8 में से पाठ 8 · भाषा शिक्षणशास्त्र (भाषा I और भाषा II)

भाषा में आकलन, पठन-लेखन की कठिनाइयाँ और उपचारात्मक शिक्षण

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भाषा का आकलन क्षमता के रूप में

भाषा-आकलन यह जाँचे कि बच्चे भाषा से क्या कर सकते हैं, यह नहीं कि उन्होंने कितना रटा है। पढ़ाए जा चुके पाठ पर आधारित प्रश्न प्रायः स्मृति जाँचते हैं; अपठित गद्यांश, मुक्त-उत्तरीय प्रश्न, और संदेश लिखने या चित्र का वर्णन करने जैसे कार्य वास्तविक क्षमता जाँचते हैं। आकलन चारों कौशलों का होना चाहिए और सतत होना चाहिए, क्योंकि एक लिखित परीक्षा सुनने और बोलने की क्षमता नहीं दिखा सकती। आकलन का उद्देश्य अधिगम सुधारना है: अधिगम के लिए आकलन (रचनात्मक), अधिगम के रूप में आकलन (स्व-आकलन और चिंतन) और अधिगम का आकलन (योगात्मक)।

चारों कौशलों का आकलन

सुनने का आकलन निर्देशों के पालन, पढ़कर सुनाई गई कहानी पर प्रश्नों के उत्तर, सुनो और चित्र बनाओ जैसे कार्यों और श्रुतलेख से होता है। बोलने का आकलन दिखाओ और बताओ, भूमिका निर्वाह, चर्चा और कहानी सुनाने के दौरान बच्चों के अवलोकन से होता है, जिसमें प्रवाह, उच्चारण, शब्दावली, विषय-वस्तु और आत्मविश्वास के लिए जाँच-सूची या रूब्रिक प्रयुक्त होते हैं। पढ़ने का आकलन प्रवाह के लिए सस्वर पठन, रनिंग रिकॉर्ड (मैरी क्ले) अर्थात् पढ़ते समय बच्चे द्वारा की गई त्रुटियों का अभिलेख, पुनर्कथन, शाब्दिक, अनुमानात्मक और मूल्यांकनात्मक स्तर के बोध-प्रश्न, और क्लोज़ परीक्षण से होता है, जिसमें किसी अनुच्छेद से नियमित अंतराल पर शब्द हटा दिए जाते हैं (विल्सन टेलर, 1953)। लेखन का आकलन प्रारूपों और अंतिम रचनाओं के पोर्टफ़ोलियो से, विषय-वस्तु, संगठन, शब्दावली और यांत्रिक पक्ष के रूब्रिक की सहायता से होता है। अन्य उपकरण हैं उपाख्यानात्मक अभिलेख, निर्धारण मापनी, स्व-आकलन और साथी आकलन।

भाषा में CCE

निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम 2009 की धारा 29(2)(ज) बच्चे के ज्ञान की समझ और उसे लागू करने की क्षमता के सतत और व्यापक मूल्यांकन (CCE) की अपेक्षा करती है। सतत का अर्थ है कि आकलन केवल सत्र के अंत में नहीं, दैनिक शिक्षण का हिस्सा हो; व्यापक का अर्थ है कि यह केवल लिखित उत्तरों को नहीं, बल्कि मौखिक कौशल, पढ़ने की आदतों और अभिवृत्तियों सहित अधिगम के सभी पक्षों को समेटे। अधिगम के दौरान रचनात्मक (formative) आकलन उसे सुधारने के लिए प्रतिपुष्टि देता है; योगात्मक (summative) आकलन अंत में उपलब्धि का निर्णय करता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 रटने पर आधारित योगात्मक परीक्षाओं से हटकर नियमित, रचनात्मक, दक्षता-आधारित आकलन की ओर बढ़ने और स्व-आकलन तथा साथी आकलन सहित समग्र, 360 डिग्री प्रगति-पत्र की बात करती है।

त्रुटियाँ और भूलें

एस. पिट कॉर्डर (1967) ने तर्क दिया कि शिक्षार्थियों की त्रुटियाँ महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि वे उस व्यवस्था को प्रकट करती हैं जिसे शिक्षार्थी बना रहा है। त्रुटि (error) ज्ञान की कमी से आती है और व्यवस्थित होती है: शिक्षार्थी उसे दोहराता है और बताए जाने पर भी स्वयं सुधार नहीं पाता। भूल या गलती (mistake) थकान या जल्दबाज़ी से हुई निष्पादन की चूक है, जिसे शिक्षार्थी स्वयं सुधार सकता है। त्रुटियाँ अंतरभाषिक (interlingual) होती हैं जब वे मातृभाषा से आती हैं, जैसे बांग्ला भाषी का मेरी किताब के स्थान पर मेरा किताब कहना, क्योंकि बांग्ला में व्याकरणिक लिंग नहीं होता; और अंतःभाषिक (intralingual) होती हैं जब वे नई भाषा से ही आती हैं, जैसे goed और childs जैसे अति-सामान्यीकृत रूप। त्रुटि विश्लेषण शिक्षक को बताता है कि आगे क्या पढ़ाना है।

पठन और लेखन की कठिनाइयों का निदान

निदानात्मक आकलन किसी कठिनाई के विशिष्ट कारण को खोजता है। पठन-कठिनाई के लक्षणों में धीमा, शब्द-दर-शब्द पढ़ना, पहले अक्षर से शब्द का अनुमान लगाना, b और d या घ और ध जैसे मिलते-जुलते अक्षरों में भ्रम, पंक्ति से भटक जाना, और पढ़ी गई बात याद न रहना शामिल हैं। केनेथ गुडमैन द्वारा विकसित मिस्क्यू विश्लेषण (miscue analysis) यह अध्ययन करता है कि पाठक किन-किन प्रकारों से पाठ से हटकर पढ़ता है। लेखन-कठिनाई के लक्षणों में अपठनीय लिखावट, असमान दूरी और आकार, बार-बार उलटे अक्षर लिखना, और बच्चे के पठन-स्तर से बहुत नीचे की वर्तनी शामिल हैं। डिस्लेक्सिया (पठन संबंधी कठिनाई), डिस्ग्राफ़िया (लेखन संबंधी) और विकासात्मक वाचाघात (developmental aphasia, भाषा संबंधी) दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 में सूचीबद्ध विशिष्ट अधिगम दिव्यांगताओं में से हैं; ये कम बुद्धि के लक्षण नहीं हैं और इनकी शीघ्र पहचान तथा विशेषज्ञ सहायता आवश्यक है।

उपचारात्मक शिक्षण

उपचारात्मक शिक्षण निदान के बाद होता है और विशिष्ट कठिनाई को लक्ष्य करता है, प्रायः छोटे समूहों में या एक-एक बच्चे के साथ; यह उसी पाठ को ज़ोर से और धीरे दोहराना नहीं है। इसमें ध्वनि-जागरूकता और फ़ोनिक्स का अभ्यास, बहु-संवेदी तकनीकें, जैसे ध्वनि बोलते हुए रेत पर अक्षर बनाना (ग्रेस फ़र्नाल्ड से जुड़ा VAKT उपागम: दृश्य, श्रव्य, गतिसंवेदी और स्पर्श आधारित अधिगम), क्रमिक कठिनाई वाली पठन-पुस्तकें (graded readers), किसी सहपाठी के साथ युग्म-पठन, अतिरिक्त समय और भरपूर प्रोत्साहन शामिल हो सकते हैं। इसका चक्र है: पहचान, निदान, योजना, शिक्षण और पुनः आकलन। जो बच्चे किसी कौशल में पहले ही दक्ष हो चुके हैं, उन्हें संवर्धन (enrichment) गतिविधियाँ दी जाती हैं।

विविधतापूर्ण कक्षा की भाषा

भारतीय कक्षाओं में भिन्न-भिन्न घरेलू भाषाओं और बोलियों वाले बच्चे, पहली पीढ़ी के शिक्षार्थी, प्रवासी बच्चे और दिव्यांग बच्चे होते हैं। विलियम लेबोव ने दिखाया कि अमानक बोलियाँ भी मानक भाषा जितनी ही तर्कपूर्ण और नियमबद्ध होती हैं, इसलिए बच्चे की बोली भिन्नता है, कमी नहीं। शिक्षक घर की भाषाओं का स्वागत करता है, आरंभिक कक्षाओं में विद्यालय की भाषा विकसित करते हुए घर की भाषा में दिए गए उत्तर स्वीकार करता है, द्विभाषी सामग्री का प्रयोग करता है, मिश्रित समूह बनाता है ताकि बच्चे एक-दूसरे की मदद करें, और बच्चों पर ठप्पा लगाने या उनकी तुलना करने से बचता है। CTET की दृष्टि से, कठिनाई झेल रहे बच्चे के प्रति सबसे अच्छी प्रतिक्रिया है कारण खोजना और शिक्षण को उसके अनुकूल बनाना, बच्चे या परिवार को दोष देना नहीं।

मुख्य तथ्य

  • भाषा का आकलन क्षमता के रूप में करें: अपठित गद्यांश, मुक्त-उत्तरीय प्रश्न और वास्तविक कार्य, पढ़ाए गए पाठ की याद नहीं।
  • सुनना: निर्देशों का पालन, कहानी पर प्रश्न, श्रुतलेख; बोलना: भूमिका निर्वाह और चर्चा के दौरान जाँच-सूची और रूब्रिक के साथ अवलोकन।
  • पठन का आकलन: रनिंग रिकॉर्ड (मैरी क्ले), मिस्क्यू विश्लेषण (केनेथ गुडमैन), क्लोज़ परीक्षण (विल्सन टेलर, 1953), तीन स्तरों पर बोध।
  • RTE अधिनियम 2009, धारा 29(2)(ज): सतत और व्यापक मूल्यांकन (CCE); NEP 2020: रचनात्मक, दक्षता-आधारित आकलन और 360 डिग्री प्रगति-पत्र।
  • त्रुटि (कॉर्डर, 1967): व्यवस्थित, ज्ञान की कमी से, शिक्षार्थी स्वयं नहीं सुधार पाता; भूल: निष्पादन की चूक जिसे शिक्षार्थी स्वयं सुधार सकता है।
  • अंतरभाषिक त्रुटि: मातृभाषा से (बांग्ला भाषी का मेरा किताब); अंतःभाषिक त्रुटि: नई भाषा से (goed, childs)।
  • दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 की विशिष्ट अधिगम दिव्यांगताओं में डिस्लेक्सिया, डिस्ग्राफ़िया, डिस्कैलकुलिया, डिस्प्रैक्सिया और विकासात्मक वाचाघात शामिल हैं।
  • उपचारात्मक चक्र: पहचान, निदान, योजना, शिक्षण, पुनः आकलन; छोटे समूह, बहु-संवेदी VAKT (ग्रेस फ़र्नाल्ड), क्रमिक पठन-पुस्तकें, साथियों की सहायता।
  • लेबोव: अमानक बोलियाँ तर्कपूर्ण और नियमबद्ध हैं; बोली भिन्नता है, कमी नहीं; विद्यालय की भाषा को घर की भाषा पर आधारित करें।

एक नज़र में दोहराव

रटने का नहीं, क्षमता का आकलन: अपठित गद्यांश, मुक्त कार्य; चारों कौशल; अधिगम के लिए, के रूप में और का आकलन; रनिंग रिकॉर्ड (क्ले), मिस्क्यू विश्लेषण (गुडमैन), क्लोज़ (टेलर 1953), रूब्रिक, पोर्टफ़ोलियो; RTE धारा 29(2)(ज): CCE; NEP 2020: 360 डिग्री प्रगति-पत्र; कॉर्डर 1967: त्रुटि (व्यवस्थित) बनाम भूल (चूक); अंतरभाषिक बनाम अंतःभाषिक; डिस्लेक्सिया, डिस्ग्राफ़िया (दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016); उपचार: पहले निदान, बहु-संवेदी VAKT (फ़र्नाल्ड); लेबोव: भिन्नता, कमी नहीं।

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