8 में से पाठ 1 · विज्ञान और उसका शिक्षणशास्त्र (पेपर II)
भोजन और सजीव जगत: पोषण, कोशिका, सूक्ष्मजीव, जनन और किशोरावस्था
AI की सहायता से तैयार किया गया और 28 अक्टूबर 2026 को तथ्यों की जाँच की गई; किसी मानव संपादक ने इसे अभी पंक्ति-दर-पंक्ति नहीं पढ़ा है। कोई गलती दिखे तो हमें बताइए। संपादकीय मानक और सुधार
भोजन के घटक
भोजन पौधों और जंतुओं से मिलता है; जंतु शाकाहारी, मांसाहारी या सर्वाहारी होते हैं। कार्बोहाइड्रेट और वसा ऊर्जा देते हैं (समान मात्रा के कार्बोहाइड्रेट की तुलना में वसा कहीं अधिक ऊर्जा देती है), प्रोटीन शरीर का निर्माण करते हैं, विटामिन और खनिज लवण शरीर को रोगों से बचाते हैं, आहारी रेशे (रूक्षांश) बिना पचे भोजन को बाहर निकालने में सहायता करते हैं, और जल पोषक तत्वों के अवशोषण तथा अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। सरल परीक्षणों से पोषक तत्वों का पता चलता है: आयोडीन का तनु विलयन मंड (स्टार्च) को नीला-काला कर देता है, कॉपर सल्फेट और कॉस्टिक सोडा का विलयन प्रोटीन को बैंगनी कर देता है, और वसा कागज़ पर तेल जैसा धब्बा छोड़ती है।
अभावजन्य रोग
जिस आहार में लंबे समय तक किसी पोषक तत्व की कमी रहे, उससे अभावजन्य रोग होता है। विटामिन A की कमी से दृष्टि क्षीण होती है (रतौंधी), विटामिन B1 की कमी से बेरी-बेरी, विटामिन C की कमी से स्कर्वी जिसमें मसूड़ों से रक्त आता है, और विटामिन D की कमी से रिकेट्स (सूखा रोग) होता है जिसमें अस्थियाँ नरम होकर मुड़ जाती हैं; कैल्सियम की कमी से अस्थियाँ और दाँत कमज़ोर होते हैं, आयोडीन की कमी से घेंघा (गर्दन में अवटु ग्रंथि का फूल जाना) और लोहे की कमी से रक्ताल्पता (अनीमिया) होती है। प्रोटीन की बहुत कमी से क्वाशियोरकर होता है, और प्रोटीन तथा ऊर्जा देने वाले भोजन, दोनों की कमी से मरास्मस होता है।
पादपों में पोषण
हरे पादप स्वपोषी हैं: वे अपनी पत्तियों में, जो पादप की खाद्य फ़ैक्टरी हैं, प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं। पर्णहरित (क्लोरोफ़िल) सूर्य के प्रकाश को ग्रहण करता है, कार्बन डाइऑक्साइड रंध्र नामक सूक्ष्म छिद्रों से प्रवेश करती है, और जल तथा खनिज जड़ों से ऊपर पहुँचते हैं; इससे कार्बोहाइड्रेट, जो मंड के रूप में संचित होते हैं, और ऑक्सीजन बनते हैं। कुछ पादप दूसरों से भोजन लेते हैं: अमरबेल (कस्कुटा) अपने परपोषी पादप पर परजीवी है, और घटपर्णी (पिचर पादप) जैसे कीटभक्षी पादप फँसे हुए कीटों को पचा लेते हैं। खुंभी (मशरूम) जैसे कवक मृत और सड़ते-गलते पदार्थों पर पलने वाले मृतजीवी हैं, लाइकेन एक शैवाल और एक कवक की साझेदारी (सहजीवन) है, और चना जैसे दलहनी पादपों की जड़ ग्रंथिकाओं में रहने वाले राइज़ोबियम जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करते हैं।
जंतुओं में पोषण
जंतु पोषण के पाँच चरण हैं: अंतर्ग्रहण, पाचन, अवशोषण, स्वांगीकरण और निष्कासन। मनुष्य में कृंतक दाँत भोजन को काटते हैं, रदनक चीरते-फाड़ते हैं, और अग्रचर्वणक तथा चर्वणक पीसते हैं। लार मंड को शर्करा में बदलती है; आमाशय का हाइड्रोक्लोरिक अम्ल जीवाणुओं को नष्ट करता है जबकि उसके पाचक रस प्रोटीन को तोड़ते हैं; और यकृत से स्रावित पित्त रस, जो पित्ताशय में संचित रहता है, वसा पर क्रिया करता है। लगभग 7.5 m लंबी क्षुद्रांत्र (छोटी आँत) पाचन पूरा करती है और उसके अंगुली जैसे दीर्घरोम (विलाई) पचे हुए भोजन का अवशोषण करते हैं; लगभग 1.5 m लंबी बृहदांत्र (बड़ी आँत) जल और कुछ लवणों का अवशोषण करती है। गाय और भैंस रोमंथी हैं: रूमेन में संचित घास आंशिक रूप से पचकर जुगाल (कड) बनती है, जिसे वे फिर से चबाते हैं।
कोशिका
कोशिका जीवन की मूलभूत संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है; रॉबर्ट हुक ने 1665 में कॉर्क की एक पतली काट में पहली बार कोशिकाएँ देखीं। जीव एककोशिक (अमीबा, जीवाणु) या बहुकोशिक हो सकते हैं, और लंबी तथा शाखित तंत्रिका कोशिका दिखाती है कि कोशिका की आकृति उसके कार्य के अनुरूप होती है। एक सामान्य कोशिका में कोशिका झिल्ली, कोशिकाद्रव्य और केंद्रक होता है, जिसके गुणसूत्र जीन धारण करते हैं। पादप कोशिकाओं में इनके अतिरिक्त कोशिका भित्ति, हरितलवक और प्रायः एक बड़ी रिक्तिका भी होती है। जीवाणु प्रोकैरियोट हैं, जिनमें केंद्रक झिल्ली नहीं होती; सुसंगठित केंद्रक वाली कोशिकाएँ यूकैरियोट कहलाती हैं। शुतुरमुर्ग का अंडा सबसे बड़ी एकल कोशिका है।
सूक्ष्मजीव, मित्र और शत्रु
अधिकांश सूक्ष्मजीव केवल सूक्ष्मदर्शी से ही देखे जा सकते हैं; इनके मुख्य वर्ग जीवाणु, कवक, प्रोटोज़ोआ और कुछ शैवाल हैं, जबकि विषाणु केवल परपोषी कोशिका के अंदर ही गुणन करते हैं। मित्र के रूप में लैक्टोबैसिलस दूध को दही में बदलता है, यीस्ट आटे को फुलाता है और शर्करा को ऐल्कोहॉल में बदलता है (किण्वन), अलेक्ज़ेंडर फ्लेमिंग ने एक फफूँद से प्रतिजैविक पेनिसिलिन की खोज की, और एडवर्ड जेनर के चेचक के टीके से टीकाकरण का आरंभ हुआ। शत्रु के रूप में जीवाणु क्षयरोग, टाइफ़ाइड, हैज़ा, ऐंथ्रैक्स और नींबू वंश का कैंकर उत्पन्न करते हैं, विषाणु खसरा, छोटी माता (चिकनपॉक्स), पोलियो और खुरपका-मुँहपका रोग उत्पन्न करते हैं, एक कवक गेहूँ का किट्ट (रस्ट) रोग उत्पन्न करता है, और एक प्रोटोज़ोआ मलेरिया उत्पन्न करता है, जिसे मादा ऐनॉफ़्लीज़ मच्छर फैलाता है। दूध का पाश्चरीकरण उसे लगभग 70 °C पर 15 से 30 सेकंड तक गर्म करके और फिर अचानक ठंडा करके किया जाता है।
जनन
पादप कायिक प्रवर्धन (आलू की आँखें, अदरक, ब्रायोफ़िलम की पत्ती की कलिकाएँ, गुलाब की कलमें), मुकुलन (यीस्ट), खंडन (स्पाइरोगाइरा) और बीजाणुओं (कवक, मॉस, फ़र्न) द्वारा अलैंगिक जनन करते हैं। लैंगिक जनन में पुंकेसर नर भाग है और वर्तिकाग्र, वर्तिका तथा अंडाशय वाला स्त्रीकेसर मादा भाग; परागण में परागकण वायु, जल या कीटों द्वारा वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं, निषेचन से युग्मनज बनता है, और अंडाशय फल में तथा बीजांड बीज में बदल जाता है। जंतुओं में निषेचन मनुष्य, गाय और मुर्गी में आंतरिक तथा मेंढक और मछली में बाह्य होता है; जरायुज जंतु सीधे शिशु को जन्म देते हैं, अंडप्रजक जंतु अंडे देते हैं। टैडपोल कायांतरण द्वारा मेंढक बनता है, और डॉली भेड़ (1996) किसी वयस्क कोशिका से क्लोन की गई पहली स्तनधारी थी।
किशोरावस्था
लगभग 11 से 19 वर्ष की आयु की किशोरावस्था वह अवधि है जिसमें शरीर जनन परिपक्वता की ओर बढ़ता है। लंबाई अचानक बढ़ती है, लड़कों के कंधे चौड़े होते हैं और स्वरयंत्र (कंठमणि) के बढ़ने से उनकी आवाज़ भारी हो जाती है, स्वेद और तैल ग्रंथियाँ सक्रिय होकर मुँहासे पैदा करती हैं, और जनन अंग परिपक्व होते हैं। वृषण से स्रावित टेस्टोस्टेरॉन और अंडाशय से स्रावित एस्ट्रोजन ये परिवर्तन लाते हैं, और इन पर पीयूष ग्रंथि का नियंत्रण रहता है। ऋतुस्राव (रजोधर्म) लगभग 10 से 12 वर्ष की आयु में आरंभ होता है, इसका चक्र लगभग 28 से 30 दिन का होता है, और यह लगभग 45 से 50 वर्ष की आयु में रुक जाता है। मनुष्य में गुणसूत्रों के 23 युग्म होते हैं; स्त्री XX और पुरुष XY होता है, इसलिए पिता से आया गुणसूत्र शिशु का लिंग निर्धारित करता है। शिक्षक सही जानकारी देते हैं, भ्रांतियाँ दूर करते हैं और पोषण तथा स्वच्छता पर बल देते हैं।
मुख्य तथ्य
- भोजन परीक्षण: आयोडीन का तनु विलयन मंड को नीला-काला करता है; कॉपर सल्फेट और कॉस्टिक सोडा प्रोटीन को बैंगनी करते हैं; वसा कागज़ पर तेल जैसा धब्बा छोड़ती है।
- अभावजन्य रोग: विटामिन A - रतौंधी; B1 - बेरी-बेरी; C - स्कर्वी (मसूड़ों से रक्त आना); D - रिकेट्स; आयोडीन - घेंघा; लोहा - रक्ताल्पता; प्रोटीन - क्वाशियोरकर; प्रोटीन और ऊर्जा - मरास्मस।
- प्रकाश संश्लेषण: कार्बन डाइऑक्साइड + जल, सूर्य के प्रकाश और पर्णहरित की उपस्थिति में, कार्बोहाइड्रेट + ऑक्सीजन देते हैं; कार्बन डाइऑक्साइड रंध्रों से प्रवेश करती है; पत्तियाँ पादप की खाद्य फ़ैक्टरी हैं।
- पादपों में पोषण की विधियाँ: अमरबेल (कस्कुटा) - परजीवी; घटपर्णी - कीटभक्षी; खुंभी और ब्रेड का फफूँद - मृतजीवी; लाइकेन - शैवाल और कवक का सहजीवन; राइज़ोबियम - दलहनी पादपों की जड़ ग्रंथिकाओं में नाइट्रोजन स्थिरीकरण।
- पाचन: लार मंड पर क्रिया करती है; आमाशय का अम्ल जीवाणुओं को नष्ट करता है; यकृत का पित्त रस (पित्ताशय में संचित) वसा पर क्रिया करता है; क्षुद्रांत्र लगभग 7.5 m, दीर्घरोम भोजन का अवशोषण करते हैं; बृहदांत्र लगभग 1.5 m, जल का अवशोषण करती है।
- कोशिका तथ्य: रॉबर्ट हुक ने 1665 में कॉर्क में कोशिकाएँ देखीं; पादप कोशिका में कोशिका भित्ति, हरितलवक और बड़ी रिक्तिका होती है; जीवाणु प्रोकैरियोट हैं (केंद्रक झिल्ली नहीं); शुतुरमुर्ग का अंडा सबसे बड़ी एकल कोशिका है।
- सूक्ष्मजीव: लैक्टोबैसिलस - दही; यीस्ट - ब्रेड और ऐल्कोहॉल; फ्लेमिंग - पेनिसिलिन; जेनर - चेचक का टीका; मलेरिया - प्रोटोज़ोआ, मादा ऐनॉफ़्लीज़ मच्छर द्वारा फैलता है; पाश्चरीकरण - लगभग 70 °C पर 15-30 सेकंड, फिर अचानक ठंडा करना।
- पुष्प: पुंकेसर (परागकोश और तंतु) नर भाग है, स्त्रीकेसर (वर्तिकाग्र, वर्तिका, अंडाशय) मादा भाग; निषेचन के बाद अंडाशय फल और बीजांड बीज बनता है।
- किशोरावस्था लगभग 11-19 वर्ष; टेस्टोस्टेरॉन (वृषण), एस्ट्रोजन (अंडाशय), दोनों पीयूष ग्रंथि के नियंत्रण में; ऋतुस्राव चक्र लगभग 28-30 दिन; स्त्री XX, पुरुष XY; पिता का गुणसूत्र शिशु का लिंग तय करता है।
एक नज़र में दोहराव
कार्बोहाइड्रेट और वसा ऊर्जा देते हैं, प्रोटीन शरीर बनाते हैं, विटामिन और खनिज रक्षा करते हैं; A रतौंधी, B1 बेरी-बेरी, C स्कर्वी, D रिकेट्स, आयोडीन घेंघा, लोहा रक्ताल्पता; पत्तियों में रंध्र और पर्णहरित द्वारा प्रकाश संश्लेषण; अमरबेल परजीवी, घटपर्णी कीटभक्षी; क्षुद्रांत्र लगभग 7.5 m, दीर्घरोम सहित; हुक ने 1665 में कोशिकाएँ देखीं; लैक्टोबैसिलस दही, फ्लेमिंग पेनिसिलिन, जेनर टीका; अंडाशय फल बनता है; किशोरावस्था 11-19 वर्ष; XY पुरुष।