8 में से पाठ 5 · गणित, कक्षा VI-VIII (पेपर II)
ज्यामिति: रेखाएँ, कोण, समांतर रेखाएँ, त्रिभुज और सर्वांगसमता
AI की सहायता से तैयार किया गया और 28 अक्टूबर 2026 को तथ्यों की जाँच की गई; किसी मानव संपादक ने इसे अभी पंक्ति-दर-पंक्ति नहीं पढ़ा है। कोई गलती दिखे तो हमें बताइए। संपादकीय मानक और सुधार
आधारभूत ज्यामितीय अवधारणाएँ
रेखाखंड के दो अंत बिंदु और निश्चित लंबाई होती है, किरण का एक अंत बिंदु होता है, और रेखा दोनों ओर अनंत तक बढ़ती है; दो दिए गए बिंदुओं से होकर ठीक एक रेखा गुज़रती है। कोण न्यून (90° से कम), समकोण (90°), अधिक (90° और 180° के बीच), ऋजु (180°), प्रतिवर्ती (180° और 360° के बीच) या संपूर्ण (360°) होते हैं। घंटे की सुई एक घंटे में 30° घूमती है, इसलिए 2 बजे सुइयों के बीच 60° और 4 बजे 120° का कोण बनता है।
कोणों के युग्म
दो कोण पूरक कहलाते हैं यदि उनका योग 90° हो, और संपूरक यदि उनका योग 180° हो: 63° का पूरक 27° और संपूरक 117° है। आसन्न कोणों का शीर्ष और एक भुजा उभयनिष्ठ होती है और वे एक-दूसरे पर अतिव्याप्त नहीं होते; रैखिक युग्म ऐसे आसन्न कोणों का युग्म है जिनकी अन्य भुजाएँ एक सरल रेखा बनाती हैं, इसलिए उनका योग 180° होता है। दो रेखाएँ एक-दूसरे को काटें तो शीर्षाभिमुख कोण बराबर होते हैं। दो न्यून कोण संपूरक नहीं हो सकते, और अपने पूरक के बराबर कोण 45° का होता है। 4 : 5 के अनुपात वाले संपूरक कोण 80° और 100° हैं, और अपने पूरक से 30° अधिक कोण के लिए x = (90° − x) + 30°, अतः x = 60°।
समांतर रेखाएँ और तिर्यक रेखा
तिर्यक रेखा दो या अधिक रेखाओं को भिन्न-भिन्न बिंदुओं पर काटती है, और दो रेखाओं के साथ आठ कोण बनाती है। रेखाएँ समांतर हों तो संगत कोण बराबर, एकांतर अंतः कोण बराबर और एकांतर बाह्य कोण बराबर होते हैं, तथा तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोणों का योग 180° होता है। इनके विलोम समांतरता की जाँच हैं: यदि संगत या एकांतर कोणों का कोई युग्म बराबर हो, या एक ही ओर के अंतः कोणों का कोई युग्म संपूरक हो, तो रेखाएँ समांतर हैं। इसलिए यदि आठ में से एक कोण 70° है, तो चार कोण 70° और चार 110° होंगे; और यदि एक ओर के अंतः कोण 3x और 2x हैं, तो 5x = 180°, x = 36°, और कोण 108° और 72° हैं।
त्रिभुज
भुजाओं के आधार पर त्रिभुज विषमबाहु, समद्विबाहु या समबाहु होता है; कोणों के आधार पर न्यूनकोण, समकोण या अधिककोण। माध्यिका शीर्ष को सम्मुख भुजा के मध्य-बिंदु से मिलाती है और सदा त्रिभुज के अंदर रहती है; शीर्षलंब शीर्ष से सम्मुख भुजा (या उसके बढ़ाए गए भाग) पर डाला गया लंब है और अधिककोण त्रिभुज में बाहर पड़ सकता है; हर त्रिभुज में 3 माध्यिकाएँ और 3 शीर्षलंब होते हैं। कोणों का योग 180° है, और बहिष्कोण दोनों अंतः सम्मुख कोणों के योग के बराबर होता है, इसलिए 115° के बहिष्कोण में एक अंतः सम्मुख कोण 50° हो तो दूसरा 65° होगा। समद्विबाहु त्रिभुज के आधार कोण बराबर होते हैं, इसलिए शीर्ष कोण 40° हो तो हर आधार कोण 70° होगा। किन्हीं दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से अधिक होता है, इसलिए 2 सेमी, 3 सेमी और 6 सेमी से त्रिभुज नहीं बन सकता, और 12 सेमी व 8 सेमी भुजाओं वाले त्रिभुज की तीसरी भुजा 4 सेमी और 20 सेमी के बीच होगी। सबसे बड़ा कोण सबसे लंबी भुजा के सामने होता है।
पाइथागोरस गुण
समकोण त्रिभुज में कर्ण पर बना वर्ग शेष दो भुजाओं पर बने वर्गों के योग के बराबर होता है, h² = a² + b²; बौधायन शुल्बसूत्र में आयत के विकर्ण के लिए यही परिणाम दिया गया है। विलोम से पता चलता है कि त्रिभुज समकोण है या नहीं: 6, 8 और 10 के लिए 36 + 64 = 100 सत्य है, पर 6, 8 और 11 के लिए नहीं। प्रचलित त्रिक हैं 3, 4, 5; 5, 12, 13; 8, 15, 17 और 7, 24, 25। 12 मी ऊँची खिड़की तक पहुँचने वाली 15 मी लंबी सीढ़ी का पाद दीवार से 9 मी दूर होता है, क्योंकि 15² − 12² = 81; और 16 सेमी व 30 सेमी विकर्णों वाले समचतुर्भुज की, जिसके विकर्ण एक-दूसरे को समकोण पर समद्विभाजित करते हैं, भुजा √(8² + 15²) = 17 सेमी और परिमाप 68 सेमी है।
सर्वांगसमता
सर्वांगसम आकृतियों का आकार और माप समान होता है। ΔABC ≅ ΔPQR लिखने से संगतता A ↔ P, B ↔ Q, C ↔ R भी तय हो जाती है, जिससे AB = PQ, ∠B = ∠Q आदि मिलते हैं। कक्षा VII की कसौटियाँ हैं SSS (तीनों भुजाएँ), SAS (दो भुजाएँ और उनके बीच का कोण), ASA (दो कोण और उनके बीच की भुजा) और RHS (समकोण, कर्ण और एक भुजा); चूँकि तीसरा कोण शेष दो से निकल आता है, दो कोण और कोई भी संगत भुजा भी पर्याप्त हैं। AAA कसौटी नहीं है, क्योंकि समान कोणों वाले त्रिभुज अलग-अलग माप के हो सकते हैं, और दो भुजाएँ तथा उनके बीच न आने वाला कोण सामान्यतः एक ही त्रिभुज तय नहीं करते। यदि AB = DE = 5 सेमी, ∠B = ∠E = 60° और BC = EF = 7 सेमी, तो SAS से ΔABC ≅ ΔDEF।
कक्षा में
चाँदे का गलत पैमाना पढ़ने वाले बच्चे 40° के कोण को 140° बताते हैं, मानते हैं कि शीर्षलंब सदा त्रिभुज के अंदर होगा, या पूरक और संपूरक में भ्रमित होते हैं। मापने से पहले अनुमान लगाना (कोण समकोण से बड़ा है या छोटा?), कागज़ मोड़कर लंब समद्विभाजक बनाना, और कागज़ के त्रिभुज के तीनों कोने फाड़कर एक सरल रेखा पर साथ रखना बच्चों को हर गुण बताए जाने से पहले उसे स्वयं खोजने देता है।
मुख्य तथ्य
- 63° का पूरक 27° और संपूरक 117° है; 4 : 5 के अनुपात वाले संपूरक कोण 80° और 100° हैं।
- घड़ी: घंटे की सुई एक घंटे में 30° घूमती है, इसलिए 2 बजे सुइयों के बीच 60° और 3 बजे 90° का कोण होता है।
- तिर्यक रेखा द्वारा काटी गई समांतर रेखाएँ: संगत, एकांतर अंतः और एकांतर बाह्य कोण बराबर; एक ही ओर के अंतः कोणों का योग 180° (3x + 2x = 180° से 108° और 72°)।
- बहिष्कोण गुण: 115° का बहिष्कोण और एक अंतः सम्मुख कोण 50° हो तो दूसरा अंतः सम्मुख कोण 65° है।
- त्रिभुज असमिका: 2 सेमी, 3 सेमी और 6 सेमी से त्रिभुज नहीं बनता (2 + 3 < 6); भुजाएँ 12 सेमी और 8 सेमी हों तो तीसरी भुजा 4 सेमी से अधिक और 20 सेमी से कम होगी।
- पाइथागोरस त्रिक: 3, 4, 5; 5, 12, 13; 8, 15, 17; 7, 24, 25 (और इनके गुणज, जैसे 6, 8, 10)।
- सीढ़ी: 12 मी ऊँची खिड़की तक पहुँचने वाली 15 मी की सीढ़ी का पाद दीवार से √(225 − 144) = √81 = 9 मी दूर है।
- 16 सेमी और 30 सेमी विकर्णों वाला समचतुर्भुज: भुजा = √(64 + 225) = √289 = 17 सेमी, परिमाप 68 सेमी।
- सर्वांगसमता की कसौटियाँ: SSS, SAS, ASA और RHS; AAA, और दो भुजाएँ तथा उनके बीच न आने वाला कोण, कसौटियाँ नहीं हैं।
- हर त्रिभुज में 3 माध्यिकाएँ और 3 शीर्षलंब होते हैं; माध्यिकाएँ अंदर रहती हैं, पर अधिककोण त्रिभुज के दो शीर्षलंब बाहर पड़ते हैं।
एक नज़र में दोहराव
पूरक 90°, संपूरक 180°; रैखिक युग्म 180°; शीर्षाभिमुख कोण बराबर; समांतर रेखाओं में संगत और एकांतर कोण बराबर, एक ही ओर के अंतः कोणों का योग 180°; त्रिभुज के कोणों का योग 180°; बहिष्कोण = दोनों अंतः सम्मुख कोणों का योग; किन्हीं दो भुजाओं का योग > तीसरी भुजा; h² = a² + b²; त्रिक 3-4-5, 5-12-13, 8-15-17, 7-24-25; सर्वांगसमता SSS, SAS, ASA, RHS से, AAA से कभी नहीं।