8 में से पाठ 3 · भाषा शिक्षणशास्त्र (भाषा I और भाषा II)

सुनना और बोलना: कक्षा में मौखिक भाषा का विकास

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मौखिक भाषा पहले क्यों

बच्चे बोलने से बहुत पहले सुनते हैं, और पढ़ने-लिखने से बहुत पहले बोलते हैं; विद्यालय आने तक वे अपनी घर की भाषा का काफ़ी कुशलता से प्रयोग करने लगते हैं। सुनना और बोलना साक्षरता की नींव हैं: जिस बच्चे ने बहुत सी कहानियाँ सुनी हैं और उन पर बात की है, उसके पास वह शब्द-भंडार, वाक्य-संरचनाएँ और कहानी के क्रम की समझ होती है जिस पर पठन निर्भर करता है। सुनना ग्रहणात्मक (receptive) कौशल है और बोलना अभिव्यक्तात्मक या उत्पादक (productive), पर दोनों सक्रिय हैं। सुनाई देना (hearing) ध्वनि का कानों तक शारीरिक रूप से पहुँचना है; सुनना (listening) उस पर ध्यान देना, उसकी व्याख्या करना और प्रतिक्रिया देना है। शांत कक्षा आवश्यक रूप से सीखने वाली कक्षा नहीं होती, क्योंकि बच्चे भाषा का प्रयोग करके ही भाषा सीखते हैं।

श्रवण के उप-कौशल और चरण

अच्छे श्रवण में मिलती-जुलती ध्वनियों में अंतर करना (अंग्रेज़ी में ship और sheep, हिंदी में कल और काल), बलाघात और अनुतान (intonation) पहचानना, मुख्य भाव समझना, विवरण चुनना, पूर्वानुमान लगाना, वक्ता की भावनाओं का अनुमान लगाना और निर्देशों का पालन करना शामिल है। श्रवण पाठ तीन चरणों में सबसे अच्छे चलते हैं। सुनने से पहले शिक्षक उद्देश्य तय करता है और रुचि जगाता है (यह चित्र देखो: कहानी किस बारे में हो सकती है?); सुनते समय बच्चे कोई कार्य करते हैं, जैसे चित्रों पर निशान लगाना, तालिका भरना या निर्देशों का पालन करना; सुनने के बाद वे चर्चा करते हैं, कहानी दोहराते हैं, अभिनय करते हैं या लिखते हैं। उपयोगी गतिविधियों में पढ़कर सुनाई गई कहानियाँ, कविताएँ और गीत, सुनो और चित्र बनाओ, सुनो और करो (संपूर्ण शारीरिक प्रतिक्रिया, TPR), कानाफूसी का खेल, श्रुतलेख और रिकॉर्ड की गई घोषणाएँ शामिल हैं।

बोलने का विकास

बोलना तब विकसित होता है जब बच्चों के पास कहने को कुछ हो और सुनने वाला कोई हो। गतिविधियों में दिखाओ और बताओ (show-and-tell), चित्र पर बातचीत, अपने अनुभव सुनाना, कहानी सुनाना और दोहराना, भूमिका निर्वाह (रोल प्ले) और नाट्यीकरण, कठपुतली प्रदर्शन, साक्षात्कार, चर्चा और वाद-विवाद, तथा सूचना-अंतराल (information gap) वाले कार्य शामिल हैं, जिनमें हर साथी के पास वह जानकारी होती है जिसकी दूसरे को ज़रूरत है। कविताओं और बालगीतों का पाठ लय और आत्मविश्वास बढ़ाता है। जोड़ी और छोटे समूह में कार्य हर बच्चे को पूरी कक्षा के प्रश्नोत्तर की तुलना में बोलने का अधिक समय देता है, जहाँ कुछ ही बच्चे बोल पाते हैं। संकोची बच्चे पहले जोड़ी में, प्रश्न के बाद प्रतीक्षा-समय मिलने पर, और अपने जीवन से जुड़े विषयों पर अधिक आसानी से बोलते हैं। प्रवाह (fluency), यानी सहज और सरल बोलना, और शुद्धता (accuracy), यानी रूप का सही होना, दोनों महत्त्वपूर्ण हैं, पर आरंभिक चरण में प्रवाह और आत्मविश्वास पहले आते हैं।

कहानी, भूमिका निर्वाह और चर्चा

कहानी सुनाना प्राथमिक कक्षा की सबसे समृद्ध मौखिक गतिविधि है। हाव-भाव, उतार-चढ़ाव, दोहराव और बच्चों को अनुमान लगाने के लिए विरामों के साथ सुनाई गई कहानी बोधगम्य इनपुट, संदर्भ में नए शब्द और कथा का एक आदर्श देती है; फिर बच्चे उसे दोहरा सकते हैं, उसका अंत बदल सकते हैं, उसका अभिनय कर सकते हैं या अपनी कहानी सुना सकते हैं। भूमिका निर्वाह में बच्चे किसी स्थिति में कोई और बनकर बोलते हैं, जैसे दुकानदार और ग्राहक, जिससे दैनिक जीवन की भाषा का अभ्यास होता है और चिंता घटती है, क्योंकि बच्चा एक पात्र के रूप में बोल रहा होता है। बच्चों के जीवन से जुड़े विषयों पर चर्चा कारण देने, विनम्रता से सहमति-असहमति जताने और दूसरों को सुनने की क्षमता बनाती है।

भाषा एक साधन

बच्चे भाषा का प्रयोग केवल चीज़ों के नाम लेने के लिए नहीं, काम करवाने के लिए भी करते हैं। माइकल हैलिडे ने छोटे बच्चों में भाषा के सात प्रकार्य बताए: साधनात्मक (instrumental: अपनी चाह पूरी करना, मुझे पानी चाहिए), नियामक (regulatory: दूसरों के व्यवहार को नियंत्रित करना, यह करो), अंतःक्रियात्मक (interactional: दूसरों से संबंध बनाना), वैयक्तिक (personal: भावनाएँ और पहचान व्यक्त करना), अन्वेषणात्मक (heuristic: जानना, आसमान नीला क्यों है?), कल्पनात्मक (imaginative: काल्पनिक संसार रचना) और प्रतिनिधानात्मक या सूचनात्मक (representational: जानकारी देना)। वाइगोत्स्की जोड़ते हैं कि भाषा चिंतन का साधन है, और NCF 2005 चाहती है कि बच्चे प्रश्न पूछने, तर्क करने और स्वयं को व्यक्त करने के लिए भाषा का प्रयोग करें। अच्छी कक्षा बच्चों को पूछने, समझाने, मनाने, कल्पना करने और बताने के कारण देती है।

बोलने में त्रुटियों पर प्रतिक्रिया

जब बच्चा I goed to the market कहता है, या हिंदी में मैंने खाना खाया के स्थान पर मैंने खाना खाई कहता है, तो यह त्रुटि सीखने का हिस्सा है। हर चूक को सुधारने से बच्चे का विचार-क्रम टूटता है और भावात्मक फ़िल्टर ऊँचा होता है, और कठोरता से टोके गए बच्चे बोलना बंद कर देते हैं। शिक्षक को पहले बच्चे के आशय पर प्रतिक्रिया देनी चाहिए और सही रूप स्वाभाविक ढंग से प्रस्तुत करना चाहिए, जिसे सुधारकर दोहराना (recasting) कहते हैं: Oh, you went to the market? What did you buy? (अच्छा, तुम बाज़ार गए थे? क्या खरीदा?) अन्य सौम्य तरीके हैं स्पष्टीकरण माँगना, रुककर बच्चे को स्वयं सुधारने का अवसर देना, और सामान्य त्रुटियों को नोट करके बाद में उन पर एक छोटी केंद्रित गतिविधि कराना। प्रवाह की गतिविधियों के दौरान शिक्षक बीच में नहीं टोकता। बच्चे की बोली या लहजा कोई त्रुटि नहीं है जिसे उपहास से सुधारा जाए।

CTET क्या पूछता है

बोलने में हुई त्रुटि पर सबसे अच्छी प्रतिक्रिया है प्रयास को स्वीकार करना और सही रूप का आदर्श देना, न कि बच्चे को रोककर सबके सामने सुधारना। बोलना अर्थपूर्ण परिस्थितियों में बात करने के अवसरों से विकसित होता है, उत्तर रटकर सुनाने से नहीं। सुनना एक सक्रिय कौशल है जिसके लिए उद्देश्य और कार्य चाहिए, और प्राथमिक कक्षाओं में मौखिक कौशल विकसित करने के मानक उत्तर हैं कहानी सुनाना, भूमिका निर्वाह और चर्चा।

मुख्य तथ्य

  • सुनाई देना ध्वनि का कानों तक शारीरिक रूप से पहुँचना है; सुनना ध्यान देना, व्याख्या करना और प्रतिक्रिया देना है। सुनना और पढ़ना ग्रहणात्मक कौशल हैं; बोलना और लिखना अभिव्यक्तात्मक।
  • विकास का स्वाभाविक क्रम: सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना (LSRW); मौखिक भाषा वह आधार है जिस पर साक्षरता बनती है।
  • श्रवण पाठ के चरण: सुनने से पहले (उद्देश्य, पूर्वानुमान), सुनते समय (चित्रों पर निशान लगाने जैसा कोई कार्य), सुनने के बाद (चर्चा, पुनर्कथन, लेखन)।
  • बोलने की गतिविधियाँ: दिखाओ और बताओ, चित्र पर बातचीत, कहानी सुनाना, भूमिका निर्वाह, कठपुतली प्रदर्शन, साक्षात्कार, वाद-विवाद और सूचना-अंतराल वाला जोड़ी कार्य।
  • जोड़ी और समूह कार्य हर बच्चे को बोलने का अधिक समय देते हैं; संकोची बच्चे पहले जोड़ी में बोलते हैं और उन्हें प्रश्न के बाद प्रतीक्षा-समय चाहिए।
  • हैलिडे के सात प्रकार्य: साधनात्मक, नियामक, अंतःक्रियात्मक, वैयक्तिक, अन्वेषणात्मक, कल्पनात्मक, प्रतिनिधानात्मक (सूचनात्मक)।
  • सुधारकर दोहराना (recast): शिक्षक बिना यह कहे कि बच्चा गलत था, उसकी बात को सही रूप में दोहराता है (बच्चा: I goed there. शिक्षक: You went there? What did you see?)।
  • आरंभिक चरण में प्रवाह (सहज, सरल बोलना) शुद्धता (सही रूप) से पहले आता है; सुधार के लिए प्रवाह की गतिविधियों को बीच में न रोकें।
  • न्यूनतम युग्म (minimal pairs) ध्वनि-भेद का अभ्यास कराते हैं: अंग्रेज़ी में ship और sheep, हिंदी में कल और काल।

एक नज़र में दोहराव

साक्षरता से पहले मौखिक भाषा; सुनना (ग्रहणात्मक) और बोलना (अभिव्यक्तात्मक) दोनों सक्रिय; सुनाई देना सुनना नहीं है; सुनने से पहले, सुनते समय, सुनने के बाद; TPR, पढ़कर सुनाना, सुनो और चित्र बनाओ, श्रुतलेख; दिखाओ और बताओ, कहानी, भूमिका निर्वाह, वाद-विवाद, सूचना-अंतराल; जोड़ी कार्य, प्रतीक्षा-समय; शुद्धता से पहले प्रवाह; हैलिडे के सात प्रकार्य; सुधारकर दोहराना (recast), स्पष्टीकरण, स्व-सुधार; बोली स्वीकारें, उपहास नहीं।

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