8 में से पाठ 5 · भाषा शिक्षणशास्त्र (भाषा I और भाषा II)
लेखन: विकास की अवस्थाएँ, प्रक्रिया लेखन और सहायक प्रतिपुष्टि
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संप्रेषण के रूप में लेखन
लेखन एक अभिव्यक्तात्मक (उत्पादक) कौशल है और चारों में सबसे कठिन, क्योंकि लेखक को विचार व्यवस्थित करने, शब्द चुनने, वर्तनी और विराम-चिह्नों के नियम मानने और स्वर तथा हाव-भाव की सहायता के बिना पाठक को ध्यान में रखने का काम एक साथ करना होता है। स्वाभाविक क्रम में यह अंत में आता है, पर पठन से गहराई से जुड़ा है: जो बच्चे व्यापक रूप से पढ़ते हैं वे बेहतर लिखते हैं। NCF 2005 बच्चों से श्यामपट्ट से नकल कराने या रटे हुए उत्तर लिखवाने की आलोचना करती है; लेखन आरंभ से ही वास्तविक उद्देश्य और वास्तविक पाठक के लिए सार्थक आत्म-अभिव्यक्ति होना चाहिए। सुलेख और स्वच्छता का महत्त्व है, पर वे लिखने की क्षमता के समान नहीं हैं।
लेखन विकास की अवस्थाएँ
छोटे बच्चे पहचानी जा सकने वाली अवस्थाओं से गुज़रते हैं। वे आड़ी-तिरछी रेखाओं (scribbling) से शुरू करते हैं, पहले अनियंत्रित और फिर नियंत्रित, और चित्रांकन को लेखन के रूप में प्रयोग करते हैं। इसके बाद अक्षर-जैसी आकृतियाँ और नकली अक्षर आते हैं, फिर असली अक्षरों की ऐसी शृंखलाएँ जिनका ध्वनियों से संबंध नहीं होता। फिर वे अक्षरों को ध्वनियों से मिलाने लगते हैं। जे. रिचर्ड जेंट्री (1982) ने वर्तनी की पाँच अवस्थाएँ बताईं: पूर्व-संप्रेषणात्मक (ध्वनियों से असंबद्ध यादृच्छिक अक्षर), अर्ध-ध्वन्यात्मक (कुछ अक्षर शब्द की मुख्य ध्वनियों को दर्शाते हैं), ध्वन्यात्मक (सुनी गई हर ध्वनि लिखी जाती है), संक्रमणकालीन (मानक वर्तनी के पैटर्न दिखने लगते हैं) और सही या परंपरागत वर्तनी। उदाहरण के लिए (ये नमूना वर्तनियाँ केवल समझाने के लिए हैं, जेंट्री की अपनी नहीं), कोई बच्चा monster को पहले MSR, फिर MONSTR, फिर MONSTUR और अंत में MONSTER लिख सकता है। हर अवस्था बढ़ती समझ दिखाती है और उसे महत्त्व मिलना चाहिए, उसे अव्यवस्थित काम कहकर नकारना नहीं चाहिए।
आविष्कृत वर्तनी
जब बच्चा I lik my dg लिखता है, या हिंदी में दीर्घ ई के स्थान पर ह्रस्व इ लिखता है (जैसे पानी के लिए पानि), तो वह आविष्कृत या अस्थायी वर्तनी (invented spelling) का प्रयोग कर रहा है, यानी शब्दों को वैसे लिख रहा है जैसे वह उन्हें सुनता है। यह दिखाता है कि वह समझ गया है कि अक्षर ध्वनियों के प्रतीक हैं और उस ज्ञान को लागू कर रहा है, और इससे वह केवल उन थोड़े शब्दों के बजाय, जिनकी वर्तनी उसे आती है, वे अनेक शब्द लिख पाता है जो वह बोलकर जानता है। आरंभिक कक्षाओं में शिक्षक आविष्कृत वर्तनी स्वीकार करता है, संदेश पर प्रतिक्रिया देता है, और पठन, शब्द-दीवार, व्यक्तिगत शब्द-पुस्तिका और छोटे केंद्रित पाठों के माध्यम से बच्चों को धीरे-धीरे मानक वर्तनी की ओर ले जाता है। शुरू से ही शुद्ध वर्तनी पर ज़ोर देने से बच्चे केवल सुरक्षित, छोटे वाक्य लिखते हैं।
प्रक्रिया लेखन
उत्पाद उपागम (product approach) केवल तैयार रचना को परखता है। प्रक्रिया उपागम, जिसे 1970 और 1980 के दशकों में डोनाल्ड ग्रेव्स जैसे विद्वानों ने विकसित किया, लेखन को चरणों की शृंखला मानता है: पूर्व-लेखन (विचार-मंथन, चर्चा, माइंड मैप, विचारों की सूची), प्रारूप लेखन (शुद्धता की चिंता किए बिना विचार लिखना), संशोधन (प्रायः साथी या शिक्षक की प्रतिपुष्टि के बाद विषय-वस्तु और संगठन सुधारना), संपादन (वर्तनी, व्याकरण और विराम-चिह्न सुधारना) और प्रकाशन या साझा करना (प्रदर्शन, पढ़कर सुनाना, कक्षा पत्रिका)। ये चरण पुनरावर्ती (recursive) हैं: संशोधन करते हुए लेखक फिर विचार-मंथन पर लौट सकता है। किसी प्रारूप पर शिक्षक और बच्चे की छोटी लेखन-वार्ता (writing conference) इस विधि का केंद्र है। लेखन नियंत्रित (नकल, रिक्त स्थान भरना) से निर्देशित (ढाँचे या आदर्श के साथ लिखना) होते हुए मुक्त लेखन की ओर भी बढ़ता है।
सृजनात्मक और प्रकार्यात्मक लेखन
सृजनात्मक लेखन कल्पना और भावनाएँ व्यक्त करता है: कहानियाँ, कविताएँ, डायरी, चित्र-वर्णन, कहानी को आगे बढ़ाना, या किसी पात्र अथवा वस्तु के दृष्टिकोण से लिखना (यदि मैं पेड़ होता)। प्रकार्यात्मक लेखन व्यावहारिक आवश्यकताएँ पूरी करता है: संदेश, सूचनाएँ, पत्र और प्रार्थना-पत्र, निमंत्रण, सूचियाँ, पोस्टर, रिपोर्ट और प्रपत्र। दोनों आवश्यक हैं। अच्छे कार्य केवल विषय देने (गाय पर निबंध लिखो) के बजाय उद्देश्य और पाठक देते हैं (पुस्तकालय कालांश माँगने के लिए प्रधानाचार्य को पत्र लिखो)। जब इससे विचार व्यक्त करने में मदद मिले, बच्चे अपनी घर की भाषाओं में भी प्रारूप लिख सकते हैं।
सहायक प्रतिपुष्टि
प्रतिपुष्टि (feedback) तब सबसे अच्छा काम करती है जब वह विशिष्ट, समय पर और केंद्रित हो। विषय-वस्तु और विचारों पर टिप्पणी पहले आती है (मेले का तुम्हारा वर्णन जीवंत है; बताओ, और क्या देखा?), और यांत्रिक पक्ष बाद में, संपादन के चरण में। पूरे पृष्ठ को लाल स्याही से भर देना बच्चों को हतोत्साहित करता है और कम सिखाता है; एक समय में एक या दो पैटर्न पर ध्यान देना बेहतर है, जैसे पूर्ण विराम या कोई विशेष मात्रा। केवल अंक देने से अधिक लिखित टिप्पणी और बातचीत मदद करती है। बच्चे स्व-आकलन और साथी प्रतिपुष्टि के लिए सरल जाँच-सूचियाँ या रूब्रिक प्रयोग कर सकते हैं, समय के साथ प्रगति दिखाने वाले पोर्टफ़ोलियो रख सकते हैं और प्रतिपुष्टि के बाद संशोधन कर सकते हैं। संवाद-डायरी (dialogue journal) में शिक्षक बच्चे के लिखे का उत्तर सुधारक की तरह नहीं, एक पाठक की तरह देता है, जिससे प्रेरणा बढ़ती है।
CTET क्या पूछता है
विचार-मंथन प्रक्रिया लेखन का पहला चरण है; आविष्कृत वर्तनी विकास की सामान्य अवस्था है; लेखन का उद्देश्य और पाठक होना चाहिए; प्रतिपुष्टि में यांत्रिक पक्ष से पहले विचारों पर ध्यान हो; श्यामपट्ट से नकल और रटे हुए निबंध लेखन का विकास नहीं करते; और सबसे अच्छे लेखन कार्य मुक्त-उत्तरीय और बच्चों के जीवन से जुड़े होते हैं।
मुख्य तथ्य
- लेखन सबसे कठिन अभिव्यक्तात्मक कौशल है; स्वाभाविक क्रम में यह अंत में विकसित होता है, पर व्यापक पठन के साथ बढ़ता है।
- विकास: आड़ी-तिरछी रेखाएँ (पहले अनियंत्रित, फिर नियंत्रित), चित्रांकन, नकली अक्षर, अक्षर-शृंखलाएँ, आविष्कृत वर्तनी, संक्रमणकालीन वर्तनी, परंपरागत वर्तनी।
- जेंट्री (1982) की वर्तनी अवस्थाएँ: पूर्व-संप्रेषणात्मक, अर्ध-ध्वन्यात्मक, ध्वन्यात्मक, संक्रमणकालीन, सही।
- आविष्कृत वर्तनी (I lik my dg; पानी के लिए पानि) अक्षर-ध्वनि ज्ञान दिखाती है; आरंभिक कक्षाओं में इसे स्वीकारें और धीरे-धीरे मानक वर्तनी की ओर ले जाएँ।
- प्रक्रिया लेखन: पूर्व-लेखन (विचार-मंथन), प्रारूप, संशोधन (विषय-वस्तु), संपादन (यांत्रिक पक्ष), प्रकाशन; चरण पुनरावर्ती हैं।
- नियंत्रित लेखन (नकल, रिक्त स्थान भरना), निर्देशित लेखन (ढाँचे या आदर्श के साथ), मुक्त लेखन (अपने विचार)।
- सृजनात्मक लेखन: कहानियाँ, कविताएँ, डायरी; प्रकार्यात्मक लेखन: पत्र, सूचनाएँ, संदेश, निमंत्रण, प्रार्थना-पत्र, रिपोर्ट।
- अच्छी प्रतिपुष्टि: विशिष्ट, समय पर, यांत्रिक पक्ष से पहले विचार, एक समय में एक या दो त्रुटि-पैटर्न, केवल अंक के बजाय टिप्पणी।
- लेखन-वार्ता: किसी प्रारूप पर शिक्षक और बच्चे की छोटी बातचीत; संवाद-डायरी: शिक्षक सुधारक नहीं, पाठक बनकर विषय-वस्तु का उत्तर देता है।
एक नज़र में दोहराव
लेखन: सबसे कठिन अभिव्यक्तात्मक कौशल; NCF 2005 नकल और रटे उत्तरों के विरुद्ध; अवस्थाएँ: आड़ी-तिरछी रेखाएँ, चित्रांकन, नकली अक्षर, अक्षर-शृंखलाएँ, आविष्कृत वर्तनी, परंपरागत; जेंट्री 1982: पूर्व-संप्रेषणात्मक, अर्ध-ध्वन्यात्मक, ध्वन्यात्मक, संक्रमणकालीन, सही; प्रक्रिया लेखन (ग्रेव्स): पूर्व-लेखन, प्रारूप, संशोधन, संपादन, प्रकाशन; नियंत्रित, निर्देशित, मुक्त; सृजनात्मक बनाम प्रकार्यात्मक; प्रतिपुष्टि: पहले विचार, विशिष्ट, पोर्टफ़ोलियो, संवाद-डायरी।