI की सहायता से तैयार किया गया और 28 अक्टूबर 2026 को तथ्यों की जाँच की गई; किसी मानव संपादक ने इसे अभी पंक्ति-दर-पंक्ति नहीं पढ़ा है। कोई गलती दिखे तो हमें बताइए। संपादकीय मानक और सुधार

नए शासक क्या लाए

पहले के भारतीय निर्माता खंभों पर आड़ी शहतीरें रखकर खुले स्थान ढकते थे, जिसे धरनीय (ट्रेबीट) पद्धति कहते हैं। 12वीं शताब्दी के अंत से तुर्क शासक चापाकार (आर्कुएट) पद्धति लाए: डाट-पत्थर (कीस्टोन) से टिका सच्चा मेहराब और कोनों की स्क्विंच के सहारे वर्गाकार कक्ष के ऊपर उठाया गया गुंबद, दोनों चूने के गारे से जुड़े। चूँकि इस्लाम जीवधारियों के चित्रण को हतोत्साहित करता है, इसलिए सजावट सुलेख, ज्यामितीय आकृतियों, अरबेस्क (बेल-बूटों) और पत्थर की जालियों से की गई। मीनारें भी इन्हीं के साथ आईं, और समय के साथ चारबाग (जल-नालियों से चार भागों में बँटा उद्यान), दोहरा गुंबद और मुगलों के अधीन पित्रा दुरा, अर्थात संगमरमर में रंगीन पत्थरों की जड़ाई, जुड़े।

दिल्ली सल्तनत

कुतुबुद्दीन ऐबक ने ध्वस्त मंदिरों के स्तंभों से दिल्ली में कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद और अजमेर में अढ़ाई दिन का झोंपड़ा बनवाया। उसने लगभग 1199 में कुतुब मीनार आरंभ की; इल्तुतमिश ने तीन मंज़िलें जोड़ीं, और बिजली गिरने से हुई क्षति के बाद फिरोज शाह तुगलक ने ऊपरी भाग फिर से बनवाकर पाँचवीं मंज़िल जोड़ी, जिससे लाल और हल्के पीले बलुआ पत्थर की, अभिलेखों की पट्टियों से सजी यह मीनार 72.5 मीटर ऊँची हो गई। इसी परिसर का लौह स्तंभ गुप्तकालीन कृति है, जिस पर जंग नहीं के बराबर लगती है। पहले सच्चे मेहराब का श्रेय बलबन के मकबरे (लगभग 1287) को और पहले सच्चे गुंबद का श्रेय अलाई दरवाजा (1311) को दिया जाता है, जिसे अलाउद्दीन खिलजी ने कुतुब परिसर में लाल बलुआ पत्थर, सफेद संगमरमर और घोड़े की नाल जैसे मेहराबों के साथ जोड़ा; अलाउद्दीन ने सीरी नगर और हौज-ए-अलाई जलाशय भी बनवाए। तुगलकों ने ढलवाँ दीवारों वाले विशाल, सादे किले बनवाए, जैसे गयासुद्दीन तुगलक का तुगलकाबाद, और फिरोज शाह अशोक के दो स्तंभ दिल्ली ले आया। सैयदों और लोदियों ने अष्टकोणीय मकबरे बनवाए, और दोहरा गुंबद लोदी काल में दिखाई देता है, जैसे सिकंदर लोदी के मकबरे में।

प्रांतीय शैलियाँ

सल्तनत के कमज़ोर पड़ने पर क्षेत्रीय राज्यों ने अपने ढंग से निर्माण किया। जौनपुर के शर्की शासकों ने अटाला मस्जिद बनवाई, जिसमें मीनारों के स्थान पर प्रवेश द्वार जैसा विशाल अग्रभाग है। बंगाल ने ईंट और टेराकोटा से निर्माण किया, जैसे पांडुआ की विशाल अदीना मस्जिद, और गाँव की झोपड़ियों की घुमावदार छत को अपनाया। गुजरात के सुल्तानों ने अहमदाबाद की जामा मस्जिद और 'जीवन-वृक्ष' जाली वाली सीदी सैयद मस्जिद जैसी मस्जिदों में हिंदू और जैन नक्काशी का मेल किया। मालवा के मांडू में जहाज महल, हिंडोला महल और होशंग शाह का संगमरमर का मकबरा है। दक्कन में बहमनियों ने गुलबर्गा और बीदर में निर्माण किया, आदिलशाहियों ने बीजापुर में गोल गुंबज बनवाया, जो मुहम्मद आदिल शाह का मकबरा है और जिसमें विश्व के सबसे बड़े गुंबदों में से एक तथा फुसफुसाहट दीर्घा (व्हिस्परिंग गैलरी) है, और कुतुबशाही शासक मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने 1591 में हैदराबाद में चारमीनार बनवाई।

मुगल वास्तुकला

बाबर ने आगरा में आराम बाग जैसे उद्यान लगवाए, और शेरशाह सूरी ने सासाराम (बिहार) में एक जलाशय के बीच अपना अष्टकोणीय मकबरा बनवाया। वास्तविक मुगल शैली दिल्ली में हुमायूँ के मकबरे से आरंभ होती है, जिसे उसकी विधवा बेगा बेगम ने बनवाया और जो फारसी वास्तुकार मीरक मिर्जा गियास के डिज़ाइन पर 1570 में पूरा हुआ: यह उपमहाद्वीप का पहला उद्यान-मकबरा है, जो चारबाग में स्थित है और फारसी दोहरे गुंबद के नीचे लाल बलुआ पत्थर तथा सफेद संगमरमर से बना है। अकबर ने आगरा किले और फतेहपुर सीकरी में लाल बलुआ पत्थर में फारसी और भारतीय रूपों को मिलाया; फतेहपुर सीकरी का बुलंद दरवाजा उसकी गुजरात विजय का स्मारक है और वहाँ के पंच महल तथा दीवान-ए-खास में भारतीय टोड़े (ब्रैकेट), शहतीरें और छतरियाँ हैं। नूरजहाँ ने आगरा में अपने पिता एतमाद-उद-दौला का मकबरा बनवाया, जो पित्रा दुरा युक्त पूरी तरह सफेद संगमरमर की पहली मुगल इमारत है। शाहजहाँ, जिसका शासनकाल संगमरमर का युग है, ने आगरा में यमुना तट पर मुमताज महल के लिए ताजमहल बनवाया, जिसके मुख्य वास्तुकार उस्ताद अहमद लाहौरी थे, और दिल्ली में अपने नए नगर शाहजहाँनाबाद में लाल किला (1639 में आरंभ) और जामा मस्जिद बनवाई। औरंगजेब के काल में निर्माण घटा; उसकी पत्नी दिलरस बानो बेगम की स्मृति में औरंगाबाद में बना बीबी का मकबरा 'दक्कन का ताज' कहलाता है।

राजपूत किले और महल

राजपूत शासकों ने पहाड़ी किले और महल बनवाए, जिनमें मुगल छतरियाँ (गुंबददार मंडप), झरोखे (बाहर निकले छज्जेदार गवाक्ष) और उद्यान अपनाए गए। चित्तौड़गढ़ में नौ मंज़िला विजय स्तंभ है, जिसे मेवाड़ के राणा कुंभा ने मालवा के सुल्तान पर विजय के बाद बनवाया, और इसके पास पुराना जैन कीर्ति स्तंभ है; राणा कुंभा ने कुंभलगढ़ भी बनवाया, जिसकी दीवारें लगभग 36 किलोमीटर लंबी हैं। अन्य प्रमुख स्थल हैं: जोधपुर का मेहरानगढ़ (राव जोधा), जैसलमेर का पीले बलुआ पत्थर का किला, जयपुर के पास आमेर, ग्वालियर किले का मान मंदिर महल (राजा मान सिंह तोमर), जयपुर का हवा महल (सवाई प्रताप सिंह, 1799) और सवाई जयसिंह द्वितीय की जंतर मंतर वेधशालाएँ, जो जयपुर, दिल्ली, उज्जैन, वाराणसी और मथुरा में हैं।

औपनिवेशिक इमारतें

पुर्तगालियों ने गोवा में बारोक शैली के चर्च बनवाए, जैसे बॉम जीसस बेसिलिका, जिसमें संत फ्रांसिस जेवियर के अवशेष रखे हैं। अंग्रेज़ों ने गोथिक रिवाइवल और इंडो-सारसेनिक शैलियाँ अपनाईं: मुंबई का छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (पहले विक्टोरिया टर्मिनस), जिसे एफ. डब्ल्यू. स्टीवंस ने बनाया; जॉर्ज विटेट का गेटवे ऑफ इंडिया; और कोलकाता का सफेद मकराना संगमरमर से बना विक्टोरिया मेमोरियल, जिसके वास्तुकार विलियम एमर्सन थे। नई दिल्ली की योजना एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर ने बनाई; राष्ट्रपति भवन और इंडिया गेट लुटियंस के हैं, और वृत्ताकार संसद भवन 1927 में खुला।

मुख्य तथ्य

  • धरनीय (शहतीर और स्तंभ) पुरानी भारतीय पद्धति थी; तुर्क सच्चे मेहराब और गुंबद वाली चापाकार पद्धति लाए, जो चूने के गारे से जुड़ती थी।
  • कुतुब मीनार: ऐबक ने लगभग 1199 में आरंभ की, इल्तुतमिश ने तीन मंज़िलें जोड़ीं, फिरोज शाह तुगलक ने ऊपरी भाग फिर से बनवाकर पाँचवीं मंज़िल जोड़ी; पास में कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद है।
  • पहला सच्चा मेहराब: बलबन का मकबरा (लगभग 1287); पहला सच्चा गुंबद: अलाउद्दीन खिलजी का अलाई दरवाजा (1311); दोहरा गुंबद लोदी काल के मकबरों में, जैसे सिकंदर लोदी का।
  • दक्कन के स्मारक: गोल गुंबज, बीजापुर (मुहम्मद आदिल शाह का मकबरा, फुसफुसाहट दीर्घा); चारमीनार, हैदराबाद (मुहम्मद कुली कुतुब शाह, 1591)।
  • हुमायूँ का मकबरा: बेगा बेगम ने बनवाया, मीरक मिर्जा गियास ने डिज़ाइन किया, 1570 में पूरा; चारबाग में पहला उद्यान-मकबरा, ताज का आदर्श।
  • एतमाद-उद-दौला का मकबरा, आगरा: नूरजहाँ ने अपने पिता के लिए बनवाया; पित्रा दुरा युक्त पूरी तरह सफेद संगमरमर की पहली मुगल इमारत।
  • शाहजहाँ: ताजमहल (उस्ताद अहमद लाहौरी, मुमताज महल के लिए), शाहजहाँनाबाद में 1639 में आरंभ लाल किला और जामा मस्जिद; औरंगाबाद का बीबी का मकबरा 'दक्कन का ताज' है।
  • विजय स्तंभ, चित्तौड़गढ़: नौ मंज़िला, मालवा के सुल्तान को हराने के बाद राणा कुंभा ने बनवाया; कुंभलगढ़ की दीवारें लगभग 36 किमी लंबी हैं।
  • औपनिवेशिक जोड़ियाँ: CST मुंबई - एफ. डब्ल्यू. स्टीवंस; गेटवे ऑफ इंडिया - जॉर्ज विटेट; विक्टोरिया मेमोरियल - विलियम एमर्सन; राष्ट्रपति भवन और इंडिया गेट - एडविन लुटियंस।

एक नज़र में दोहराव

चापाकार (मेहराब, गुंबद, गारा) ने धरनीय पद्धति का स्थान लिया; कुतुब मीनार: ऐबक लगभग 1199, इल्तुतमिश, फिरोज तुगलक; बलबन का मकबरा पहला सच्चा मेहराब; अलाई दरवाजा 1311 पहला सच्चा गुंबद; अटाला मस्जिद (जौनपुर); गोल गुंबज (बीजापुर); चारमीनार 1591; हुमायूँ का मकबरा 1570 (बेगा बेगम, मीरक मिर्जा गियास); बुलंद दरवाजा (गुजरात विजय); एतमाद-उद-दौला पहली पूर्ण संगमरमर इमारत; ताज (उस्ताद अहमद लाहौरी); लाल किला 1639; विजय स्तंभ (राणा कुंभा); CST (स्टीवंस); विक्टोरिया मेमोरियल (एमर्सन)।

इस विषय का अभ्यास करें

भारतीय कला एवं संस्कृति के सभी 10 पाठ