8 में से पाठ 2 · विज्ञान और उसका शिक्षणशास्त्र (पेपर II)
पदार्थ: पृथक्करण, भौतिक और रासायनिक परिवर्तन, अम्ल और क्षारक, तंतु, धातुएँ, ईंधन और दहन
AI की सहायता से तैयार किया गया और 28 अक्टूबर 2026 को तथ्यों की जाँच की गई; किसी मानव संपादक ने इसे अभी पंक्ति-दर-पंक्ति नहीं पढ़ा है। कोई गलती दिखे तो हमें बताइए। संपादकीय मानक और सुधार
पदार्थों का वर्गीकरण और पृथक्करण
पदार्थों को चमक (द्युति), कठोरता, विलेयता, तैरने या डूबने, और पारदर्शिता (काँच पारदर्शी, तेल लगा कागज़ पारभासी, लकड़ी अपारदर्शी) जैसे गुणों के आधार पर समूहों में रखा जाता है। मिश्रणों को हस्त चयन, थ्रेशिंग, निष्पावन (पवन हल्की भूसी को उड़ा ले जाती है), चालन (छानना), अवसादन और निस्तारण, निस्यंदन, वाष्पन और मंथन द्वारा पृथक किया जाता है। रेत में मिले नमक को जल में घोलकर, छानकर और फिर निस्यंद का वाष्पन करके अलग किया जाता है।
भौतिक और रासायनिक परिवर्तन
भौतिक परिवर्तन में कोई नया पदार्थ बने बिना आकृति, आकार, रंग या अवस्था बदलती है और यह प्रायः उत्क्रमणीय होता है (मोम का पिघलना, चीनी का घुलना, क्रिस्टलीकरण)। रासायनिक परिवर्तन में नया पदार्थ बनता है, प्रायः ऊष्मा, प्रकाश, ध्वनि, रंग परिवर्तन, गंध या गैस के साथ। मैग्नीशियम का फीता चमकदार श्वेत प्रकाश के साथ जलकर मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाता है, जिसका विलयन क्षारकीय होता है; सिरके में खाने का सोडा मिलाने पर कार्बन डाइऑक्साइड बनती है, जो चूने के पानी को दूधिया कर देती है; और नीले कॉपर सल्फेट विलयन में रखी लोहे की कील पर ताँबे की भूरी परत जम जाती है तथा विलयन हरा (आयरन सल्फेट) हो जाता है। जंग लगने के लिए ऑक्सीजन और जल दोनों आवश्यक हैं, और पेंट, ग्रीज़ या यशदलेपन (जस्ते की परत चढ़ाना) से इसे रोका जाता है।
अम्ल, क्षारक और लवण
अम्ल स्वाद में खट्टे होते हैं और नीले लिटमस को लाल कर देते हैं; क्षारक स्वाद में कड़वे, छूने में साबुन जैसे होते हैं और लाल लिटमस को नीला कर देते हैं। लिटमस लाइकेन से प्राप्त होता है, हल्दी क्षारकों के साथ लाल हो जाती है, और गुड़हल (चाइना रोज़) सूचक अम्लों को गहरा गुलाबी और क्षारकों को हरा कर देता है। NCERT की जोड़ियाँ: सिरके में ऐसीटिक अम्ल, चींटी के डंक में फॉर्मिक अम्ल, नींबू वंश के फलों में सिट्रिक अम्ल, दही में लैक्टिक अम्ल, पालक में ऑक्सैलिक अम्ल, आँवले में ऐस्कॉर्बिक अम्ल (विटामिन C) और इमली में टार्टरिक अम्ल होता है; चूने का पानी कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड है और मिल्क ऑफ़ मैग्नीशिया मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड। अम्ल और क्षारक एक-दूसरे को उदासीन करके लवण और जल बनाते हैं, और ऊष्मा निकलती है। इसीलिए चींटी के डंक का उपचार खाने के सोडे या कैलामाइन (जिंक कार्बोनेट) से किया जाता है, अम्लीय मिट्टी में बिना बुझा चूना या बुझा हुआ चूना और क्षारकीय मिट्टी में जैव पदार्थ मिलाए जाते हैं।
तंतु से वस्त्र तक
कपास काली मिट्टी और उष्ण जलवायु में उगती है, और चुने गए कपास गोलकों से बीज अलग करने को ओटना (जिनिंग) कहते हैं; पटसन (जूट) का तंतु पटसन पादप के तने से अपगलन (रेटिंग) द्वारा प्राप्त होता है। तंतुओं को तकली या चरखे पर कातकर तागा बनाया जाता है और फिर बुनाई या बंधाई (निटिंग) द्वारा वस्त्र बनाया जाता है। ऊन भेड़, याक, अंगोरा और कश्मीरी बकरियों तथा ऊँट से मिलती है; इसका कर्तन, अभिमार्जन, छँटाई और रंगाई करके इसे तागे में बदला जाता है, और छँटाई करने वालों को ऐंथ्रैक्स का संक्रमण हो सकता है, जिसे छँटाई करने वाले का रोग (सॉर्टर्स डिज़ीज़) कहते हैं। रेशम, रेशम कीट के कोकून से मिलता है, जिसका जीवन चक्र अंडा, लार्वा (कैटरपिलर), प्यूपा और शलभ (मॉथ) है; रेशम कीट पालन को सेरीकल्चर कहते हैं, शहतूत रेशम कीट शहतूत की पत्तियाँ खाता है, और टसर, मूगा और कोसा भारत के अन्य रेशम हैं।
संश्लेषित रेशे और प्लास्टिक
रेयॉन, जिसे कृत्रिम रेशम कहते हैं, काष्ठ लुगदी के रासायनिक उपचार से बनता है; नायलॉन, जो पहला पूर्णतः संश्लेषित रेशा था, पॉलिएस्टर, और ऊन जैसा दिखने वाला ऐक्रिलिक पेट्रोरसायनों से बनते हैं। पॉलिथीन और PVC जैसे थर्मोप्लास्टिक गर्म करने पर नरम हो जाते हैं; बैकेलाइट (स्विच, बर्तनों के हत्थे) और मेलामाइन (रसोई के बर्तन) जैसे थर्मोसेटिंग प्लास्टिक एक बार साँचे में ढलने के बाद नरम नहीं होते। प्लास्टिक जैव-अनिम्नीकरणीय हैं और इन्हें जलाने से विषैली गैसें निकलती हैं, इसलिए 4R सिद्धांत अपनाया जाता है: कम उपयोग (Reduce), पुनः उपयोग (Reuse), पुनःचक्रण (Recycle) और पुनः प्राप्ति (Recover)।
धातु और अधातु
धातुएँ चमकीली (द्युतिमान), आघातवर्धनीय, तन्य, ध्वानिक और ऊष्मा तथा विद्युत की सुचालक होती हैं; अधातुएँ सामान्यतः चमकहीन, भंगुर और कुचालक होती हैं, जबकि ग्रेफ़ाइट एक सुचालक अपवाद है। पारा एक द्रव धातु है और ब्रोमीन एक द्रव अधातु; सोडियम इतना नरम होता है कि चाकू से कट जाता है और इसे मिट्टी के तेल में रखा जाता है, जबकि फॉस्फोरस को जल में रखा जाता है। धातुओं के ऑक्साइड क्षारकीय और अधातुओं के ऑक्साइड अम्लीय होते हैं। अनेक धातुएँ तनु अम्लों से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन देती हैं, जो 'पॉप' ध्वनि के साथ जलती है। अधिक अभिक्रियाशील धातु कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण के विलयन से विस्थापित कर देती है: जिंक कॉपर सल्फेट से ताँबे को विस्थापित कर देता है, पर ताँबा जिंक को विस्थापित नहीं कर सकता।
कोयला और पेट्रोलियम
कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस समाप्य जीवाश्म ईंधन हैं, जो लाखों वर्षों में मृत जीवों से बने हैं, जबकि सूर्य का प्रकाश, वायु और पवन असमाप्य हैं। कोयला लगभग 300 मिलियन वर्ष पहले दबे वनों से कार्बनीकरण द्वारा बना, और इसके प्रक्रमण से कोक (लगभग शुद्ध कार्बन, इस्पात बनाने में प्रयुक्त), कोलतार (रंजकों, औषधियों, विस्फोटकों, पेंट और नैफ़्थलीन की गोलियों के लिए) और कोयला गैस प्राप्त होते हैं। पेट्रोलियम समुद्र में रहने वाले जीवों से बना; परिष्करण द्वारा इससे LPG, पेट्रोल, मिट्टी का तेल, डीज़ल, स्नेहक तेल, पैराफ़िन मोम और बिटुमेन पृथक किए जाते हैं। NCERT के अनुसार विश्व का पहला तेल कूप 1859 में संयुक्त राज्य अमेरिका के पेनसिल्वेनिया में खोदा गया था। PCRA सलाह देता है कि वाहन एकसमान मध्यम गति से चलाएँ और ट्रैफ़िक लाइट पर इंजन बंद कर दें।
दहन और ज्वाला
दहन वह रासायनिक प्रक्रम है जिसमें कोई पदार्थ ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके ऊष्मा देता है। इसके लिए ईंधन, वायु और ज्वलन ताप तक की ऊष्मा आवश्यक है; ज्वलन ताप वह न्यूनतम ताप है जिस पर कोई पदार्थ आग पकड़ लेता है, और पेट्रोल, LPG तथा ऐल्कोहॉल ज्वलनशील पदार्थ हैं जिनका ज्वलन ताप बहुत कम होता है। कागज़ के कप में जल उबाला जा सकता है क्योंकि जल ऊष्मा सोख लेता है और कागज़ को उसके ज्वलन ताप तक नहीं पहुँचने देता। दहन तीव्र (गैस स्टोव), स्वतः (कमरे के ताप पर फॉस्फोरस) या विस्फोट (पटाखे) के रूप में हो सकता है। मोमबत्ती की ज्वाला में बिना जली मोम की वाष्प वाला काला आंतरिक क्षेत्र, आंशिक दहन वाला दीप्त मध्य क्षेत्र और पूर्ण दहन वाला अदीप्त बाहरी क्षेत्र होता है; बाहरी क्षेत्र सबसे गर्म है और सुनार इसी का उपयोग करते हैं। तेल या विद्युत उपकरणों की आग पर जल का उपयोग नहीं किया जाता; वहाँ कार्बन डाइऑक्साइड सबसे अच्छा अग्निशामक है।
मुख्य तथ्य
- पृथक्करण: निष्पावन - पवन हल्की भूसी उड़ा ले जाती है; अवसादन के बाद निस्तारण - ऊपर का स्वच्छ जल उड़ेल लेना; निस्यंदन - द्रव से अविलेय ठोस अलग करना; रेत से नमक - घोलना, छानना, वाष्पन।
- भौतिक परिवर्तन: कोई नया पदार्थ नहीं, प्रायः उत्क्रमणीय (पिघलना, घुलना, क्रिस्टलीकरण)। रासायनिक परिवर्तन: नया पदार्थ, ऊष्मा, प्रकाश, गैस, रंग परिवर्तन या गंध के साथ (जलना, जंग लगना)।
- कॉपर सल्फेट विलयन में लोहे की कील: ताँबे की भूरी परत जमती है और नीला विलयन हरा (आयरन सल्फेट) हो जाता है - विस्थापन द्वारा रासायनिक परिवर्तन।
- जंग लगने के लिए ऑक्सीजन और जल दोनों आवश्यक; यशदलेपन में लोहे पर जस्ते की परत चढ़ाई जाती है; लोहार पहिये पर चढ़ाने से पहले लोहे की रिम को गर्म करता है क्योंकि धातुएँ गर्म करने पर फैलती हैं।
- प्राकृतिक अम्ल: सिरका - ऐसीटिक; चींटी का डंक - फॉर्मिक; नींबू वंश के फल - सिट्रिक; दही - लैक्टिक; पालक - ऑक्सैलिक; आँवला - ऐस्कॉर्बिक (विटामिन C); इमली - टार्टरिक।
- सूचक: लिटमस (लाइकेन से) - अम्ल में नीला लिटमस लाल हो जाता है; हल्दी क्षारक में लाल हो जाती है; गुड़हल - अम्ल में गहरा गुलाबी, क्षारक में हरा।
- रेशम कीट का जीवन चक्र: अंडा, लार्वा (कैटरपिलर), प्यूपा (कोकून), शलभ; सेरीकल्चर = रेशम कीट पालन; ऊन की छँटाई करने वालों को ऐंथ्रैक्स (सॉर्टर्स डिज़ीज़) हो सकता है।
- थर्मोप्लास्टिक (पॉलिथीन, PVC) गर्म करने पर नरम होते हैं; थर्मोसेटिंग प्लास्टिक (बैकेलाइट, मेलामाइन) नहीं; 4R सिद्धांत: कम उपयोग, पुनः उपयोग, पुनःचक्रण, पुनः प्राप्ति।
- कोयले के उत्पाद: कोक (इस्पात), कोलतार (रंजक, औषधियाँ, विस्फोटक, नैफ़्थलीन की गोलियाँ), कोयला गैस; विश्व का पहला तेल कूप (NCERT के अनुसार): पेनसिल्वेनिया, अमेरिका, 1859।
- मोमबत्ती की ज्वाला: आंतरिक क्षेत्र काला (बिना जली मोम की वाष्प), मध्य क्षेत्र दीप्त (आंशिक दहन), बाहरी क्षेत्र अदीप्त और सबसे गर्म (पूर्ण दहन)।
एक नज़र में दोहराव
निष्पावन, अवसादन, निस्तारण, निस्यंदन, वाष्पन; भौतिक परिवर्तन में नया पदार्थ नहीं बनता, रासायनिक में बनता है; जंग के लिए ऑक्सीजन और जल, यशदलेपन = जस्ते की परत; अम्ल में नीला लिटमस लाल, क्षारक में हल्दी लाल; चींटी के डंक में फॉर्मिक अम्ल; अम्ल + क्षारक = लवण + जल; रेशम कीट अंडा-लार्वा-प्यूपा-शलभ; थर्मोप्लास्टिक बनाम थर्मोसेटिंग; धातुएँ आघातवर्धनीय और तन्य; कोक, कोलतार, कोयला गैस; ज्वलन ताप; ज्वाला का बाहरी क्षेत्र सबसे गर्म।