आदित्य-एल1 के वीईएलसी से पता चला कि एक सौर विस्फोट सरल सममित बुलबुले की तरह नहीं, बल्कि असममित रूप से फैला: आईआईए का अध्ययन
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 3 नवंबर 2026 को बताया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (आईआईए) के वैज्ञानिकों ने आदित्य-एल1 पर लगे विज़िबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (वीईएलसी) के डेटा से दिखाया है कि एक सौर विस्फोट, यानी कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई), सूर्य से बाहर की ओर एक सरल सममित बुलबुले की तरह नहीं फैला, जैसा पहले सोचा जाता था, बल्कि उसका फैलाव असमान रहा और उसका आकार असममित (विषम) हो गया; रिलीज़ के अनुसार एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में प्रकाशित इस अध्ययन से यह बात पहली बार सामने आई। वैज्ञानिकों ने वीईएलसी के डेटा को नासा की सोलर डायनेमिक्स ऑब्ज़र्वेटरी (एसडीओ) के पूरक अवलोकनों और त्रि-आयामी मॉडलिंग के साथ मिलाकर विस्फोट की पूरी 3-डी ज्यामिति और गतिकी का पुनर्निर्माण किया, और 5 अगस्त 2024 के उस सीएमई का अवलोकन किया जो सूर्य के पश्चिमी किनारे के पास एक सक्रिय क्षेत्र से निकला था। आदित्य-एल1 के 7 पेलोड में से प्राथमिक पेलोड वीईएलसी एक आंतरिक रूप से आच्छादित (इंटरनली ऑकल्टेड) कोरोनाग्राफ है, जो कोरोना में अत्यधिक आयनित लौह परमाणुओं से उत्पन्न 530.3 एनएम तरंगदैर्ध्य की हरी उत्सर्जन रेखा में स्पेक्ट्रोस्कोपी के ज़रिए नए सीएमई का अध्ययन करता है; यह रेखा लगभग 1.8 मिलियन केल्विन तापमान वाले गर्म कोरोनल प्लाज़्मा को दर्ज करती है। इसके डेटा में ब्लू-शिफ्टेड और रेड-शिफ्टेड उत्सर्जन दिखा, जो प्रेक्षक की ओर आते और उससे दूर जाते प्लाज़्मा से उत्पन्न होता है। सममित फैलाव वाला मॉडल इस पैटर्न को दोबारा नहीं बना सका, जबकि झुके हुए सीएमई अक्ष और असममित पार्श्व फैलाव वाले मॉडल ने बना लिया। शोधकर्ताओं के अनुसार फैलाव में ऐसे अंतर सीएमई की गति और पृथ्वी पर उसके पहुंचने के समय पर असर डाल सकते हैं, जो अंतरिक्ष मौसम (स्पेस वेदर) के लिए अहम है। भारत की पहली अंतरिक्ष-आधारित सौर वेधशाला आदित्य-एल1 सितंबर 2023 में लॉन्च हुई थी और अब सूर्य-पृथ्वी एल1 बिंदु पर कार्यरत है; वीईएलसी को आईआईए ने होसाकोटे में क्रेस्ट (CREST) परिसर स्थित अपनी एमजीके मेनन लैब फॉर स्पेस साइंसेज में इसरो के उल्लेखनीय सहयोग से डिज़ाइन और निर्मित किया।
ऊपर दी गई PIB की आधिकारिक विज्ञप्ति से AI की सहायता से तैयार, और AI की दूसरी जाँच में उसी विज्ञप्ति से मिलाया गया। किसी व्यक्ति ने इसका पंक्ति-दर-पंक्ति संपादन नहीं किया है।
पढ़ाई के लिए संदर्भ
इसरो के 10 दिसंबर 2024 के एक लेख में वीईएलसी द्वारा एक सीएमई के प्रेक्षणों का वर्णन है। भारत का पहला अंतरिक्ष-आधारित सौर मिशन आदित्य-एल1 2 सितंबर 2023 को लॉन्च हुआ था और 6 जनवरी 2024 को पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किमी दूर प्रथम सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंज बिंदु एल1 के चारों ओर प्रभामंडल (हेलो) कक्षा में स्थापित किया गया। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (आईआईए) के शोधकर्ताओं ने वीईएलसी से 16 जुलाई 2024 को देखे गए एक सीएमई का अध्ययन किया, जिसमें कोरोना में अत्यधिक उच्च तापमान वाले लौह परमाणुओं से उत्पन्न 5303 Å की हरी उत्सर्जन रेखा पर ध्यान दिया गया, और नतीजे द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में प्रकाशित किए। प्रभावित क्षेत्र में कोरोना की चमक लगभग 50% घट गई - यह 'कोरोनल डिमिंग' लगभग 6 घंटे तक रही; क्षेत्र का तापमान लगभग 30% बढ़ा और वह अधिक अशांत हो गया; और डॉप्लर मापों से पता चला कि निकला हुआ प्लाज़्मा प्रेक्षक से लगभग 10 किमी प्रति सेकंड की गति से दूर जा रहा था, जो सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र द्वारा सीएमई के विक्षेपण का संकेत है। इसरो के अनुसार सीएमई के पृथ्वी तक पहुंचने पर उपग्रह संचार, जीपीएस प्रणालियां और पावर ग्रिड बाधित हो सकते हैं।
खुद जाँचें: आदित्य-एल1 को एल1 के चारों ओर प्रभामंडल (हेलो) कक्षा में कब स्थापित किया गया, और वीईएलसी द्वारा देखे गए 16 जुलाई 2024 के सीएमई के दौरान कोरोना की चमक लगभग कितनी घटी?
6 जनवरी 2024 को; लगभग 50% (लगभग 6 घंटे तक चली कोरोनल डिमिंग)।
अभ्यास: इस रिलीज़ से अध्ययन करने वाला संस्थान और उसका विभाग, पत्रिका, देखे गए सीएमई की तारीख़, उसके आकार के बारे में निष्कर्ष, वीईएलसी की तरंगदैर्ध्य और वह किस तापमान का प्लाज़्मा दर्ज करता है, आदित्य-एल1 के पेलोड की संख्या और अंतरिक्ष मौसम के लिए इस निष्कर्ष का महत्व लिखें; नोट से आदित्य-एल1 के लॉन्च और प्रभामंडल (हेलो) कक्षा में स्थापना की तारीख़ें, पृथ्वी से एल1 की दूरी, और 16 जुलाई 2024 के सीएमई पर चमक, तापमान और डॉप्लर संबंधी निष्कर्ष।
खुद को परखें
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (आईआईए) के एक अध्ययन (जिसकी जानकारी 3 नवंबर 2026 को दी गई) के अनुसार आदित्य-एल1 के किस पेलोड के डेटा ने, नासा की एसडीओ के अवलोकनों के साथ मिलकर, दिखाया कि एक कोरोनल मास इजेक्शन सरल सममित बुलबुले की तरह नहीं बल्कि असममित रूप से फैला?
उत्तर देखें
उत्तर: विज़िबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (वीईएलसी)
आईआईए के वैज्ञानिकों ने आदित्य-एल1 के 7 पेलोड में से प्राथमिक पेलोड विज़िबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (वीईएलसी) के डेटा को नासा की एसडीओ के अवलोकनों और त्रि-आयामी मॉडलिंग के साथ मिलाया। 530.3 एनएम की हरी उत्सर्जन रेखा में वीईएलसी की स्पेक्ट्रोस्कोपी से मिले डॉप्लर पैटर्न को सममित फैलाव वाला मॉडल दोबारा नहीं बना सका, जबकि झुके हुए सीएमई अक्ष और असममित पार्श्व फैलाव वाले मॉडल ने बना लिया।